✍️हेतराम साहू स्टेट- रिपोर्टर
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
लोन रिकवरी एजेंट पर गाली-गलौज और जातिसूचक टिप्पणी का आरोप, थाना पहुंचा मामला
किराये के मकान तक पहुंचकर दबाव बनाने और परिवार को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का भी आरोप
बसना। लोन की किश्त वसूली को लेकर एक व्यक्ति ने कथित रिकवरी एजेंट पर गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी और मानसिक रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने मामले को लेकर थाना बसना में लिखित शिकायत सौंपते हुए जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, आर्थिक परेशानियों के चलते पीड़ित लोन की किश्त समय पर जमा नहीं कर पा रहा था। इसी दौरान मोबाइल फोन के माध्यम से कथित रिकवरी एजेंट द्वारा किश्त जमा करने के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा था। आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान पीड़ित के साथ कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उसे अपमानित व धमकाया गया।
घर तक पहुंचने और परिवार पर टिप्पणी का आरोप
पीड़ित का आरोप है कि कथित रिकवरी एजेंट का व्यवहार केवल फोन पर बातचीत तक सीमित नहीं रहा। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति ने उसके निवास की जानकारी लेकर किराये के मकान तक पहुंचकर भी भुगतान को लेकर दबाव बनाया। इस दौरान परिवार और उसकी पत्नी, जो शासकीय शिक्षिका हैं, को लेकर भी कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के बाद परिवार में भय और मानसिक तनाव की स्थिति बनी। उसने पुलिस को संबंधित मोबाइल नंबर सहित घटना से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराते हुए मामले की जांच की मांग की है।
किस कंपनी से जुड़ा है रिकवरी एजेंट, फिलहाल स्पष्ट नहीं
शिकायत में जिस व्यक्ति पर आरोप लगाए गए हैं, वह किस बैंक, एनबीएफसी अथवा अधिकृत कलेक्शन एजेंसी से जुड़ा है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। इसी वजह से संबंधित कंपनी या संस्था का नाम सामने नहीं रखा गया है।
पीड़ित का कहना है कि लोन की किश्त की वसूली कंपनी का अधिकार हो सकता है, लेकिन वसूली के दौरान कथित तौर पर गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी, परिवार को लेकर आपत्तिजनक व्यवहार या अनुचित मानसिक दबाव बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मामले में पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच करती है तो कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, बातचीत तथा घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। संबंधित रिकवरी एजेंट या उसके नियोक्ता का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
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