अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब 1 साल की वकालत कर भी बन सकेंगे जज, न्यायिक सेवा परीक्षा के नियमों में बड़ा बदलाव!
नई दिल्ली:
निचली अदालतों में जज बनने का सपना संजोए लाखों लॉ ग्रेजुएट्स और युवा वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सर्वोच्च अदालत ने अपने पुराने रुख में बड़ा संशोधन करते हुए एंट्री-लेवल न्यायिक सेवा (Judicial Service) परीक्षा में शामिल होने के लिए अनिवार्य वकालत के अनुभव को 3 साल से घटाकर मात्र 1 साल कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की 3 सदस्यीय विशेष पीठ ने 2:1 के बहुमत से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
मई 2025 के फैसले में संशोधन: क्यों बदला रुख?
दरअसल, मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने सीधे लॉ पास करने वाले छात्रों के जज बनने पर रोक लगाते हुए 3 साल की कोर्ट प्रैक्टिस अनिवार्य कर दी थी। बिना किसी पूर्व सूचना और पर्याप्त संक्रमण काल (Transition Period) के लागू इस नियम से वर्षों से तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया था। देशव्यापी विरोध और पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने माना कि नियमों में अचानक बदलाव से युवा वकीलों के साथ नाइंसाफी हुई थी।
नए आदेश की मुख्य बातें:
* 31 मार्च 2027 तक 'अनुभव की बाध्यता शून्य': 25 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच निकलने वाले सभी न्यायिक सेवा विज्ञापनों में फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स भी बिना किसी वकालत अनुभव के सीधे परीक्षा दे सकेंगे।
* 1 साल की ट्रेनिंग अनिवार्य: संक्रमण काल में चुने गए नए अभ्यर्थियों को सीधे बेंच पर नहीं बैठाया जाएगा; उन्हें 1 वर्ष तक बतौर 'ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर' निर्धारित क्लर्कशिप व गहन प्रशिक्षण पूरा करना होगा।
* 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा 1 साल का नियम: 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाली सभी न्यायिक भर्तियों के लिए उम्मीदवारों के पास न्यूनतम 1 वर्ष की नियमित वकालत का अनुभव होना अनिवार्य रहेगा।
सर्वोच्च अदालत के इस फैसले से न्यायपालिका में युवाओं की ऊर्जा और व्यावहारिक अनुभव का संतुलन बनेगा, वहीं लंबे समय से असमंजस में फंसे देश भर के लॉ छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
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