✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
रायपुर। राजधानी में अपराधियों की पहचान और वारदात के बाद उनके भागने का रूट ट्रेस करने के लिए लगाए गए आईटीएमएस कैमरे अब पुलिस के लिए ही चुनौती बन गए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर आउटर इलाकों तक लगे 100 से ज्यादा कैमरे बंद बताए जा रहे हैं, जबकि कई चालू कैमरों से भी धुंधली तस्वीरें मिल रही हैं। इसका सीधा असर लूट, डकैती, चोरी, छिनैती और हिट एंड रन जैसे मामलों की जांच पर पड़ रहा है।
कई कैमरों की स्क्रीन ब्लैक, धुंधले फुटेज से पहचान मुश्किल
वारदात के बाद पुलिस जब इंटीग्रेटेड सिटी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से फुटेज खंगालती है तो कई कैमरों की स्क्रीन ब्लैक मिलती है। कुछ कैमरों के लेंस पर धूल और तकनीकी खराबी के कारण संदिग्धों के चेहरे और वाहनों के नंबर स्पष्ट दिखाई नहीं देते। वहीं, प्रमुख चौक-चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नलों का मेंटेनेंस भी प्रभावित हो रहा है।
कंपनी का करीब 8 करोड़ रुपये भुगतान लंबित
राजधानी में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का संचालन करने वाली एलएंडटी कंपनी का करीब 8 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। भुगतान अटकने के कारण सिस्टम के संचालन और मेंटेनेंस का काम प्रभावित हुआ है।
इसके चलते शहर में लगे 372 CCTV कैमरों और 36 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों की सर्विसिंग भी रुक गई है। कई महत्वपूर्ण स्थानों के कैमरे बंद हैं, जबकि चालू कैमरों के लेंस साफ नहीं होने से फुटेज की गुणवत्ता खराब हो गई है।
अपराध की जांच में पुलिस के सामने बड़ी दिक्कतें
वाहनों के नंबर ट्रेस करना मुश्किल: 36 ANPR कैमरों के प्रभावित होने से अपराध में इस्तेमाल वाहनों के नंबर पढ़ना मुश्किल हो गया है।
बदमाशों का भागने का रूट तलाशना कठिन: लूट या डकैती के बाद आरोपी किस रास्ते से शहर से बाहर निकले, इसकी जानकारी जुटाना चुनौती बन गया है।
निजी CCTV पर बढ़ी निर्भरता: पुलिस अब दुकानों, मकानों और अन्य प्रतिष्ठानों में लगे निजी कैमरों की फुटेज पर अधिक निर्भर हो रही है।
हिट एंड रन मामलों में परेशानी: सड़क दुर्घटनाओं के बाद फरार वाहन चालकों की पहचान में भी CCTV की खराब स्थिति बाधा बन रही है।
व्यापारियों से बाहर की ओर कैमरे लगाने की अपील
आईटीएमएस कैमरों के भरोसेमंद तरीके से काम नहीं करने के बाद पुलिस अब निजी CCTV नेटवर्क का सहारा ले रही है। वारदात वाले इलाकों में दुकानों, मकानों और प्रतिष्ठानों से फुटेज जुटाई जा रही है। पुलिस व्यापारियों और संस्थानों से अपने परिसरों के बाहर सड़क की ओर कैमरे लगाने की अपील भी कर रही है, खासकर उन स्थानों पर जहां से वाहनों के कटिंग या फरार होने के रास्ते अधिक हैं।
हालांकि निजी कैमरों की सीमित कवरेज और अलग-अलग गुणवत्ता के कारण हर मामले में स्पष्ट फुटेज मिलना संभव नहीं हो पा रहा है।
DCP ट्रैफिक ने कही भुगतान के बाद सुधार की बात
डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा के मुताबिक, कैमरों और सिग्नलों का मेंटेनेंस करने वाली कंपनी का भुगतान लंबित है। इसके लिए पत्राचार किया गया है और भुगतान होने के बाद कैमरों तथा सिग्नलों को दुरुस्त करने का काम किया जाएगा।
सवाल यह है कि जब राजधानी की ‘तीसरी आंख’ ही धुंधली पड़ जाए, तो अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस कितनी मुश्किलों का सामना करेगी?
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