मनोज कुमार भट्ट स्टेट रिपोर्टर बस्तर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ सीजी न्यूज़
जमीन लेने के बाद 18 साल से अस्पताल का इंतजार, 314 किसानों को अब तक नहीं मिला नियुक्ति पत्र, 3 साल से पंचायतों के विकास का पैसा बंद
जगदलपुर। बस्तर के सबसे बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट नगरनार स्टील प्लांट के मेन गेट नंबर-1 पर मंगलवार को बड़ा आंदोलन देखने को मिला। प्रभावित क्षेत्र के 15 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों और किसानों ने प्लांट के गेट की घेराबंदी कर जमकर प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट के लिए जमीन देने के बाद विकास और रोजगार के जो वादे किए गए थे, उनमें से कई वादे आज भी अधूरे हैं। लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद थक-हारकर ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
प्रदर्शन की 3 मुख्य वजह -
1. जमीन लेने के बाद भी 18 साल से अस्पताल का इंतजार -
ग्रामीणों ने बताया कि कोपागुड़ा-खूटपदर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए 22 एकड़ जमीन ली गई थी। 18 साल बाद भी अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं हुआ है। गंभीर बीमारी में बस्तर के मरीजों को आज भी रायपुर या विशाखापट्टनम जाना पड़ता है।
2. 314 किसानों को अब तक नौकरी का नियुक्ति पत्र नहीं -
भू-प्रभावित परिवारों और क्षेत्रीय युवाओं को एनएमडीसी में नौकरी में प्राथमिकता की मांग पूरी नहीं हुई है। 2010 की सूची में 314 किसानों के नाम थे, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं मिली।
3. तीन साल से पंचायतों को विकास के लिए राशि नहीं -
प्लांट में उत्पादन शुरू होने के बाद प्रभावित पंचायतों को मिलने वाली विकास, खेलकूद, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की राशि पिछले तीन साल से बंद है।
आंदोलन में ये 15 गांव हुए शामिल -
नगरनार, आमागुड़ा, कस्तूरी, मारपाल, करनपुर, उपनपाल, बड़ांजी, खूटपदर, चोकावाड़ा, धनपुंजी, भेजापदर, तिरिया, मारकेल-1, मारकेल-2 और कालचा के ग्रामीण प्रदर्शन में शामिल हुए। सरपंच लैखन बघेल और रैनूराम ने बताया कि 10 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा। मौके पर तहसीलदार और एनएमडीसी के अधिकारी पहुंचे और ज्ञापन सौंपा गया।
ग्रामीणों की 10 प्रमुख मांगें -
1. अस्पताल: कोपागुड़ा-खूटपदर में 22 एकड़ जमीन पर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण तत्काल शुरू हो।
2. रोजगार:भू-प्रभावित परिवारों और क्षेत्रीय युवाओं को एनएमडीसी में नौकरी में प्राथमिकता मिले।
3. सिक्स लेन सड़क:भारी ट्रकों और ट्रेलरों के दबाव को देखते हुए जगदलपुर-नगरनार मार्ग को छह लेन किया जाए।
4. बुनियादी सुविधा:प्रभावित गांवों में शिक्षा, पेयजल, सड़क, बिजली, खेल सुविधाओं का विकास हो।
5. सांस्कृतिक आयोजन:मड़ई-मेला, होली और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सहयोग राशि बढ़ाई जाए।
6. दूषित पानी:फसल नुकसान का मुआवजा दें और जल शोधन व पुनर्चक्रण की व्यवस्था की जाए।
7. उम्र सीमा:भर्ती की अधिकतम उम्र 33 से बढ़ाकर 40 वर्ष की जाए।
8. आईटीआई ट्रेड: फिटर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिशियन जैसे तकनीकी ट्रेड शुरू किए जाएं।
9. 314 किसानों की नौकरी: 2010 की सूची के शेष 314 किसानों को नियुक्ति पत्र और तब तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिले।
10 भू-प्रभावित पंचायत: मारकेल-1, मारकेल-2, खम्हरगांव, गरावण्डखुर्द और कालचा को भू-प्रभावित ग्राम पंचायत बनाया जाए।
प्लांट के दूषित पानी से फसल खराब -
ग्रामीणों ने प्लांट के गेट नंबर-3 से निकलने वाले दूषित पानी को लेकर भी शिकायत की। उनका आरोप है कि यह पानी खेतों तक पहुंचने से सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हुई है। धान की फसल पकने से पहले खराब हो रही है। कई बार लिखित शिकायत के बावजूद फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला।
ग्रामीणों ने बैलाडीला की बचेली-किरंदुल खदानों का मुद्दा भी उठाया। कहा कि छह दशक से बस्तर के लौह अयस्क का उत्पादन देश-दुनिया तक पहुंच रहा है और एनएमडीसी नवरत्न उपक्रम का दर्जा हासिल कर चुकी है, लेकिन आज भी स्थानीय लोगों को पेयजल, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
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