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🎤 ब्लॉक रिपोर्टर – संजय कुमार शुक्ला
📍 बिलासपुर, छत्तीसगढ़
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RBI की सब्सिडियरी BRBNMPL ने मांगी इनबिल्ट सिक्योरिटी फीचर्स वाली पॉलीमर सब्सट्रेट शीट, शुरुआत कम मूल्यवर्ग के नोटों से होने की संभावना
बिलासपुर। भारत में प्लास्टिक यानी पॉलीमर बैंकनोट की शुरुआत की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक की सब्सिडियरी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) द्वारा इनबिल्ट सिक्योरिटी फीचर्स वाली पॉलीमर सब्सट्रेट शीट की सप्लाई के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया गया था। इसके जवाब में भारतीय और विदेशी कंपनियों ने बोली लगाई है।
हालांकि, अभी भारत में पॉलीमर नोट जारी नहीं किए गए हैं। फिलहाल यह प्रक्रिया पॉलीमर सब्सट्रेट की आपूर्ति और उसके परीक्षण से जुड़ी हुई है।
68 हजार रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की जरूरत
BRBNMPL के EOI दस्तावेजों के अनुसार भारतीय बैंकनोट की छपाई के लिए करीब 68,000 रीम पॉलीमर सब्सट्रेट की आवश्यकता बताई गई है। प्रत्येक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट होने की बात कही गई है।
बोली लगाने वाली कंपनियों को नमूने भी उपलब्ध कराने होंगे। इन नमूनों का देश के अलग-अलग जलवायु क्षेत्रों में परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण में योग्य पाए जाने वाले सब्सट्रेट को आगे BRBNMPL की अंतिम निविदा प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
विदेशी कंपनियों के साथ भारतीय कंपनियां भी दौड़ में
जानकारी के मुताबिक EOI में कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। इनमें भारतीय कंपनी कॉस्मो फर्स्ट का नाम भी सामने आया है। कंपनी BOPP यानी बाइएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन के क्षेत्र में काम करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेंसी सब्सट्रेट से जुड़े कारोबार में भी उसकी भागीदारी रही है।
इसके अलावा ब्रिटेन की बैंकनोट निर्माता कंपनी De La Rue और ऑस्ट्रेलिया की CCL Secure जैसी कंपनियों के भी इस प्रक्रिया में शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
चीन और पाकिस्तान से ऑपरेशन अलग रखने की शर्त
पॉलीमर करेंसी की संवेदनशीलता को देखते हुए बोलीदाताओं के लिए कई सुरक्षा एवं गोपनीयता संबंधी शर्तें रखी गई हैं। कंपनियों से इंटीग्रिटी पैक्ट, कॉन्फिडेंशियलिटी एग्रीमेंट, नो-एजेंट पैक्ट और अन्य आवश्यक अंडरटेकिंग देने को कहा गया है।
इसके अलावा भारत में उनके संचालन को चीन और पाकिस्तान में मौजूद उनके संचालन से अलग रखने के लिए फायरवॉल व्यवस्था सुनिश्चित करने की शर्त भी बताई गई है।
पॉलीमर सब्सट्रेट में Animal Tallow नहीं होने की शर्त
बोली लगाने वाली कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि BRBNMPL को उपलब्ध कराए जाने वाले पॉलीमर सब्सट्रेट में Animal Tallow या उसका DNA मौजूद नहीं होगा।
विदेशों में बैंकनोट निर्माण में पशु-आधारित सामग्री के इस्तेमाल को लेकर हुए विवादों के कारण भारत में भी इस पहल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है।
नकली नोटों पर लगाम और ज्यादा टिकाऊ होने का दावा
पॉलीमर बैंकनोट के समर्थकों का कहना है कि ये पारंपरिक कॉटन-बेस्ड करेंसी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ हो सकते हैं। इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की समस्या पर नियंत्रण में मदद मिल सकती है।
ऑस्ट्रेलिया की CCL Secure सहित पॉलीमर करेंसी क्षेत्र की कंपनियां पॉलीमर नोटों की लंबी उम्र और सुरक्षा संबंधी विशेषताओं पर जोर देती रही हैं।
पहले 10 और 20 रुपये के नोटों की संभावना
जानकारों के अनुसार भारत में यदि पॉलीमर करेंसी को आगे बढ़ाया जाता है तो इसकी शुरुआत कम मूल्यवर्ग के नोटों, जैसे 10 और 20 रुपये से किए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
भारत में पॉलीमर बैंकनोट की दिशा में BRBNMPL की यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे देश में करेंसी की सुरक्षा, टिकाऊपन और आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स को लेकर नए विकल्पों का परीक्षण किया जा सकेगा।

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