लुधियाना में पाइपलाइन के काम के लिए ले जाए गए 17 वर्षीय युवराज की मौत, परिजनों ने ठेकेदारों पर लगाए गंभीर आरोप
बेहोशी की हालत में एंबुलेंस से घर छोड़ने का दावा, कुछ घंटे बाद हुई मौत; FIR, पोस्टमार्टम और मुआवजे की मांग
बलरामपुर-रामानुजगंज। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत चेरा से एक नाबालिग मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान युवराज सिंह, पिता सुदामा सिंह, निवासी ग्राम चेरा के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार युवराज की उम्र करीब 17 वर्ष थी और वह खैरवार आदिवासी समुदाय से संबंधित था।
परिजनों का आरोप है कि युवराज को करीब तीन महीने पहले लुधियाना, पंजाब में पाइपलाइन के काम के लिए ठेकेदारों के माध्यम से ले जाया गया था। बताया गया है कि 5 सितंबर को युवराज को एंबुलेंस के जरिए गांव स्थित उसके घर लाया गया। परिजनों का दावा है कि उस समय युवराज बेहोशी की हालत में था और उसे घर पर छोड़कर एंबुलेंस वापस चली गई। घर पहुंचने के कुछ घंटे बाद ही युवराज की मौत हो गई।
तीन महीने पहले काम के लिए लुधियाना ले जाने का आरोप
परिजनों की ओर से पुलिस चौकी डिण्डो में दिए गए आवेदन के अनुसार, ठेकेदार लक्ष्मी यादव निवासी महादेवपुर और शशिकांत निवासी दुद्धी, उत्तर प्रदेश कथित तौर पर युवराज को करीब तीन महीने पहले लुधियाना लेकर गए थे।
परिजनों ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि युवराज को उसके अभिभावकों की सहमति के बिना काम के लिए बाहर ले जाया गया। परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि काम करने के बावजूद उसकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामले में पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बेहोशी की हालत में घर छोड़ने का दावा
परिजनों के अनुसार, 5 सितंबर को दोपहर करीब 4 बजे एक एंबुलेंस युवराज को लेकर ग्राम चेरा पहुंची। परिवार का कहना है कि उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था। आरोप है कि युवराज को बेहोशी की हालत में घर पर छोड़कर एंबुलेंस वापस चली गई।
शाम को जब परिवार के सदस्य घर पहुंचे तो युवराज को बेहोश पाया गया। परिजनों के मुताबिक, उसकी हालत बेहद खराब थी और शाम करीब 7 बजे घर पर ही उसकी मौत हो गई।

युवराज की तबीयत बिगड़ने की वजह पर उठे सवाल
परिवार का कहना है कि उन्हें युवराज की तबीयत बिगड़ने या उसकी बीमारी के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। परिजनों ने सवाल उठाया है कि यदि युवराज की हालत गंभीर थी, तो उसे अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं कराया गया और परिवार को समय रहते इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई।

परिजनों ने युवराज को बेहोशी की हालत में गांव लाए जाने की परिस्थितियों और उसकी मौत के वास्तविक कारण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
FIR, मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम और मुआवजे की मांग
मृतक के पिता सुदामा सिंह ने पुलिस चौकी डिण्डो में आवेदन देकर दोनों ठेकेदारों सहित मामले में संलिप्त अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
परिवार ने युवराज के शव का मेडिकल बोर्ड के माध्यम से पोस्टमार्टम कराने की मांग भी की है, ताकि उसकी मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।
इसके अलावा परिवार ने पीड़ित आदिवासी परिवार को नियमानुसार मुआवजा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि जब तक मामले में FIR दर्ज नहीं होती और मुआवजे को लेकर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
आदिवासी समाज ने भी उठाई न्याय की मांग
मामले की जानकारी सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, छत्तीसगढ़ को भी दी गई है। परिवार और समाज की ओर से युवराज की मौत की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
युवराज की मौत से जुड़े मामले में ठेकेदारों पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। फिलहाल परिवार की ओर से पुलिस को दिए गए आवेदन में लगाए गए आरोप ही सामने आए हैं।
युवराज की मौत की वास्तविक वजह क्या थी, लुधियाना में उसकी तबीयत किन परिस्थितियों में बिगड़ी और उसे बेहोशी की हालत में गांव क्यों लाया गया—इन सवालों का जवाब पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।
📍 स्थान: ग्राम पंचायत चेरा, थाना त्रिकुंडा क्षेत्र, ब्लॉक रामचंद्रपुर, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज, छत्तीसगढ़।
संपर्क: पंकज कुमार यादव
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