शिक्षा और सेवा की मिसाल: GPM के तीन शिक्षकों ने राजधानी में लहराया परचम, मिला 'आचार्य शिरोमणि सम्मान'
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही / रायपुर:
किताबों के पन्नों से निकलकर जब कोई शिक्षक समाज को गढ़ने का जिम्मा उठा लेता है, तो उसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के तीन कर्मठ शिक्षकों ने इस बात को रायपुर के मंच पर सच कर दिखाया। रायपुर के वृंदावन हॉल में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शकुंतला फाउंडेशन द्वारा जिले के तीन शिक्षकों को प्रतिष्ठित 'आचार्य शिरोमणि सम्मान 2026' से नवाजा गया।
इन तीन विभूतियों को मिला सम्मान
* अर्चना सामुएल मसीह (शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, मगुरदा): स्काउट-गाइड में दो बार राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत, राज्यपाल सम्मान और शिक्षक शिल्पी सम्मान से अलंकृत।
* डॉ. ऐशले कैनिथ डगलस (व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. बगरार): भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और जिला स्तर पर उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 अगस्त को सम्मानित।
* श्रीमती संगीता कैवर्त (व्याख्याता, पीएम श्री सेजेस कन्या विद्यालय, पेंड्रा): शिक्षण के साथ-साथ नवाचार और सामाजिक चेतना में निरंतर सक्रिय।

मंच पर मौजूद दिग्गजों ने सराहा योगदान
समारोह में रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी श्री एम.जी. सतीश कुमार, शिक्षा आयोग के पूर्व सचिव एन.के. अग्रवाल, चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सतीश तैरानी और शकुंतला फाउंडेशन की संस्थापिका स्मिता सिंह ने इन शिक्षकों को स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
क्यों मिला यह सम्मान?
यह सम्मान केवल चारदीवारी के भीतर पढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि क्लासरूम से परे जाकर समाज को दिशा देने के लिए दिया गया है। इन तीनों शिक्षकों ने शिक्षण कार्य के साथ-साथ भारत स्काउट गाइड और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से आपदा, सेवा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। जिले के इस गौरव पर स्थानीय शिक्षा जगत और प्रबुद्धजनों ने हर्ष जताया है।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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