अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर
गोकुल नगर में अवैध रेत-गिट्टी का खेल! रहवासियों का फूटा गुस्सा, खनिज विभाग ने मारा छापा
छह महीने से कॉलोनी में दौड़ रहे भारी वाहन, सड़कें धंसीं तो बच्चों की पढ़ाई से लेकर एंबुलेंस तक प्रभावित; दोबारा भंडारण पर पुलिस ने दी सख्त चेतावनी
बिलासपुर। रहवासी कॉलोनी के बीचों-बीच रेत और गिट्टी का कारोबार चले और लोगों की नींद हराम न हो—ऐसा भला कैसे हो सकता है? गोकुल नगर घुरू, वार्ड क्रमांक 04 में पिछले करीब छह महीनों से कथित अवैध रेत-गिट्टी भंडारण को लेकर रहवासियों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर आ गया। शिकायतों का सिलसिला बढ़ा तो खनिज विभाग को भी मौके पर उतरना पड़ा। टीम ने पहुंचकर जांच की, भंडारित सामग्री की जब्ती की और आगे की कार्रवाई तक उसे सुपुर्दगी में दे दिया।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कार्रवाई के बाद दोबारा भंडारण की कोशिश ने मामला फिर गरमा दिया और देखते ही देखते कॉलोनी में विवाद की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और संबंधित पक्ष को विभागीय आदेशों का पालन करने की सख्त हिदायत दी।
छह महीने से कॉलोनी में भारी वाहनों की धमाचौकड़ी
रहवासियों के मुताबिक, गोकुल नगर में रेत और गिट्टी के भंडारण के चलते ट्रक, ट्रैक्टर, हाइवा, डंपर, छोटा हाथी और जेसीबी जैसे भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। सुबह से लेकर देर रात तक वाहनों की आवाजाही ने रहवासी इलाके की शांति और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से कॉलोनी की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कई जगह सड़क धंस चुकी है और बारिश ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है।
सड़क खराब हुई तो बच्चों की पढ़ाई भी अटक गई
मामला सिर्फ सड़क खराब होने तक सीमित नहीं है। रहवासियों के अनुसार सड़क की हालत इतनी खराब हो गई कि स्कूल जाने वाले बच्चों को लाने-ले जाने वाले ऑटो और वैन चालकों ने कॉलोनी के भीतर आना तक बंद कर दिया।
यानी जिस सड़क से बच्चों को स्कूल जाना था, वही सड़क भारी वाहनों के बोझ तले ऐसी बदहाल हुई कि अब छोटे बच्चों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई।
एंबुलेंस और कचरा गाड़ियों के सामने भी संकट
रहवासियों का आरोप है कि सड़क और भारी वाहनों की समस्या के कारण आपात स्थिति में एंबुलेंस के पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियों की आवाजाही भी प्रभावित होने की बात कही गई है।
स्थानीय लोगों ने देर रात वाहन चालकों द्वारा शराब का सेवन किए जाने का आरोप लगाते हुए कॉलोनी में असुरक्षा का माहौल बनने की शिकायत भी की है।
शिकायतों के बाद खनिज विभाग की एंट्री
लगातार शिकायतों के बाद खनिज निरीक्षक विकास सिंह राजपूत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थल का निरीक्षण और जांच करने के बाद भंडारित सामग्री के संबंध में जब्ती की कार्रवाई की गई। जब्ती पत्र तैयार कर सामग्री को आगामी आदेश तक कॉलोनी निवासी अनिल शुक्ला की सुपुर्दगी में दिया गया।
विभाग की कार्रवाई से रहवासियों को उम्मीद जगी कि अब कॉलोनी के बीच चल रहे इस कथित अवैध भंडारण पर पूरी तरह ब्रेक लगेगा।
कार्रवाई के बाद फिर शुरू हुआ भंडारण तो भड़के लोग
रहवासियों का आरोप है कि विभागीय कार्रवाई के बावजूद मनीष जांगड़े और उसके साथियों द्वारा दोबारा रेत-गिट्टी का भंडारण शुरू करने का प्रयास किया गया। इसके बाद कॉलोनीवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इसका विरोध किया।
विरोध के दौरान विवाद की स्थिति बनने पर मामला पुलिस तक पहुंच गया।
मौके पर पहुंची पुलिस, दी दो टूक हिदायत
विवाद की सूचना मिलते ही सकरी थाने की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने संबंधित पक्ष को खनिज विभाग की कार्रवाई और आदेशों का पालन करने की हिदायत दी। साथ ही दस्तावेजों के साथ थाने पहुंचकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए।
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद कुछ लोगों द्वारा उन्हें धमकाने का प्रयास किया गया। इस संबंध में पुलिस को जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
अब दोबारा भंडारण हुआ तो बढ़ सकती है मुश्किल
खनिज विभाग के नियमानुसार रहवासी इलाके में खनिज सामग्री का अवैध भंडारण पाए जाने पर जब्ती और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। जुर्माना और अन्य वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने तक सामग्री सुपुर्दगी में रखी जा सकती है, लेकिन उसी स्थान पर दोबारा भंडारण करना नियमों के खिलाफ है।
यदि विभागीय कार्रवाई के बाद भी अवैध भंडारण दोबारा किया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई भी हो सकती है।
रहवासियों का सवाल—आखिर कॉलोनी में कब लौटेगा सुकून?
गोकुल नगर के रहवासियों की मांग अब साफ है—कॉलोनी को रेत-गिट्टी के अवैध भंडारण और भारी वाहनों के दबाव से मुक्त कराया जाए।
लोगों का कहना है कि रहवासी इलाके में कारोबार के नाम पर यदि सड़कें टूटें, बच्चों की आवाजाही प्रभावित हो, कचरा गाड़ियां और एंबुलेंस तक परेशान हों और ऊपर से विरोध करने पर धमकियों का सामना करना पड़े, तो आखिर प्रशासन कब तक सिर्फ कार्रवाई और शिकायतों के बीच घूमता रहेगा?
अब निगाहें खनिज विभाग और पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं। क्योंकि सवाल सिर्फ रेत और गिट्टी के ढेर का नहीं, बल्कि पूरी कॉलोनी के सुकून और सुरक्षा का है।
रिपोर्ट अभिषेक कुमार पाण्डेय
स्टेट हेड रिपोर्टर
बिलासपुर छत्तीसगढ़
20/08/26
Hamar pradesh CG
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