रिटायरमेंट के बाद मनमानी वसूली पर हाईकोर्ट का चाबुक: 4 साल पुराने मामले में पूर्व जेल अधीक्षक से वसूली का सरकारी फरमान रद्द, पेंशनरों के हक में बड़ा फैसला
बिलासपुर:
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवाकाल की पुरानी फाइलों में उलझाकर पेंशन और ग्रेच्युटी रोकने वाले महकमों को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने तगड़ा कानूनी झटका दिया है। एक अहम और नजीर बनने वाले फैसले में हाईकोर्ट ने रायपुर केंद्रीय जेल के पूर्व जेल अधीक्षक के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा जारी वित्तीय वसूली और विभागीय जांच के आदेश को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने दो टूक व्यवस्था दी कि रिटायरमेंट के चार साल से अधिक पुराने मामलों में न तो कोई नई विभागीय जांच बैठाई जा सकती है और न ही पेंशन फंड से वसूली की जा सकती है।
क्या था विवाद?
रायपुर सेंट्रल जेल के पूर्व जेल अधीक्षक जब सकुशल सेवानिवृत्त हो गए, तब विभाग ने उनके पुराने कार्यकाल की फाइलों को खंगालते हुए कथित प्रशासनिक व वित्तीय नुकसान का दावा ठोक दिया। विभाग ने रिटायरमेंट के लंबे अर्से बाद न केवल विभागीय जांच शुरू की, बल्कि वित्तीय क्षतिपूर्ति के नाम पर सीधे पेंशन लाभ से वसूली का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। इसके खिलाफ पूर्व अधीक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट में कानूनी दलीलें और 'नियम 9' का कवच
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए दलील दी गई कि शासन का यह कदम छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के नियम 9 का सीधा उल्लंघन है। नियमों के तहत:
* किसी भी रिटायर्ड शासकीय सेवक पर ऐसी किसी घटना को लेकर जांच शुरू नहीं हो सकती, जो जांच शुरू होने की तारीख से 4 वर्ष से अधिक पुरानी हो।
* सेवाकाल के दौरान जांच शुरू न होने की स्थिति में, सेवानिवृत्ति के बाद बिना सक्षम प्राधिकारी (राज्यपाल/शासन) की विधिवत अनुमति और समय-सीमा के कोई नई जांच नहीं चलाई जा सकती।
अदालत का फैसला: मनमाना आदेश निरस्त, रोके गए लाभ तुरंत लौटाने के निर्देश
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने माना कि विभाग ने वैधानिक 4-वर्षीय समय-सीमा को ताक पर रखकर कार्रवाई की है, जो कानून की नजर में पूरी तरह अवैध है।
अदालत ने तत्काल प्रभाव से वसूली आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के रोके गए सभी पेंशनरी और सेवानिवृत्ति लाभ नियमानुसार अविलंब जारी किए जाएं। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से प्रदेशभर के उन रिटायर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जो सेवामुक्ति के बाद भी पुरानी विभागीय जांचों की तलवार झेल रहे हैं।
अभिषेक कुमार पाण्डेय
स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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