रेलवे का 'कमाऊ पूत' फिर भी खाली हाथ: छत्तीसगढ़ को नहीं मिली वंदे भारत स्लीपर, दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे की झोली फिर खाली!
रायपुर/बिलासपुर:

भारतीय रेलवे को हर साल हजारों करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुनाफा और माल ढुलाई (Freight) से रिकॉर्ड राजस्व देने वाला छत्तीसगढ़ एक बार फिर केंद्र और रेल मंत्रालय की प्राथमिकताओं से गायब दिखा है। देश भर में बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (Vande Bharat Sleeper) के शुरुआती आवंटन और रूट प्लान में छत्तीसगढ़ के हिस्से एक अदद ट्रेन भी नहीं आई है।

लंबे समय से रायपुर और बिलासपुर रेल मंडल के मुसाफिर दिल्ली, मुंबई और हावड़ा जैसे बड़े शहरों के लिए आधुनिक व हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेन की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन रेलवे के नए प्लान ने प्रदेश के लाखों रेल यात्रियों को मायूस कर दिया है।

खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
* छत्तीसगढ़ उपेक्षित: वंदे भारत स्लीपर के शुरुआती आवंटन में छत्तीसगढ़ और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
* मुनाफे में नंबर-1, सुविधा में फिसड्डी: देश में सबसे ज्यादा राजस्व (कोयला और खनिज माल ढुलाई) देने के बावजूद आधुनिक यात्री सुविधाओं के नाम पर ठेंगा।
* लंबी दूरी के यात्रियों को झटका: रायपुर-बिलासपुर से नई दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु रूट पर सेमी-हाई स्पीड स्लीपर सेवा की मांग ठंडे बस्ते में।

* क्षेत्रीय नाराजगी: ट्रेनों के बार-बार कैंसिलेशन और लेटलतीफी के बीच स्लीपर ट्रेन न मिलने से रेल यात्रियों व व्यापारिक संगठनों में भारी रोष।

देशभर में बंटीं ट्रेनें, छत्तीसगढ़ की झोली क्यों रही खाली?
रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए शुरुआती खाके में देश के कई बड़े और मेट्रो शहरों को वंदे भारत स्लीपर के रूटों से जोड़ा जा रहा है, ताकि रात के समय लोग राजधानी एक्सप्रेस से भी तेज और आधुनिक सफर तय कर सकें। लेकिन बिलासपुर—जो SECR का जोनल मुख्यालय है और रायपुर जैसे तेजी से बढ़ते राज्य की राजधानी को इस सौगात से फिलहाल दूर रखा गया है।
हैरानी की बात यह है कि जब भी वंदे भारत स्लीपर के ट्रायल और संभावित रूटों की चर्चाएं शुरू हुई थीं, तब रायपुर-दिल्ली या बिलासपुर-हावड़ा कॉरिडोर को सबसे मुफीद माना जा रहा था। मगर अंतिम मुहर के वक्त प्रदेश का नाम गायब रहा।
कमाई में सबसे आगे, फिर छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) भारतीय रेल के सबसे कमाऊ जोनों में शीर्ष पर रहता है। छत्तीसगढ़ के कोयले, लौह अयस्क और सीमेंट के दम पर रेलवे का खजाना दिन-रात भरता है। इसके बावजूद हकीकत यह है कि:
* पिछले कई सालों से प्रदेश की नियमित पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनें मालगाड़ियों को रास्ता देने के नाम पर रद्द की जाती रही हैं।
* जो चेयर कार वंदे भारत ट्रेनें चलाई भी गईं, उनमें से कई को पूरे प्रदेश के यात्रियों का वह लाभ नहीं मिल पाया जिसकी जरूरत रात के लंबे सफर के लिए थी।
* अब जब आरामदायक और लंबी दूरी की स्लीपर श्रेणी की हाई-स्पीड ट्रेनें शुरू हो रही हैं, तो प्रदेश को कतार में सबसे पीछे खड़ा कर दिया गया है।
यात्रियों और व्यापार जगत में सुलग रहा आक्रोश
वंदे भारत स्लीपर के हाथ से फिसलने के बाद राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। उद्योग जगत और दैनिक रेल यात्रियों का कहना है कि केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड को यह समझना होगा कि छत्तीसगढ़ केवल माल ढुलाई का हब नहीं है, यहां के नागरिकों को भी सुरक्षित, आधुनिक और समयबद्ध यात्रा का पूरा संवैधानिक हक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रदेश के जनप्रतिनिधि इस उपेक्षा के खिलाफ रेल मंत्रालय के सामने आवाज बुलंद करेंगे या छत्तीसगढ़ इसी तरह रेलवे के नक्शे पर सिर्फ 'माल ढोने वाला प्रदेश' बनकर रह जाएगा?
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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