'महोत्सव का जश्न या बदहाल सड़कों का दर्द?': नगपुरा मेले का नाम बदलने पर बेलतरा में सियासी घमासान, कांग्रेस का तीखा तंज— "3 करोड़ और दें, हर महीने कराएं इवेंट!"
प्राचीन नगपुरा मेले का नाम 'बेलतरा महोत्सव' करने और अवधि घटाने पर भड़की राजनीति; कांग्रेस नेता अंकित गौरहा बोले— "बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने और विधायक के मंच पर नाचने के लिए हो रही 30 लाख की फिजूलखर्ची।"
बिलासपुर/बेलतरा। बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में खस्ताहाल सड़कों और बुनियादी समस्याओं के बीच अब सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। वर्षों पुरानी परंपरा वाले 'नगपुरा मेला महोत्सव' का नाम बदलकर 'बेलतरा महोत्सव' किए जाने और आयोजन की अवधि घटाए जाने पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने इसे जनभावनाओं से खिलवाड़ और राजनीतिक लाभ के लिए प्राचीन संस्कृति पर हमला करार दिया है।
पहचान पर चोट: 7 दिन का मेला सिमटा, नाम भी बदला

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने कहा कि नगपुरा मेला महोत्सव इस अंचल की ऐतिहासिक धरोहर और लोकआस्था का केंद्र रहा है। पूर्व में यह भव्य आयोजन करीब सात दिनों तक चलता था, जिसे क्षेत्रवासी अपनी पहचान मानते हैं।
* जनविरोध की अनदेखी: स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों द्वारा पहले भी नाम बदलने पर लिखित व मौखिक आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिसे दरकिनार कर दिया गया।
* सस्ती राजनीति का आरोप: गौरहा ने कहा कि किसी प्राचीन परंपरा और जनभावना से जुड़े आयोजन का नाम बदलकर अपनी सियासत चमकाना अनुचित है। जनता को महोत्सव से ऐतराज नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पहचान मिटाने की कोशिश से सख्त आपत्ति है।
"3 करोड़ 30 लाख और दीजिए, हर महीने नाच-गाना कराइए": तीखा कटाक्ष
मुख्यमंत्री द्वारा बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपये की घोषणा पर अंकित गौरहा ने तीखा व्यंग्य किया। उन्होंने कहा:
> "अगर सरकार को सिर्फ आयोजनों में ही दिलचस्पी है, तो मुख्यमंत्री जी को 3 करोड़ 30 लाख रुपये और घोषित कर देने चाहिए ताकि बेलतरा में हर महीने एक नया महोत्सव हो सके। इससे जनता सड़क के गड्ढे, बिजली की कटौती और स्वास्थ्य की बदहाली भूल जाएगी और क्षेत्रीय विधायक महोदय को भी हर मंच पर अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन करने का भरपूर अवसर मिल जाएगा।"
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सड़क पर गड्ढे, मंच पर जलसा: प्राथमिकता पर सवाल
गौरहा ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत का खाका खींचते हुए आरोप लगाया कि जनता मूलभूत सुविधाओं के अभाव में त्राहि-त्राहि कर रही है, जबकि सरकार इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त है:
* ये मुख्य मार्ग बदहाल: अशोक नगर–बिरकोना मार्ग, राजकिशोर नगर चौक से छठ घाट मार्ग और सेंदरी–मोपका बायपास जैसे प्रमुख रास्ते चलने लायक नहीं बचे हैं।
* प्राथमिकता तय करे सत्ता पक्ष: उन्होंने कहा कि बेलतरा की जनता को घोषणाओं और चकाचौंध से ज्यादा सुरक्षित सड़कें, सुचारू बिजली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं चाहिए।
सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को अब यह तय करना होगा कि उनकी प्राथमिकता जनता की बुनियादी तकलीफों का हल निकालना है या सिर्फ लाखों रुपये फूंककर सियासी जलसा मनाना।
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