अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़
कस्टोडियल डेथ मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, सीबीआई जांच शुरू
छत्तीसगढ़ DGP पर तीखी टिप्पणी के बाद बढ़ी हलचल, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
छत्तीसगढ़ में बिलासपुर सेंट्रल जेल से जुड़े कस्टोडियल डेथ मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। अदालत ने सीबीआई को जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है।
मामला बिलासपुर निवासी 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की जनवरी 2024 में हुई मौत से जुड़ा है। श्रवण को 18 जनवरी 2024 को आबकारी मामले में हिरासत में लिया गया था। तीन दिन बाद 21 जनवरी को उसकी तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद न्यायिक जांच में मौत का कारण सिर में चोट से उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया था। इसके बावजूद पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने में लंबा विलंब हुआ। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि एफआईआर करीब ढाई साल बाद 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई।
DGP की कार्यप्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त टिप्पणी की। अदालत ने एफआईआर में देरी और न्यायिक जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाते हुए डीजीपी को “टोटली इनकम्पीटेंट” तक कहा। अदालत ने यह भी पूछा कि राज्य प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने में सक्षम है या नहीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच केवल कस्टोडियल डेथ की परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन राज्य अधिकारियों के आचरण की भी जांच होगी, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई नहीं की।
अब सीबीआई की जांच में खुलेगी जिम्मेदारी की परत
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने जांच जल्द पूरी करने और अगली सुनवाई में प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि श्रवण की मौत की परिस्थितियों के लिए आखिर कौन-कौन जिम्मेदार था और न्यायिक जांच में सामने आई गंभीर बातों के बावजूद एफआईआर और आपराधिक जांच में इतनी देरी क्यों हुई। सीबीआई को राज्य अधिकारियों की भूमिका भी जांचनी है, ऐसे में पुलिस और जेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर भी नजरें टिक गई हैं।
सरकार की भूमिका पर भी उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और सीबीआई जांच के बाद अब राज्य सरकार के स्तर पर भी जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अदालत ने डीजीपी या डीजी जेल को पद से हटाने का कोई आदेश नहीं दिया है, लेकिन शीर्ष अदालत की टिप्पणियों के बाद अधिकारियों की प्रशासनिक भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।
कस्टोडियल डेथ जैसे संवेदनशील मामलों में पुलिस और जेल प्रशासन की जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अब सीबीआई जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि श्रवण सूर्यवंशी की मौत के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जांच में हुई देरी अथवा लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है।
अब निगाहें सीबीआई की जांच पर हैं—क्या जांच केवल घटना की सच्चाई सामने लाएगी या जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचेगी कार्रवाई की आंच?
Hamar pradesh CG
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