Thursday, October 1 2026
ताज़ा ख़बरें

Loading...

सिहावा के गणेश घाट में गूंजा ऋषि पंचमी का जयघोष, प्राचीन ऋषि परंपरा और औघट बाबा की स्मृतियों से जुड़ा महोत्सव...

State Head - Kishor
State Head - Kishor
26 Views 5 Min Read 0 Comments
सिहावा के गणेश घाट में गूंजा ऋषि पंचमी का जयघोष, प्राचीन ऋषि परंपरा और औघट बाबा की स्मृतियों से जुड़ा महोत्सव...

✒️हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज ब्लॉक रिपोर्टर... जयकिशन साहू नगरी सिहावा 

नगरी क्षेत्र स्थित महानदी के उद्गम स्थल सिहावा में ऋषि पंचमी के अवसर पर आस्था, परंपरा और प्राचीन संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। गणेश घाट स्थित गुरु आश्रम में पारंपरिक विधि-विधान के साथ ऋषि पंचमी महोत्सव मनाया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

मंगलवार को आयोजित महोत्सव के दौरान भुरसी मावली, माता महामाई, मां शीतला, ठाकुर देव, श्रृंगि ऋषि, औघट बाबा और बालगिर बाबा सहित क्षेत्र के आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई। परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों का स्वागत-सम्मान किया गया। इसके बाद गुरु भाइयों ने गुरु महाराज का आशीर्वाद लेकर विधि-विधान से पूजा संपन्न की।

वर्षों पुरानी है महोत्सव की परंपरा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गणेश घाट में ऋषि पंचमी महोत्सव मनाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। सिहावा क्षेत्र को प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों और साधु-संतों की तपोभूमि माना जाता है। इसी प्राचीन परंपरा से जुड़ी औघट बाबा की स्मृतियां भी आज तक यहां जीवंत हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई वर्ष पहले एक बाबा यहां आए थे, जो तंत्र-मंत्र के साथ जड़ी-बूटियों और पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान की जानकारी देते थे। उनका वास्तविक नाम किसी को ज्ञात नहीं था। उनकी साधना और ज्ञान के प्रति समर्पण के चलते लोगों ने उन्हें ‘औघट बाबा’ के नाम से पुकारना शुरू किया। आज भी उनकी स्मृतियां इस आयोजन और स्थानीय परंपराओं में दिखाई देती हैं।

दुर्लभ जड़ी-बूटियों का कराया गया सेवन

ऋषि पंचमी महोत्सव की खास बात रही कि प्राचीन परंपरा के अनुरूप श्रद्धालुओं को दुर्लभ जड़ी-बूटियों का सेवन भी कराया गया। आयोजकों और स्थानीय लोगों के अनुसार इसे पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान तथा पूर्वजों से मिली विरासत के प्रति सम्मान के रूप में देखा जाता है।

इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ऋषि-मुनियों ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ वनौषधियों और जड़ी-बूटियों से जुड़े महत्वपूर्ण ज्ञान को समाज तक पहुंचाया। ऐसे पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

महानदी उद्गम की धरती पर आस्था और प्रकृति का संगम

सिहावा की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह क्षेत्र महानदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपराओं का संगम यहां आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

ऋषि पंचमी महोत्सव में समिति के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान गणेश घाट और गुरु आश्रम का वातावरण धार्मिक एवं भक्तिमय बना रहा।

गणेश घाट में आयोजित यह महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सिहावा की प्राचीन ऋषि परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान को सहेजने का संदेश भी देता नजर आया।

State Head - Kishor
Written by

State Head - Kishor

Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

Comments (0)

Leave a Comment

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

Latest Videos