"साइकिल नहीं, शिक्षक दीजिए!" — बलरामपुर के मुरकोल में सड़कों पर उतरीं बेटियां; भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के इलाके में शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर
बलरामपुर (वाड्रफनगर):
एक तरफ सरकार मंचों से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'संवरता छत्तीसगढ़' के कसीदे पढ़ती है, तो दूसरी तरफ बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाले शासकीय हाई स्कूल मुरकोल की यह जमीनी तस्वीर पूरे सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा जड़ती है। हाथ में किताबें लिए जिन छात्राओं को क्लासरूम के ब्लैकबोर्ड की तरफ देखना चाहिए था, वे आज स्कूल के बाहर खड़ी होकर अपने ही भविष्य की भीख मांगने को मजबूर हैं।
क्षेत्र की भाजपा विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते के इलाके में सरकारी स्कूलों का हाल यह है कि स्कूल की इमारतें तो खड़ी हैं, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक नदारद हैं।
"साइकिल बांटने आए अफसरों से गिड़गिड़ाए, पर किसी ने नहीं सुनी"
कैमरों और मीडिया के सामने फफकती और आक्रोश जताती छात्राओं का दर्द किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोरने के लिए काफी है:
> "साइकिल वितरण के दौरान जब बड़े अधिकारी आए थे, हमने हाथ जोड़कर गुहार लगाई थी कि हमें साइकिल से ज्यादा शिक्षक चाहिए। पर हमारी बात किसी ने ऊपर तक नहीं पहुंचाई। 20-22 तारीख से तिमाही परीक्षाएं सिर पर हैं, केमिस्ट्री जैसे कठिन विषय के शिक्षक का महीनों से अता-पता नहीं है। हिंदी और संस्कृत तक की पढ़ाई नहीं हो रही। हम परीक्षा में क्या लिखेंगे? क्या खाली पन्ने जमा करके पास होंगे?"
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छात्राओं का आरोप है कि दूसरे विषयों के शिक्षक जैसे-तैसे खानापूर्ति कर रहे हैं, जिससे बोर्ड परीक्षा और आगे कॉलेज जाने का सपना देख रहे सैकड़ों बच्चों का भविष्य सीधे तौर पर अंधकार में धकेला जा रहा है।
सत्ताधारी दल की विधायक के क्षेत्र में ही 'शून्य' पड़ा शिक्षा तंत्र
मुरकोल का यह शासकीय हाई स्कूल कोई अकेला मामला नहीं, बल्कि सुदूर वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर चल रहे मजाक की बानगी है। सवाल सीधे तौर पर स्थानीय भाजपा विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से है—
* जब करोड़ों के बजट और योजनाओं के दावे किए जाते हैं, तो हाई स्कूल के स्तर पर केमिस्ट्री जैसे मुख्य विषय के शिक्षक की नियुक्ति क्यों नहीं हो पाई?
* क्या सरकारी स्कूलों को सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों और चुनावी दावों की औपचारिकता मान लिया गया है?
* इन ग्रामीण, आदिवासी बेटियों के भविष्य से खिलवाड़ का जिम्मेदार आखिर कौन है?
छात्राओं का आर-पार का ऐलान: "शिक्षक नहीं तो स्कूल बंद"
मुरकोल स्कूल की छात्राओं ने अब दो-टूक अल्टीमेटम दे दिया है—"जब तक विषयवार नियमित शिक्षक नहीं आएंगे, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा।" छात्राओं का साफ कहना है कि जब पढ़ाई ही नहीं होगी, तो वे स्कूल आकर क्या करेंगी।
अब देखना यह होगा कि एयर-कंडीशनर कमरों में बैठे बलरामपुर के शिक्षा अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि इन बेटियों की इस चीख को सुनते हैं, या हमेशा की तरह एक और ग्रामीण स्कूल की प्रतिभाओं की बलि सिस्टम की लापरवाही पर चढ़ा दी जाएगी।
पंकज कुमार यादव रिपोर्टर वार्डफनगर रामानुजगंज छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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