बैमा पंचायत में 'लोकतंत्र' पर तानाशाही भारी: 15 अगस्त पर निर्वाचित पंचों को किया दरकिनार, सरपंच-सचिव के खिलाफ फूटा आक्रोश; जांच शुरू!
राष्ट्रीय पर्व पर मनमानी के आरोपों से गरमाया बिल्हा; सारे रिकॉर्ड तलब, कांग्रेस नेता अंकित गौरहा बोले— "जनप्रतिनिधियों के सम्मान से समझौता बर्दाश्त नहीं"
बिलासपुर।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जमीनी स्तर की सबसे मजबूत इकाई 'ग्राम पंचायत' में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को ही किनारे करने का गंभीर मामला सामने आया है। बिल्हा जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बैमा में 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) के राष्ट्रीय पर्व पर निर्वाचित पंचों की कथित अनदेखी और उपेक्षा का विवाद अब तूल पकड़ चुका है। सरपंच और सचिव की मनमानी के खिलाफ पंचों ने मोर्चा खोल दिया है, जिसके बाद जनपद पंचायत बिल्हा ने कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले में जांच बिठा दी है और पंचायत के सभी सरकारी दस्तावेज तलब कर लिए हैं।
क्या है विवाद: राष्ट्रीय पर्व पर पंचों को 'बेगाना' करने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, 15 अगस्त जैसे देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय पर्व के दौरान ग्राम पंचायत में न तो निर्वाचित पंचों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया और न ही उनकी लोकतांत्रिक सहभागिता सुनिश्चित की गई। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने पंचायत को अपनी 'जागीर' समझते हुए मनमाने तरीके से आयोजन निपटा दिया।
20 अगस्त को जनपद पंचायत कार्यालय पहुंची इस लिखित शिकायत में पंचों ने आरोप लगाया कि पंचायत की हर गतिविधि में चुने हुए सदस्यों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
पुराने कारनामों से भी घिरा है पंचायत सचिव
बैमा पंचायत के सचिव की कार्यप्रणाली पहले से ही विवादों के घेरे में रही है। सूत्रों के मुताबिक:
* मनमानी और वित्तीय अनियमितताएं: विकास कार्यों और अभिलेखों के संधारण में कथित गड़बड़ियों की शिकायतें पहले भी उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं।
* निर्णयों में तानाशाही: पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना एकतरफा काम करने के आरोप लगातार लगते रहे हैं।
* दस्तावेजों की जब्ती: जनपद पंचायत ने नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान पंचायत के सभी मूल अभिलेख, बैठक पंजी और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।
अंकित गौरहा ने खोला मोर्चा: "लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का अपमान अस्वीकार्य"
मामले के तूल पकड़ते ही सियासी पारा भी चढ़ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंकित गौरहा ने इस मुद्दे पर प्रशासन से दो-टूक निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
> "15 अगस्त पूरे देश की एकता, सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों का महापर्व है। ग्राम पंचायत में जनता द्वारा चुने गए पंचों की उपेक्षा करना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चोट है। यदि राष्ट्रीय पर्व पर जनप्रतिनिधियों की गरिमा से खिलवाड़ हुआ है, तो इसकी तह तक जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उस पर सख्त वैधानिक कार्रवाई हो।"
> — अंकित गौरहा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता
जनपद CEO का रुख: सच आएगा सामने, बख्शे नहीं जाएंगे दोषी
जनपद पंचायत बिल्हा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने स्पष्ट किया है कि शिकायत के आधार पर आधिकारिक जांच टीम गठित कर दी गई है। शिकायतकर्ताओं और संबंधित पंचायत पदाधिकारियों को साक्ष्यों के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है।
अब पूरी पंचायत और क्षेत्र की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—क्या सचिव और सरपंच की मनमानी पर लगाम लगेगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
Comments (0)
Leave a Comment
No comments yet. Be the first to share your thoughts!