अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़, हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
लोक कला के साधकों का राज्य स्तर पर डंका: GPM के 11 कलाकारों को प्रतिष्ठित 'लोकधरा गौरव सम्मान 2026'
सांस्कृतिक डेस्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
माटी की महक, लोकगीतों की धुन और पारंपरिक नृत्य शैलियों को अपनी सांसों में संजोए रखने वाले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के कलाकारों ने पूरे प्रदेश में जिले का परचम लहराया है। 'छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ' द्वारा आयोजित वार्षिक प्रदेश स्तरीय लोक कला अलंकरण समारोह में जिले के 11 प्रमुख साधकों को इस वर्ष के प्रतिष्ठित "लोकधरा गौरव सम्मान 2026" से नवाजा गया।
क्यों खास है यह सम्मान?
यह राज्यस्तरीय अलंकरण उन समर्पित प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, जो आधुनिकता की दौड़ में विलुप्त होती छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, पारंपरिक संगीत, रंगमंच और लोक साहित्य को जमीनी स्तर पर जीवित रखे हुए हैं।
कलाकारों के चयन में उनके दशकों के समर्पण और सांस्कृतिक योगदान को मुख्य आधार बनाया गया। यह चयन प्रक्रिया छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के प्रदेशाध्यक्ष श्री गुरुदास के मार्गदर्शन व अंतिम निर्णय तथा जिला अध्यक्ष आशा कौशिक की अनुशंसा पर पूरी की गई।
जिले का मान बढ़ाने वाले 11 गौरव रत्न
जिले के वे 11 सांस्कृतिक ध्वजवाहक, जिन्हें यह राज्यस्तरीय सम्मान मिला:
- आशा कौशिक
- ईश्वर पडवार
- राम सिंह परतोती
- उमर पोर्ते
- बेसाहन सिंह टेकाम
- घनश्याम पंत
- जुगेश्वर बसंत
- धर्मेंद्र कौशिक
- कौशल भरिया
- प्रदीप पनरिया
- शैलेश कुमार सोनी
सांस्कृतिक हलकों में जश्न का माहौल
एक साथ 11 कलाकारों का राज्य मंच पर चयनित होना गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर जिले के कला प्रेमियों, साहित्यकारों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं ने सभी विभूतियों को बधाई देते हुए इसे माटी की कला का सच्चा सम्मान बताया है।

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