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सुशासन को खुला चैलेंज: ई-कोर्ट दरकिनार, बिलासपुर तहसील में ‘ऑफलाइन’ उगाही का खेल! 22 जुलाई से नकल शाखा पर ताला, जनता बेहाल

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सुशासन को खुला चैलेंज: ई-कोर्ट दरकिनार, बिलासपुर तहसील में ‘ऑफलाइन’ उगाही का खेल! 22 जुलाई से नकल शाखा पर ताला, जनता बेहाल

सुशासन को खुला चैलेंज: ई-कोर्ट दरकिनार, बिलासपुर तहसील में ‘ऑफलाइन’ उगाही का खेल! 22 जुलाई से नकल शाखा पर ताला, जनता बेहाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार जिस ‘जीरो टॉलरेंस’ और ‘डिजिटल सुशासन’ का दावा कर रही है, उसे बिलासपुर तहसील कार्यालय में खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। राजस्व मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए बनाए गए ई-कोर्ट सिस्टम को दरकिनार कर मोपका और जूना बिलासपुर क्षेत्र के संवेदनशील राजस्व प्रकरणों को ‘ऑफलाइन’ फाइलों में दबाकर मनमानी और कथित लेन-देन का खुला खेल चल रहा है। आलम यह है कि पिछले एक महीने से अधिक समय से यानी 22 जुलाई से नकल शाखा पर ताला लटका हुआ है, जिससे हजारों पक्षकार अपने ही जमीन के रिकॉर्ड्स के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

‘दाम’ मिले तो 48 घंटे में फैसला, वरना फाइलों पर धूल!

बिलासपुर तहसील में नामांतरण, फौती, खाता विभाजन और सीमांकन जैसे आम मामलों को जानबूझकर महीनों लटकाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि जब तक बिचौलियों के जरिए कथित ‘भेंट-पूजा’ नहीं होती, तब तक फाइलों में तारीख पर तारीख मिलती रहती है। वहीं, कथित तौर पर मनमाफिक 'सुविधा शुल्क' पहुंचते ही वही पेचीदा फाइलें महज दो दिन में आदेश में तब्दील हो जाती हैं।

ई-कोर्ट को ताक पर रखकर ‘ऑफलाइन’ फाइलिंग का खेल क्यों?

शासन के कड़े निर्देश हैं कि हर राजस्व मामले की एंट्री ‘ई-राजस्व कोर्ट’ में अनिवार्य रूप से दर्ज हो, ताकि पक्षकार घर बैठे अपने केस का स्टेटस, पेशी और आदेश देख सकें। इसके बावजूद बिलासपुर तहसील में बैकडोर से ऑफलाइन फाइलें चलाने का दुस्साहस किसके संरक्षण में हो रहा है?

 * सिस्टम से छेड़छाड़: मोपका और जूना बिलासपुर क्षेत्र के दर्जनों मामलों को ई-पोर्टल पर दर्ज ही नहीं किया गया।

 * पारदर्शिता का कत्ल: जब केस ऑनलाइन ही नहीं होगा, तो उच्चाधिकारियों की मॉनिटरिंग और समय-सीमा के नियम अपने आप निष्प्रभावी हो जाते हैं।

 * सीधा सवाल: क्या यह पूरी व्यवस्था केवल समानांतर ‘उगाही तंत्र’ को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए बनाई गई है?

22 जुलाई से नकल शाखा बंद: जनता के अधिकारों पर प्रशासनिक ताला

तहसील कार्यालय की बदहाली का सबसे बड़ा सबूत यह है कि 22 जुलाई से नकल शाखा पूरी तरह बंद पड़ी है। न किसी को आदेश की कॉपी मिल रही है, न खसरा-बी1 और न ही अन्य जरूरी राजस्व दस्तावेज। बैंक लोन, कोर्ट-कचहरी के काम और रजिस्ट्री से जुड़े सारे मामले ठप पड़े हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।

कलेक्टर से लेकर सीएम तक शिकायत की तैयारी

तहसीलदार की इस कथित मनमानी, ऑफलाइन फाइलों के गोरखधंधे और बढ़ती पेंडेंसी से त्रस्त पीड़ित अब एकजुट होकर पूरे साक्ष्यों के साथ बिलासपुर कलेक्टर और मुख्यमंत्री सचिवालय तक सीधी शिकायत दर्ज कराने जा रहे हैं।

अब सवाल जिला प्रशासन और शासन से है—क्या ई-कोर्ट नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले अधिकारियों पर सख्त ऑडिट और जांच बिठाई जाएगी, या फिर यह मामला भी आम जनता की फाइलों की तरह पेंडेंसी के अंधेरे में दबा दिया जाएगा?

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ 

हमर प्रदेश सी जी 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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