गंगरेल बांध के नौ गेट खुले, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में प्रशासन हाई अलर्ट पर
🟥 हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज ✍️ ब्लॉक रिपोर्टर राहुल सार...
More Stories
180 दिन, अधूरी रिपोर्ट और एक बर्खास्तगी: लालखदान रेल हादसे में महिला ऑपरेटर पर गिरी गाज, लेकिन रेलवे के बड़े चेहरों की जवाबदेही कब?
180 दिन, अधूरी रिपोर्ट और एक बर्खास्तगी: लालखदान रेल हादसे में महिला ऑपरेटर पर गिरी गाज, लेकिन रेलवे के बड़े चेहरों की जवाबदेही कब? लालखदान रेल हादसे के 6 महीने बाद भी कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की 'फाइनल रिपोर्ट' फाइलों से बाहर नहीं आ सकी, लेकिन प्राथमिक जांच के आधार पर महिला ऑपरेटर को नौकरी से बेदखल कर दिया गया। क्या सिस्टम ने अपनी तकनीकी नाकामी छुपाने के लिए सबसे कमजोर कड़ी को निशाना बनाया? बिलासपुर। पटरियों पर जब लोहे के भारी पहिये बेपटरी होते हैं, तो उसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देती है। लालखदान रेल हादसे के वक्त भी यही हुआ था—बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुईं, हाई-लेवल जांच बैठाई गई और संरक्षा के नाम पर कड़े कदम उठाने के दावे किए गए। लेकिन हादसे के ठीक 180 दिन (छह महीने) बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसने रेलवे के समूचे जांच तंत्र और कार्यप्रणाली को सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। रेलवे ने कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) की महज शुरुआती (Preliminary) रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का चाबुक चलाते हुए ड्यूटी पर तैनात महिला ऑपरेटर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस हादसे की वजह से करोड़ों का नुकसान हुआ और यात्रियों की जान पर बन आई थी, उसकी ‘अंतिम जांच रिपोर्ट’ (Final Report) 6 महीने बीत जाने के बाद भी सार्वजनिक नहीं हो पाई है। जांच अधूरी, तो सजा पूरी कैसे? उठ रहे हैं गंभीर सवाल रेलवे के जानकारों और कर्मचारी यूनियनों के बीच इस कार्रवाई को लेकर गहरा असंतोष है। सवाल यह उठ रहा है कि जब तक तकनीकी जांच अपने अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंची, तब तक सिर्फ एक ग्राउंड-लेवल कर्मचारी को दोषी मानकर इतनी बड़ी सजा कैसे सुनाई जा सकती है? * क्या तकनीकी विफलता को मानवीय भूल का चोला पहनाया गया? रेलवे का संचालन सिर्फ एक ऑपरेटर के बटन दबाने पर निर्भर नहीं करता। इसमें आधुनिक इंटरलॉकिंग, सिगनलिंग, ट्रैक सर्किट और बैकअप सुरक्षा प्रणालियों का एक पूरा जाल होता है। अगर सिस्टम में तकनीकी खराबी (Fail-Safe Mechanism की विफलता) थी, तो उसका ठीकरा सिर्फ एक महिला ऑपरेटर के सिर पर क्यों फोड़ा गया? * प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों की अनदेखी: किसी भी निष्पक्ष जांच का नियम है कि आरोपी को अपनी बात रखने और अंतिम जांच रिपोर्ट के हर बिंदु की समीक्षा के बाद ही फैसला दिया जाए। अंतिम रिपोर्ट के बिना सीधे बर्खास्तगी का फरमान यह संदेश देता है कि उच्च अधिकारियों ने खुद को जांच की आंच से बचाने के लिए आनन-फानन में एक ‘बलि का बकरा’ तय कर दिया। 180 दिन की चुप्पी: आखिर फाइनल रिपोर्ट में क्या छुपा रहा है रेलवे? हादसे के बाद CRS ने ग्राउंड इंस्पेक्शन किया, डेटा लॉगर खंगाले और संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। आधुनिक तकनीकी संसाधनों और हाई-स्पीड डेटा एनालिसिस के दौर में एक रेल हादसे की अंतिम रिपोर्ट आने में 180 दिन से ज्यादा का वक्त लगना अपने आप में कई संदेह पैदा करता है: * क्या रिपोर्ट में किसी बड़े अफसर या तकनीकी विंग की चूक है? अक्सर देखा गया है कि जब जांच का दायरा बड़े नीति-निर्माताओं या मेंटेनेंस विंग के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचता है, तो रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। * सिस्टम का बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर कितना फिट था? क्या उस दिन पटरियों और सिग्नलों का मेंटेनेंस तय मानकों के अनुसार था? इस सवाल का जवाब अंतिम रिपोर्ट में ही बंद है। महिला कर्मचारी ही क्यों बनी आसान शिकार? रेलवे में सुरक्षा और परिचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां पदानुक्रम (Hierarchy) में बंटी होती हैं। स्टेशन मास्टर, कंट्रोलर, सेक्शन इंजीनियर से लेकर वरिष्ठ मंडल स्तर के अधिकारी तक सुरक्षा श्रृंखला का हिस्सा होते हैं। मगर लालखदान हादसे में गाज गिरी सबसे निचले पायदान पर बैठी महिला ऑपरेटर पर। साथी कर्मचारियों का दबी जुबान में कहना है कि ग्राउंड स्टाफ के पास न तो कोई बड़ा राजनीतिक रसूख होता है और न ही अपनी पैरवी के लिए बड़े संसाधन, इसलिए रेलवे प्रशासन के लिए ऐसे कर्मियों पर कार्रवाई करके अपनी ‘त्वरित सक्रियता’ दिखाना सबसे आसान विकल्प बन जाता है। सिस्टम को देने होंगे सीधे जवाब लालखदान रेल हादसा केवल एक ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र का परीक्षण है जो हर दिन लाखों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी संभालता है। * क्या रेलवे प्रशासन 180 दिनों बाद भी उस अंतिम रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की हिम्मत जुटाएगा? * क्या बर्खास्त महिला ऑपरेटर को अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा और निष्पक्ष मौका मिलेगा? * या फिर लालखदान की फाइल भी पटरियों की पुरानी धूल में दबकर इतिहास के पन्नों में गुम हो जाएगी? जब तक सिस्टम में बैठे बड़े जिम्मेदारों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक केवल छोटे कर्मचारियों की बर्खास्तगी से न तो रेल पटरियां सुरक्षित होंगी और न ही भविष्य के हादसों को टाला जा सकेगा।
उफनते नाले में बाइक सहित बहे शिक्षक, 100 फीट ऊंचे वॉटरफॉल के पास पेड़ में अटकी बाइक
✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार दुर्ग/छत्तीसगढ़। शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। शासकीय हाई स्कूल कुएं मारी में पदस्थ अंग्रेजी शिक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव सुबह करीब 7:30 बजे स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उफान पर आए नाले को पार करते समय तेज बहाव में वे मोटरसाइकिल सहित बह गए। शिक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने किसी तरह हिम्मत दिखाते हुए खुद को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन उनकी मोटरसाइकिल पानी के तेज बहाव में बह गई। करीब डेढ़ घंटे बाद मोटरसाइकिल घटनास्थल से दूर एक पेड़ में फंसी हुई मिली। बताया गया कि घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर करीब 100 फीट गहरा वॉटरफॉल भी है। ऐसे में यदि शिक्षक या मोटरसाइकिल बहकर आगे निकल जाती, तो गंभीर हादसा हो सकता था। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों के साथ कुएं संकुल एवं बावनी मारी संकुल के शिक्षक भी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से लंबी रस्सियों की व्यवस्था की गई। इसके बाद ग्रामीणों और शिक्षकों ने काफी मशक्कत करते हुए नाले में उतरकर मोटरसाइकिल को रस्सियों से बांधा और सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों में प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ नाराजगी घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार के प्रति नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां बड़ी पुलिया का निर्माण होना था, लेकिन कथित तौर पर लापरवाही बरतते हुए छोटी पुलिया बना दी गई। ग्रामीणों के अनुसार पुलिया के बीच में गड्ढा कर उसे अधूरा छोड़ दिया गया है। बारिश के दौरान नाले में तेज पानी आने पर गड्ढे और पानी की गहराई का सही अंदाजा वाहन चालकों को नहीं हो पाता। इससे यहां लगातार दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पुलिया और सड़क की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कार्य कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।
कल तक सीमा पर मोर्चा और किचन संभाला, आज जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल: 400 BSF रसोइयों की अनसुनी दास्तान
कल तक सीमा पर मोर्चा और किचन संभाला, आज जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल: 400 BSF रसोइयों की अनसुनी दास्तान जिन हाथों ने देश की सीमाओं पर तैनात पहरेदारों के लिए चूल्हा जलाया, 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे संवेदनशील अभियानों में जांबाजी दिखाई और अफसरों से बढ़िया खाने के लिए नकद इनाम बटोरे—आज वही हाथ अपनी आजीविका बचाने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। बहाली की मांग को लेकर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के करीब 400 बर्खास्त ट्रेडसमैन (कुक और वॉटर कैरियर) 9 अक्टूबर से जंतर-मंतर पर अनशन शुरू करने जा रहे हैं। प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें साफ हैं; दिल्ली पुलिस दो दिन के अनशन की जगह जवानों पर केवल एक दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल का दबाव बना रही है। ठगी का शिकार या प्रशासनिक पेच? यह मामला महज नौकरी जाने का नहीं, बल्कि एक बड़े साइबर सिंडिकेट और व्यवस्था की चूक का नतीजा है: * शर्त जो कभी पूरी हो ही नहीं सकती थी: 2023-24 में जब बीएसएफ ने रसोइयों और जलवाहकों की भर्ती निकाली, तो नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) के तहत NSQF लेवल-1 सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया। * आरटीआई का विस्फोटक खुलासा: NSDC से मांगी गई आरटीआई (संख्या: NSDCO/R/E/26/00096) में यह बात सामने आई कि संस्था ने 2015 से 2023 के बीच इस श्रेणी का कोई सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया था। * साइबर गिरोह के चंगुल में फंसे युवा: भर्ती में शामिल होने की होड़ में देश के दूर-दराज इलाकों से आए ये साधारण युवा फर्जी ट्रेनिंग सेंटरों और साइबर ठगों के जाल में फंस गए और उन्हें फर्जी दस्तावेज थमा दिए गए। > "इन लड़कों ने कोई जालसाजी नहीं की, ये खुद एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हुए हैं। जब सिस्टम ने ही आठ साल तक वह सर्टिफिकेट जारी नहीं किया, तो फिर बच्चों को कसूरवार ठहराकर सड़क पर क्यों धकेला गया?" > — रणबीर सिंह, महासचिव, अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन रोजगार मेले का तमगा, अब लाखों का कर्ज विडंबना यह है कि इन सभी युवाओं को खुद प्रधानमंत्री रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र बांटे गए थे। वर्दी मिलने के बाद इन्होंने सेना और पैरामिलिट्री के कठोर मानकों पर काम किया। आज स्थिति यह है: * कर्ज का दलदल: भर्ती होने के बाद कई जवानों ने अपने परिवारों के लिए 5 से 7 लाख रुपये तक के बैंक लोन ले लिए। अब नौकरी छिनने के बाद ईएमआई और बैंक रिकवरी का खौफ सिर पर है। * रोजी-रोटी का संकट: घरों में चूल्हा बुझने की नौबत है, जबकि ये वही लोग हैं जो सीमाओं पर दूसरों का पेट भरते थे। प्रधानमंत्री को आखिरी चिट्ठी जंतर-मंतर पर उतरने से पहले इन जवानों ने प्रधानमंत्री को एक भावुक ईमेल भेजकर अपनी पीड़ा बयां की है और सेवा में पुनः बहाली की मांग की है। अब 9 अक्टूबर को देश की राजधानी यह देखेगी कि सरहद पर देश की सेवा करने वाले 400 जवान 'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के झंडे तले अपनी ही व्यवस्था से अपने हक की रोटी कैसे मांगते हैं। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
बिलासपुर-दिल्ली फ्लाइट का हवा में इंजन फेल, सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग; बाल-बाल बचीं 70 से ज्यादा यात्रियों की सांसें
बिलासपुर-दिल्ली फ्लाइट का हवा में इंजन फेल, सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग; बाल-बाल बचीं 70 से ज्यादा यात्रियों की सांसें बिलासपुर से उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद एलायंस एयर के विमान का एक इंजन अचानक हुआ बंद पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टला, सिंगल इंजन के सहारे कराई गई सुरक्षित लैंडिंग यात्रियों में मची थी चीख-पुकार, DGCA ने दिए घटना की तकनीकी जांच के आदेश बिलासपुर/नई दिल्ली: बिलासपुर के बिलासा देवी केंवट (चकरभाठा) एयरपोर्ट से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए रवाना हुई एलायंस एयर की फ्लाइट में शनिवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद बीच आसमान में विमान के एक इंजन ने तकनीकी खराबी के चलते काम करना बंद कर दिया। कॉकपिट में चेतावनी अलार्म बजते ही पायलटों ने तत्काल एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क साधा और प्राथमिकता के आधार पर आपातकालीन लैंडिंग कराई। विमान में सवार सभी यात्री और क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित हैं। हवा में सुनाई दिया तेज धमाका, सहम गए यात्री विमान में सवार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्लेन जब तय ऊंचाई की ओर बढ़ रहा था, तभी दाईं तरफ एक जोरदार झटके के साथ आवाज आई और केबिन में कंपन शुरू हो गया। इसके कुछ ही सेकंड बाद इंजन की सामान्य आवाज थम गई। केबिन क्रू ने तुरंत यात्रियों को सीट बेल्ट बांधे रखने और शांत रहने के निर्देश दिए। हालांकि, अचानक हुए इस घटनाक्रम से कई यात्रियों की सांसें अटक गईं और केबिन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पायलट की सूझबूझ: सिंगल इंजन पर सुरक्षित टचडाउन हवा में एक इंजन पूरी तरह ठप होने के बावजूद मुख्य पायलट ने संयम नहीं खोया। एविएशन एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) के तहत 'पैन-पैन' (आपात स्थिति) की घोषणा की गई। रनवे पर पहले से ही एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियों को अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया गया था। पायलट ने विमान को सुरक्षित रनवे पर उतारा, जिसके बाद ग्राउंड स्टाफ और यात्रियों ने राहत की सांस ली। DGCA ने दिए जांच के आदेश घटना के तुरंत बाद संबंधित विमान को ग्राउंड (AOG) कर दिया गया है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने मामले का संज्ञान लेते हुए तकनीकी जांच के निर्देश दिए हैं। जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इंजन अचानक बंद होने की वजह बर्ड-हिट (पक्षी का टकराना) थी, कोई मैकेनिकल खराबी या फ्यूल प्रेशर में आई अचानक गिरावट। एयरलाइन प्रबंधन ने प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक उड़ानों की व्यवस्था की है। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
जांजगीर-चांपा: पिकनिक की खुशियां मातम में बदलीं, हसदेव नदी के भंवर में समाए तीन युवक; SDRF की तलाश जारी
जांजगीर-चांपा: पिकनिक की खुशियां मातम में बदलीं, हसदेव नदी के भंवर में समाए तीन युवक; SDRF की तलाश जारी जांजगीर-चांपा। छुट्टियों के दौरान दोस्तों के साथ समय बिताने का उत्साह उस वक्त एक भयानक त्रासदी में बदल गया, जब जिले के चर्चित देवरी-चिचौली पिकनिक स्पॉट पर हसदेव नदी की उफनती लहरों ने तीन जिंदगियों को अपनी चपेट में ले लिया। नदी के गहरे पानी और तेज बहाव का अंदाजा न होने के चलते नहाने उतरे तीन युवक देखते ही देखते भंवर में फंसकर लापता हो गए। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, वहीं युवकों के घरों में कोहराम मचा हुआ है। मौज-मस्ती के बीच काल बना तेज बहाव घटना के संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक, अलग-अलग जिलों से दोस्तों का एक समूह सप्ताहांत पर देवरी पिकनिक स्पॉट घूमने पहुंचा था। नदी किनारे खाना-पीना और हंसी-मजाक का दौर चल रहा था। इसी दौरान नहाने का मन बनाकर तीन युवक नदी के पानी में उतर गए: * मुरारी साहू (22 वर्ष) – निवासी: पंडरिया (कबीरधाम/कवर्धा) * पवन लाल (22 वर्ष) – निवासी: चिरमिरी (एमसीबी) * राचिन सिंह (23 वर्ष) – निवासी: अंबिकापुर (सरगुजा) प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तीनों युवकों को तैरना नहीं आता था। वे किनारे पर ही पानी में अठखेलियां कर रहे थे, तभी अचानक उनका पैर फिसला और वे गहरे पानी में चले गए। नदी के भीतर उठ रहे तेज भंवर ने उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं दिया। साथियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की और चीख-पुकार मचाई, लेकिन पलक झपकते ही तीनों पानी की गहराई में ओझल हो गए। प्रशासन और रेस्क्यू टीम मौके पर, तलाशी अभियान जारी हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन और नगर सेना के जवान तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की विशेष टीम को बुलाया गया। * गोताखोरों की मदद से नदी के संभावित ठिकानों और भंवर वाले क्षेत्रों में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। * मोटरबोट और जाल की मदद से नदी के डाउनस्ट्रीम इलाकों तक खोजबीन की जा रही है। * पानी का तेज बहाव और गहराई रेस्क्यू ऑपरेशन में बड़ी चुनौती साबित हो रही है, जिसके चलते अभी तक युवकों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, प्रशासन ने की सतर्क रहने की अपील हादसे की खबर मिलते ही युवकों के परिजन घटनास्थल की ओर रवाना हो गए हैं। परिवारों में चीख-पुकार और मातम का माहौल है, हर कोई किसी चमत्कार की आस लगाए नदी किनारे टकटकी बांधे बैठा है। इधर, स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे पिकनिक स्पॉट्स पर नदी, नालों और जलाशयों के गहरे पानी में उतरने से बचें। खासकर ऐसे स्थान जहां पानी की धार तेज हो या भंवर बनते हों, वहां किनारे से ही दूरी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। आदर्श शर्मा , ब्लॉक रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
जिस चौखट पर 50 साल बांटी इंसाफ की उम्मीद, उसी के सामने रौंद दी गई एक मुंशी की जिंदगी; आधी सदी की सेवा के बाद भी साइकिल-टूटी बाइक से आगे नहीं बढ़ सके दीपक दास, अब लहू से सने सवाल का जवाब कौन देगा?
जिस चौखट पर 50 साल बांटी इंसाफ की उम्मीद, उसी के सामने रौंद दी गई एक मुंशी की जिंदगी; आधी सदी की सेवा के बाद भी साइकिल-टूटी बाइक से आगे नहीं बढ़ सके दीपक दास, अब लहू से सने सवाल का जवाब कौन देगा? बिलासपुर हाईकोर्ट के मुहाने पर संवेदनहीनता का वीभत्स चेहरा: 74 साल की उम्र, आधी सदी तक वकालत की रीढ़ रहे मुंशी की मौत पर क्या सिर्फ 2 पन्नों का 'मर्ग' और कागजी खानापूर्ति ही अंतिम न्याय है? बिलासपुर (ग्राउंड ज़ीरो से झकझोरती रिपोर्ट)। कलम की ताकत, कानून की गरिमा और न्याय की ऊंची-ऊंची दीवारों के ठीक सामने गुरुवार को जो कुछ हुआ, उसने पूरे सिस्टम की इंसानियत और सामाजिक सुरक्षा के हर दावे को तार-तार कर दिया। जिस शख्स ने अपनी जिंदगी के 50 अनमोल साल वकीलों के चैंबर, मुकदमों की तारीखों, फाइलों के बस्तों और हाईकोर्ट की गलियों को सींचने में खपा दिए—वही 74 वर्षीय बुजुर्ग मुंशी दीपक दास मानिकपुरी उसी अदालत के मुख्य द्वार के सामने एक बेलगाम माजदा के पहियों तले बेरहमी से कुचल दिए गए। यह महज एक साधारण सड़क हादसा नहीं है; यह उस खोखली व्यवस्था का नंगा सच है, जहाँ 50 साल तक इंसाफ की इबारत लिखने में पर्दे के पीछे रहने वाला अदना सा मजदूर आधी सदी बाद भी अपनी मुफलिसी नहीं बदल सका। साइकिल से शुरू हुआ सफर टूटी बाइक पर ही खत्म हो गया, और अंत में नसीब हुआ तो बस सड़क पर बिखरा अपना ही लहू और सिम्स मरच्यूरी की ठंडी मेज! आधी सदी की सेवा का यह सिला? न पेंशन, न सुरक्षा, न सम्मान! सोचिए, जिस हाईकोर्ट में अरबों-करोड़ों के दावों पर बहस होती है, उस परिसर की रीढ़ कहे जाने वाले मुंशी की क्या हैसियत है? * 50 साल की निष्ठा: दीपक दास ने अपनी आधी उम्र से ज्यादा वक्त अधिवक्ताओं और पक्षकारों के बीच पुल बनकर गुजारा। कभी बारिश में, कभी तपती धूप में, सिर्फ इसलिए दौड़ते रहे कि किसी गरीब की जमानत न रुक जाए, किसी की याचिका खारिज न हो जाए। * बदले में क्या मिला? 74 साल की ढलती उम्र, जब हड्डियों को आराम की जरूरत थी, तब भी वे परिवार के दो वक्त के चूल्हे के लिए काम पर निकलने को मजबूर थे। न कोई सामाजिक सुरक्षा योजना, न कोई भविष्य निधि का सहारा। * रफ्तार का खूनी तमाचा: शाम 4 बजे काम खत्म कर जब यह बुजुर्ग अपने घर (कोनी, बिलासा ताल) की ओर निकला, तो वीआईपी सड़क पर बेखौफ दौड़ रही माजदा ने उन्हें रौंदकर सिस्टम के मुंह पर तमाचा जड़ दिया। हाईकोर्ट बार, जिला प्रशासन और शासन के सामने सुलगते सवाल—अब सिर्फ 'शोक' जताएंगे या हक दिलाएंगे? इस दर्दनाक मौत ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, श्रम विभाग और जिला प्रशासन के सामने एक बड़ा नैतिक सवाल खड़ा कर दिया है। क्या 50 साल तक न्याय के परिसर की सेवा करने वाले एक बुजुर्ग का परिवार अब सड़क पर भीख मांगेगा? इस परिवार को तत्काल और असाधारण आर्थिक सहायता दिलाना अब कोई उपकार नहीं, बल्कि सिस्टम का नैतिक प्रायश्चित होना चाहिए: * हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन से 10 लाख का विशेष वेलफेयर फंड: जिस वकालत बिरादरी की सेवा में दीपक दास ने 50 साल होम कर दिए, उस बार एसोसिएशन और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पहली जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी निधि और चंदे से पीड़ित परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये की अंतरिम आर्थिक सहायता तुरंत जारी करें। * मुख्यमंत्री विशेष स्वेच्छानुदान से 20 लाख रुपये: जिस राज्य में आयोजनों और विज्ञापनों पर करोड़ों पानी की तरह बहाए जाते हैं, क्या वहाँ आधी सदी तक न्याय व्यवस्था की सेवा करने वाले एक कमजोर वर्ग के बुजुर्ग की शहादत पर मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से 20 लाख रुपये की एकमुश्त राहत नहीं दी जा सकती? * कलेक्टर रेडक्रॉस से तत्काल राहत राशि: औपचारिकता पूरी होने का इंतजार किए बिना बिलासपुर कलेक्टर तत्काल रेडक्रॉस फंड से पीड़ित परिवार को 1 से 2 लाख रुपये की तात्कालिक सहायता सौंपें ताकि घर का चूल्हा बुझने से बच सके। * परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा/सम्मानजनक रोजगार: परिवार का कमाऊ मुखिया छिन जाने के बाद उनके आश्रित को हाईकोर्ट परिसर, कलेक्टोरेट या किसी अधिवक्ता कार्यालय में स्थायी/संविदा स्तर पर सम्मानजनक रोजगार दिया जाए। * MACT ट्रिब्यूनल में फास्ट-ट्रैक क्लेम (50 लाख की क्षतिपूर्ति): माजदा वाहन मालिक और बीमा कंपनी के खिलाफ मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में विशेष फास्ट-ट्रैक बेंच के जरिए अधिकतम मुआवजे का अंतरिम आदेश 30 दिनों के भीतर पारित हो। फाइलों के बोझ तले दबी आत्मा अब न्याय मांग रही है! अगर आज भी अधिवक्ता समुदाय, शासन और न्यायपालिका एक साथ खड़े होकर इस 74 वर्षीय बुजुर्ग मुंशी के परिवार को उसका वाजिब हक और ऐतिहासिक मुआवजा नहीं दिला पाते, तो फिर हाईकोर्ट की दीवारों पर लिखे 'सत्यमेव जयते' के कोई मायने नहीं रह जाएंगे। दीपक दास तो चले गए, लेकिन उनका खून उस सड़क पर सूखते हुए हर रोज आने-जाने वाले सफेद कॉलर वाले मसीहाओं से पूछेगा—"साहब, मेरे 50 साल की सेवा की कीमत सिर्फ एक मर्ग की चिट्ठी थी क्या?" मैने स्वयं इनके साथ कुछ समय कार्य किया है।मानिकपुरी जी बहुत बुद्धिजीवी व्यक्ति थे ।कानून के मुख्य स्तंभ फाइलिंग के वो माहिर थे।प्रभु उनको अपने श्री चरणों में स्थान दें """ अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
अस्पताल की पहली मंजिल से कूदे आरक्षक, इलाज के दौरान मौत
✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार बीमारी से परेशान होकर आत्मघाती कदम उठाने की आशंका, पुलिस जांच में जुटी रायपुर। राजधानी रायपुर में एक आरक्षक द्वारा निजी अस्पताल की पहली मंजिल से छलांग लगाने का मामला सामने आया है। घटना पंडरी थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। हादसे में गंभीर रूप से घायल आरक्षक की उपचार के दौरान मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, आरक्षक वेद नारायण राम हृदय संबंधी सर्जरी के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। बताया जा रहा है कि बीमारी को लेकर मानसिक रूप से परेशान होने के चलते उन्होंने अस्पताल की पहली मंजिल से छलांग लगा दी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल आरक्षक को तत्काल उपचार के लिए भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पंडरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। आरक्षक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसकी वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
लोखंडी में दो ट्रेलर डंपरों की जोरदार भिड़ंत, एक चालक घायल
✍🏻 हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ ब्लॉक रिपोर्टर - आशीष यादव रतनपुर बिलासपुर लोखंडी बिलासपुर। ग्राम लोखंडी के पास पटेल ढाबा के सामने कोरबा से रायपुर की ओर जा रहे एक ही दिशा के दो ट्रेलर डंपरों में जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में एक चालक को मामूली चोट आई, जबकि बाकी सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सामने चल रहा ट्रेलर डंपर क्रमांक CG10BS0610 बाईं ओर सर्विस रोड में जाने के लिए किनारे हो रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रहा ट्रेलर डंपर क्रमांक CG10BP2035 उससे जोरदार तरीके से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ट्रेलरों के केबिन का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सकरी पुलिस और NHAI की पेट्रोलिंग गाड़ी तत्काल मौके पर पहुंची और राहत एवं सहायता कार्य शुरू किया। टीम ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की स्थिति का जायजा लेते हुए मौके पर व्यवस्था संभाली। राहत की बात यह रही कि हादसे में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। एक चालक को मामूली चोट लगने की जानकारी है।
बेलतरा के पास भीषण सड़क हादसा, ट्रेलर डंपर के परखच्चे उड़े तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर आगे चल रहे अज्ञात ट्रेलर को मारी जोरदार टक्कर, बड़ा हादसा टला
✍🏻 हमर प्रदेश ब्लॉक रिपोर्टर - आशीष यादव रतनपुर बिलासपुर छत्तीसगढ़ बेलतरा के पास भीषण सड़क हादसा, ट्रेलर डंपर के परखच्चे उड़े तेज रफ्तार में अनियंत्रित होकर आगे चल रहे अज्ञात ट्रेलर को मारी जोरदार टक्कर, बड़ा हादसा टला बेलतरा/बिलासपुर, 10 सितंबर 2026। बेलतरा के पास गुरुवार तड़के करीब 02:06 बजे तेज रफ्तार के चलते एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। कोरबा से बिलासपुर की ओर जा रहा ट्रेलर डंपर क्रमांक CG15 EH0218 अचानक अनियंत्रित हो गया और आगे उसी दिशा में जा रहे एक अज्ञात ट्रेलर डंपर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि CG15 EH0218 ट्रेलर के सामने का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद वाहन सड़क किनारे क्षतिग्रस्त हालत में दिखाई दिया। मौके की तस्वीरों में ट्रेलर के केबिन और अगले हिस्से को भारी नुकसान साफ नजर आ रहा है। बाल-बाल टला बड़ा हादसा हादसे की सबसे राहतभरी बात यह रही कि दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई। हालांकि, जिस तरह से ट्रेलर का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ, उससे हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। करीब 4 घंटे बाद हटाया गया दुर्घटनाग्रस्त वाहन दुर्घटना के बाद मौके पर क्षतिग्रस्त वाहन मौजूद रहा। सुबह 05:56 बजे दुर्घटना स्थल को साफ कर दिया गया, जिसके बाद यातायात को सामान्य किया गया। तेज रफ्तार फिर बनी हादसे की वजह यह घटना एक बार फिर हाईवे पर तेज रफ्तार और वाहन नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े करती है। रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही के बीच थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ”
छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्लास्टिक ले जाना पड़ेगा भारी: वन अमले को तलाशी, जब्ती और मौके पर चालान का मिला अधिकार
छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्लास्टिक ले जाना पड़ेगा भारी: वन अमले को तलाशी, जब्ती और मौके पर चालान का मिला अधिकार रायपुर: छत्तीसगढ़ के जंगलों और वन्यजीवों को बढ़ते प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अब वन क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा फैलाने या प्रतिबंधित प्लास्टिक ले जाने वालों की खैर नहीं होगी। वन विभाग के मैदानी अमले को अब संदिग्धों की तलाशी लेने, सामग्री जब्त करने और मौके पर ही जुर्माना वसूलने के व्यापक कानूनी अधिकार दे दिए गए हैं। जांच से लेकर जब्ती तक, स्टाफ को खुली छूट नई व्यवस्था के तहत वन चौकियों, कोर एरिया और संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर तैनात वनकर्मी किसी भी वाहन, बैग या व्यक्ति की तलाशी ले सकेंगे। यदि किसी के पास प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक, पॉलीथीन बैग, थर्माकोल या प्लास्टिक की गैर-जरूरी सामग्री पाई जाती है, तो वन अमला उसे तत्काल प्रभाव से जब्त कर सकेगा। बार-बार चेतावनी के बावजूद कचरा फेंकने वालों पर ऑन-द-स्पॉट भारी चालान भी काटा जाएगा। वन्यजीवों के अस्तित्व पर मंडराता खतरा बना वजह जंगलों और राष्ट्रीय उद्यानों में पर्यटकों द्वारा छोड़े गए प्लास्टिक कचरे—जैसे पानी की बोतलें, रैपर और खाद्य पैकेट—को जंगली जानवर भोजन समझकर निगल लेते हैं। इससे पेट में रुकावट के कारण कई दुर्लभ वन्यजीवों की असमय मौत के मामले सामने आए हैं। इसी खतरे को रोकने और जंगलों को 'ज़ीरो-प्लास्टिक ज़ोन' बनाने के उद्देश्य से विभाग ने नियमों को अधिक सख्त किया है। पर्यटकों और स्थानीय दुकानदारों पर भी नजर * चेकपोस्ट पर सघन जांच: अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के प्रवेश द्वारों पर ही तलाशी ली जाएगी ताकि जंगल में प्लास्टिक का प्रवेश रुक सके। * इको-फ्रेंडली विकल्प अनिवार्य: जंगल के आसपास स्थित ढाबों, रिसॉर्ट्स और स्थानीय दुकानों में भी डिस्पोजेबल प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश हैं। * सख्त जुर्माने का प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर सामान्य दंड से लेकर पर्यावरण क्षति शुल्क (Environmental Compensation) तक वसूला जाएगा। वन विभाग ने आम जनता और जंगल सफारी का आनंद लेने आ रहे सैलानियों से अपील की है कि वे जंगलों में कपड़े के थैले और पुन: प्रयोज्य बोतलों का उपयोग करें, ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ हमर प्रदेश सी जी
BREAKING NEWS | तेज रफ्तार ने मचाया तांडव, ट्रेलर ने ट्रक को पीछे से मारी जोरदार टक्कर हादसे में ट्रेलर के केबिन के उड़े परखच्चे, चालक घायल
✍🏻 हमर प्रदेश छत्तीसगढ - आशीष यादव ब्लॉक रिपोर्टर रतनपुर रतनपुर/हाईवे। बुधवार, 09 सितंबर 2026 की सुबह करीब 05:06 बजे हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। ग्राम छतौना के पास कोरबा से रायपुर की ओर जा रहा ट्रेलर डम्पर क्रमांक CG10BZ6361 तेज रफ्तार के चलते अनियंत्रित हो गया और आगे उसी दिशा में जा रहे एक अज्ञात ट्रक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेलर डम्पर के सामने के हिस्से और चालक केबिन के परखच्चे उड़ गए। मौके से सामने आई तस्वीरें हादसे की भयावहता को साफ बयां कर रही हैं। वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और केबिन का काफी हिस्सा टूटकर अलग हो गया। बाल-बाल बची चालक की जान हादसे में ट्रेलर चालक को मामूली चोटें आईं। दुर्घटना के बाद घायल चालक को निजी वाहन की मदद से उपचार के लिए निजी अस्पताल पहुंचाया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी अन्य व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। 3 घंटे से ज्यादा चला राहत कार्य दुर्घटना के बाद मौके पर क्षतिग्रस्त वाहन को हटाने और सड़क को सुरक्षित करने की कार्रवाई की गई। सुबह 08:21 बजे दुर्घटना स्थल को पूरी तरह साफ कर दिया गया, जिसके बाद यातायात सामान्य हुआ। तेज रफ्तार पर फिर उठे सवाल इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार और सुरक्षित दूरी बनाए रखने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात और तड़के सुबह के समय वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
BREAKING NEWS | तेज रफ्तार ने मचाया तांडव, ट्रेलर ने ट्रक को पीछे से मारी जोरदार टक्कर
✍🏻 हमर प्रदेश - आशीष यादव ब्लॉकरिपोर्टर रतनपुर BREAKING NEWS | तेज रफ्तार ने मचाया तांडव, ट्रेलर ने ट्रक को पीछे से मारी जोरदार टक्कर हादसे में ट्रेलर के केबिन के उड़े परखच्चे, चालक घायल रतनपुर/हाईवे। बुधवार, 09 सितंबर 2026 की सुबह करीब 05:06 बजे हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया। ग्राम छतौना के पास कोरबा से रायपुर की ओर जा रहा ट्रेलर डम्पर क्रमांक CG10BZ6361 तेज रफ्तार के चलते अनियंत्रित हो गया और आगे उसी दिशा में जा रहे एक अज्ञात ट्रक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रेलर डम्पर के सामने के हिस्से और चालक केबिन के परखच्चे उड़ गए। मौके से सामने आई तस्वीरें हादसे की भयावहता को साफ बयां कर रही हैं। वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और केबिन का काफी हिस्सा टूटकर अलग हो गया। बाल-बाल बची चालक की जान हादसे में ट्रेलर चालक को मामूली चोटें आईं। दुर्घटना के बाद घायल चालक को निजी वाहन की मदद से उपचार के लिए निजी अस्पताल पहुंचाया गया। राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी अन्य व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। 3 घंटे से ज्यादा चला राहत कार्य दुर्घटना के बाद मौके पर क्षतिग्रस्त वाहन को हटाने और सड़क को सुरक्षित करने की कार्रवाई की गई। सुबह 08:21 बजे दुर्घटना स्थल को पूरी तरह साफ कर दिया गया, जिसके बाद यातायात सामान्य हुआ। तेज रफ्तार पर फिर उठे सवाल इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार और सुरक्षित दूरी बनाए रखने को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात और तड़के सुबह के समय वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।