✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर – हेतराम साहू
2018-19 से 2024-25 तक बिजली बिल के नाम पर आहरित राशि जमा नहीं कराने का मामला, जांच में BEO और लेखापाल की भूमिका सामने आई
महासमुंद/बसना। शासकीय स्कूलों के बिजली बिल भुगतान के लिए आहरित राशि में कथित वित्तीय अनियमितता और गबन के मामले में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। बसना के तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) एवं वर्तमान में सारंगढ़-बिलाईगढ़ के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) जोईधा राम डहरिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा, रायपुर की जांच रिपोर्ट के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई है।
बिना सक्षम स्वीकृति चेक से निकाली गई राशि
जारी निलंबन आदेश के अनुसार, बसना BEO कार्यालय में वर्ष 2018-19 से 2024-25 के दौरान शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बिजली बिल भुगतान के लिए राशि आहरित की गई थी।
आरोप है कि आहरित राशि संबंधित बिजली बिलों के भुगतान के लिए जमा नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि बिजली बिल भुगतान के लिए निर्धारित राशि बिना सक्षम स्वीकृति और नस्ती के चेक के माध्यम से नकद आहरित की गई।
जांच रिपोर्ट में इस प्रक्रिया के चलते शासन को आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामले की शिकायत विनोद कुमार दास और विवेक साहू ने संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा, रायपुर के समक्ष की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग द्वारा जांच टीम गठित कर पूरे मामले की जांच कराई गई।
जांच के दौरान तत्कालीन लेखापाल सूर्यकांत मिश्रा और तत्कालीन BEO जोईधा राम डहरिया की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा तत्कालीन लेखापाल/लिपिक के विरुद्ध पहले ही निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी थी।
अब तत्कालीन BEO पर भी गिरी गाज
जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने अब तत्कालीन BEO जोईधा राम डहरिया के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
शासकीय विद्यालयों से संबंधित राशि के आहरण और उसके उपयोग में वित्तीय नियमों के कथित उल्लंघन का यह मामला विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
शासन की इस कार्रवाई को वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही और शासकीय राशि के पारदर्शी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई और जांच के परिणाम पर भी नजर रहेगी।
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