हौसले की भाप से महकती जिंदगी: मोमोज का ठेला लगाकर पूरे परिवार की ढाल बनी यह जुझारू महिला
मुश्किल हालात के आगे घुटने टेकने से किया इनकार, सड़क किनारे शुरू किया छोटा सा कारोबार; आज बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर की हर जरूरत उठा रही हैं अपने दम पर।
डेस्क रिपोर्ट, डिजिटल न्यूज नेटवर्क:
नई शुरुआत की कहानी
जब जिंदगी ने कड़े इम्तिहान लेने शुरू किए, तो उन्होंने हाथ फैलाने के बजाय पसीना बहाने का फैसला किया। सामाजिक संकोच और आर्थिक तंगी को पीछे छोड़ते हुए एक महिला ने सड़क किनारे मोमोज का ठेला लगाया और साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। आज उनका यह छोटा सा ठेला सिर्फ खाने-पीने की दुकान नहीं, बल्कि पूरे परिवार के स्वाभिमान और जीविका का मजबूत आधार बन चुका है।
तड़के 5 बजे से शुरू होती है दिनचर्या
उनकी दिनचर्या आम लोगों के जागने से पहले शुरू हो जाती है। घर का सारा काम निबटाने के बाद सब्जियों की कटाई, मोमोज की तैयारी और फिर दोपहर से लेकर देर शाम तक चूल्हे की तपिश के बीच ग्राहकों को गरमा-गरम मोमोज परोसना। इस थका देने वाली मेहनत के पीछे बस एक ही लक्ष्य है—बच्चों को अच्छी शिक्षा देना और परिवार को किसी के आगे झुकने न देना।
प्रमुख बिंदु:
* आत्मनिर्भरता की मिसाल: किसी सरकारी मदद या कर्ज के मोहताज रहे बिना अपने दम पर खड़ा किया काम।
* परिवार का संबल: बच्चों की स्कूल फीस, घर का राशन और दवाइयों का खर्च इसी कमाई से निकलता है।
* ग्राहकों का भरोसा: स्वाद के साथ-साथ साफ-सफाई और महिला के सौम्य व्यवहार के चलते लोग दूर-दूर से आते हैं।
"काम छोटा या बड़ा नहीं होता"
महिला का कहना है कि शुरुआत में लोगों ने तरह-तरह की बातें बनाईं, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उनका मानना है कि मेहनत की रोटी में जो सुकून और सम्मान है, वह किसी और चीज में नहीं। स्थानीय लोग और नियमित ग्राहक भी महिला के इस अदम्य साहस और काम के प्रति निष्ठा की खुलकर तारीफ करते हैं।
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अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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