अभिषेक कुमार पाण्डेय रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
शारदीय नवरात्रि 2026: इस बार 10 दिनों तक बरसेगी मां दुर्गा की कृपा; गज पर आगमन लाएगा सुख-समृद्धि और वैभव
शरद ऋतु की शुरुआत, आसमान में तैरते सफेद बादलों के टुकड़े और भोर की ठंडी हवा में महकती हरसिंगार की खुशबू यह संदेश लेकर आती है कि जगतजननी मां जगदंबा अपने मायके पधार रही हैं। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का महापर्व अत्यंत अलौकिक और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। इस वर्ष शक्ति की साधना पूरे 10 दिनों तक चलेगी।
आमतौर पर नवरात्रि नौ दिनों की होती है, लेकिन जब किसी तिथि की वृद्धि होती है, तो देवी आराधना का समय और अधिक बढ़ जाता है। इस बार मां कालरात्रि के स्वरूप की उपासना दो दिन (17 और 18 अक्टूबर) होने से भक्तों को मां के उग्र किंतु करुणामयी स्वरूप को समर्पित करने के लिए अतिरिक्त समय प्राप्त होगा।
हाथी पर आगमन: सुख, समृद्धि और हरियाली का वरदान
देवी भागवत पुराण का एक प्रसिद्ध श्लोक है:
> शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
> गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥
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जब नवरात्रि का शुभारंभ रविवार को होता है, तब मां दुर्गा कैलाश पर्वत से भूलोक की यात्रा के लिए गज (हाथी) को अपना वाहन बनाती हैं। सनातन परंपरा में हाथी को ज्ञान, अपार बल, शांति, प्रचुर वर्षा और कृषि समृद्धि का प्रतीक माना गया है। धर्मग्रंथों के अनुसार, जब मां हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो पृथ्वी पर अन्न-धन के भंडार भरते हैं, अकाल दूर होता है और जनमानस में बौद्धिक चेतना का विस्तार होता है। यह आगमन संकेत देता है कि समाज में अशांति और अभाव का नाश होकर स्थिरता और वैभव का संचार होगा।
दस दिनों की नौ दिव्य शक्तियां: एक आध्यात्मिक यात्रा
नवरात्रि केवल उपवास और मंत्र जाप का पर्व नहीं है, बल्कि यह अंतर्मन के विकारों को भस्म कर आत्मा के जागरण की यात्रा है:
* 11 अक्टूबर — मां शैलपुत्री: हिमालय राज की पुत्री, जो जीवन में स्थिरता, दृढ़ निश्चय और योग साधना की नींव रखती हैं।
* 12 अक्टूबर — मां ब्रह्मचारिणी: कठोर तप और वैराग्य की देवी, जो विपरीत परिस्थितियों में भी संयम और साधना का मार्ग सिखाती हैं।
* 13 अक्टूबर — मां चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किए हुए मां, जो भक्तों को परम शांति, एकाग्रता और आंतरिक साहस प्रदान करती हैं।
* 14 अक्टूबर — मां कूष्मांडा: अपनी मंद मुस्कान से शून्य ब्रह्मांड को रचने वाली आदिशक्ति, जो जीवन में ऊर्जा, प्रकाश और आरोग्यता का संचार करती हैं।
* 15 अक्टूबर — मां स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय की माता, जो वात्सल्य और ममता का साक्षात रूप हैं; इनकी कृपा से मोक्ष और ज्ञान का मार्ग खुलता है।
* 16 अक्टूबर — मां कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट हुईं मां, जिन्होंने महिषासुर के विनाश का संकल्प लिया था। यह स्वरूप बुराई के विरुद्ध अडिग खड़े होने की प्रेरणा देता है।
* 17 एवं 18 अक्टूबर — मां कालरात्रि: घने अंधकार के समान वर्ण, बिखरे बाल और त्रिनेत्र धारिणी। देखने में यह स्वरूप अत्यंत भयानक है, किंतु अपने भक्तों के लिए मां 'शुभंकरी' हैं। काल का भी काल हरने वाली मां कालरात्रि भय, नकारात्मक ऊर्जा, रोग और शत्रुओं का पूर्ण संहार करती हैं।
* 19 अक्टूबर — मां महागौरी: भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप करने वाली मां, जिनका वर्ण शंख और चंद्र के समान धवल है। यह स्वरूप अंतःकरण की शुद्धि और पापों से मुक्ति दिलाता है।
* 20 अक्टूबर — मां सिद्धिदात्री: समस्त सिद्धियों और अलौकिक शक्तियों को प्रदान करने वाली आदिशक्ति। भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से 'अर्धनारीश्वर' रूप प्राप्त किया था।
महिषासुर मर्दिनी की पौराणिक गाथा
शारदीय नवरात्रि की सबसे प्रमुख कथा महिषासुर के अंत से जुड़ी है। जब असुरराज महिषासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान पाकर तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया और देवताओं को स्वर्ग से निष्कासित कर दिया, तब त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और समस्त देवताओं के दिव्य तेज से एक परम तेजस्वी नारी शक्ति का प्राकट्य हुआ।
देवताओं ने मां को अपने अस्त्र-शस्त्र भेंट किए—शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने चक्र, इंद्र ने वज्र और हिमालय ने सिंह प्रदान किया। मां दुर्गा ने महिषासुर की विशाल सेना के साथ नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया और अंततः दसवें दिन (विजयादशमी) उसका वध कर धर्म की पुनः स्थापना की।
इस वर्ष जब 11 अक्टूबर से घर-घर घटस्थापना होगी और अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाएगी, तो यह दस दिनों का महापर्व केवल पूजा तक सीमित न रहकर हमारे भीतर के अहंकार, आलस्य और बुराइयों पर विजय पाने का संकल्प बनेगा।
हाथी पर सवार होकर आ रहीं जगदंबा सभी के जीवन में सुख, आरोग्य और वैभव की वर्षा करें। जय माता दी!
हमर प्रदेश सी जी
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