कलेक्टर ने हरी झंडी दिखाकर किया ‘रन फॉर आयुर्वेदा’ का आगाज़; बिलासपुर में सेहत और प्राचीन चिकित्सा का अनूठा संगम
* 11वें आयुर्वेद दिवस पर कलेक्टोरेट से रिवर व्यू तक गूंजा “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” का नारा
* दौड़ के बाद कार्यशाला में विशेषज्ञों ने दिए म्यूजिक थेरेपी, पंचकर्म और अग्निकर्म के लाइव डेमो
बिलासपुर। 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर शहर में ‘रन फॉर आयुर्वेदा’ का भव्य आयोजन किया गया। कलेक्टर कार्यालय परिसर से माननीय कलेक्टर महोदय ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। हाथों में स्वास्थ्य जागरूकता की तख्तियां और चेहरों पर उत्साह लिए प्रतिभागियों का यह कारवां कलेक्टोरेट से शुरू होकर पुराना सरकंडा रिवर व्यू चौपाटी तक पहुंचा, जहां इस दौड़ का समापन हुआ।

जिला आयुष विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस दौड़ का मुख्य उद्देश्य जनमानस को पारंपरिक दिनचर्या, प्राकृतिक उपचार और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
सड़क पर दौड़, मंच पर वैज्ञानिक चिकित्सा का मंथन
दौड़ के बाद “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” थीम पर केंद्रित एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव के मार्गदर्शन में जुटे विशेषज्ञों ने न केवल व्याख्यान दिए, बल्कि चिकित्सकों को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण (Hands-on Training) भी दिया।
कार्यशाला के प्रमुख आकर्षण:
* म्यूजिक थेरेपी से तनाव मुक्ति: डॉ. रश्मि जितपुरे ने बताया कि 'कारुण्य पैलिएटिव केयर' और 'सुप्रजा' जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में संगीत चिकित्सा किस प्रकार कारगर सिद्ध हो रही है। सही ध्वनि और लय के जरिए अवसाद, मानसिक तनाव और अनिद्रा से राहत पाई जा सकती है।
* पंचकर्म की तकनीक: डॉ. अनिल सोनी ने शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने (डिटॉक्सिफिकेशन) और जटिल व्याधियों के शमन हेतु पंचकर्म के व्यावहारिक आयामों व आवश्यक सावधानियों की बारीकियां साझा कीं।
* अग्निकर्म एवं विद्धकर्म का लाइव डेमो: दर्द निवारण (Pain Management) और मस्कुलोस्केलेटल विकारों के त्वरित उपचार हेतु डॉ. कुमुदिनी पटेल ने मंच पर अग्निकर्म और विद्धकर्म का लाइव प्रदर्शन कर आधुनिक तकनीक से तालमेल समझाया।
“आयुर्वेद केवल उपचार नहीं, जीने की संपूर्ण कला”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ बीमारियों को ठीक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बीमारियों से बचाव और समग्र स्वास्थ्य संवर्धन का मार्ग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे आयोजनों और निरंतर प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर आयुष सेवाओं की गुणवत्ता लगातार सुदृढ़ हो रही है।
कार्यक्रम में जिले भर के आयुष चिकित्सा अधिकारी, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। दौड़ से लेकर वैज्ञानिक सत्र तक, पूरे दिन चले इस आयोजन में बिलासपुर ने आयुर्वेद को जन-जन की दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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