Wednesday, September 30 2026
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सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू, 3,035 करोड़ के बकाये की वसूली तेज

State Head - Kishor
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सरकारी दफ्तरों में प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू, 3,035 करोड़ के बकाये की वसूली तेज

✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार

नगरीय प्रशासन और पंचायत विभाग पर ही 2,582 करोड़ से ज्यादा बकाया, कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में 1 अगस्त 2026 से प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू होने के बाद पावर वितरण कंपनी ने सरकारी विभागों से पुराने बिजली बकाये की वसूली तेज कर दी है। जून 2026 तक प्रदेश के सरकारी विभागों पर कुल 3,035.37 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इसमें करीब 85 फीसदी यानी 2,582.74 करोड़ रुपये अकेले नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित हैं।

 

बकाया वसूली के लिए बिजली कंपनी ने नगरीय निकायों से जुड़े स्ट्रीट लाइट, पानी की टंकियों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बिलासपुर नगर निगम में हाल ही में कुछ कनेक्शन काटे जाने की जानकारी सामने आई है।

 

वहीं, हाउसिंग बोर्ड पर भी बकाया बिजली बिल जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद हाउसिंग बोर्ड ने कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को पानी और सफाई शुल्क जमा करने के नोटिस जारी किए हैं।

 

नगरीय निकायों पर 1,525 करोड़ से ज्यादा बकाया

 

पावर कंपनी के अनुसार प्रदेश में करीब 65 लाख उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शनों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। हालांकि, प्रीपेड व्यवस्था फिलहाल ब्लॉक स्तर और उससे ऊपर के सरकारी कार्यालयों में लागू की गई है। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड व्यवस्था लागू करने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

 

सरकारी विभागों के कुल 1,57,341 कनेक्शनों पर 3,035.37 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। इनमें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सबसे आगे है। विभाग के 19,060 कनेक्शनों पर 1,525.18 करोड़ रुपये बकाया हैं।

 

इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 57,075 कनेक्शनों पर 1,057.56 करोड़ रुपये का बकाया है।

 

बिल नहीं भरने पर कनेक्शन काटने का प्रावधान

 

नियमों के अनुसार सरकारी विभाग और स्थानीय निकाय भी बिजली कंपनी के उपभोक्ता हैं। बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर इनके खिलाफ भी आम उपभोक्ताओं की तरह कार्रवाई की जा सकती है।

 

विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 56 और छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड के अध्याय-10 के तहत नियत तारीख तक बिल जमा नहीं होने पर 15 दिन का नोटिस देकर बिजली कनेक्शन अस्थायी रूप से काटा जा सकता है। इसके लिए अलग से किसी आदेश की आवश्यकता नहीं होती।

 

पुराने बकाये का चार किस्तों में होगा भुगतान

 

नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव ने सभी नगरीय निकायों को पुराने बिजली बकाये का भुगतान चार समान किस्तों में करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रीपेड मीटर का नियमित रिचार्ज सुनिश्चित करने को कहा गया है।

 

निकायों को प्रत्येक महीने की 5 तारीख तक सूडा को प्रीपेड मीटर रिचार्ज, पुराने बकाये के भुगतान और निर्देशों के पालन से संबंधित जानकारी उपलब्ध करानी होगी।

 

किस विभाग पर कितना बकाया?

 

विभाग| कनेक्शन| बकाया (करोड़ रुपये)

नगरीय प्रशासन एवं विकास| 19,060| 1,525.18

पंचायत एवं ग्रामीण विकास| 57,075| 1,057.56

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी| 482| 111.42

स्कूल शिक्षा| 36,304| 83.39

वन एवं जलवायु परिवर्तन| 3,399| 40.70

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण| 5,264| 32.56

एसटी, एससी एवं पिछड़ा वर्ग| 2,802| 30.95

महिला एवं बाल विकास| 21,978| 28.57

जल संसाधन| 1,595| 28.47

आवास एवं पर्यावरण| 608| 23.30

शेष 32 विभाग| 8,774| 72.41

कुल| 1,57,341| 3,035.37

 

अब सरकारी विभागों पर भी सख्ती

 

प्रीपेड व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली कंपनी का फोकस पुराने बकाये की वसूली पर भी है। सरकारी विभागों और नगरीय निकायों को पुराने भुगतान के साथ-साथ आगे बिजली बिल का नियमित भुगतान सुनिश्चित करना होगा। बकाया जमा नहीं करने की स्थिति में नियमों के तहत कनेक्शन काटने जैसी कार्रवाई जारी रह सकती है।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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