राम मंदिर को जल्द मिलेगा पहला पूर्णकालिक CEO: 5,585 दिग्गजों की कतार से छंटे नाम, 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में लगेगी अंतिम मुहर
अयोध्या:
श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा तंत्र को अभेद्य बनाने के लिए चल रही सबसे बड़ी चयन प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति ने नामों का अंतिम पैनल तैयार कर लिया है। मंगलवार (1 सितंबर) को यह पैनल ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंपा जाएगा, जिसके बाद 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की उच्चस्तरीय बैठक में राम मंदिर के पहले प्रशासनिक प्रमुख के नाम की घोषणा संभव है।
चयन का पैमाना: 5,500 से अधिक आवेदन, पूर्व जस्टिस की समिति ने लिया इंटरव्यू
अयोध्या राम मंदिर के CEO पद के लिए देश भर से नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों ने भारी दिलचस्पी दिखाई थी:

* कुल आवेदन: 5,585 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की थी।
* शॉर्टलिस्ट: गहन छंटनी के बाद अंतिम चरण के इंटरव्यू तक केवल 16 पूर्व IAS, IPS और रिटायर्ड सैन्य अधिकारी पहुंचे।
* चयन समिति: चयन का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली समिति के पास था, जिसमें रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवारे शामिल रहे। समिति ने प्रशासनिक दक्षता, संकट प्रबंधन और वित्तीय शुचिता जैसे कड़े मानकों पर उम्मीदवारों को परखा।
दौड़ में ये नाम सबसे आगे
CEO पद की रेस में प्रशासनिक हलकों के कई वरिष्ठ नाम चर्चा में हैं:
* राजेश पांडेय (पूर्व IPS): मजबूत दावेदार, जिनका दो बार विस्तृत साक्षात्कार हुआ।
* योगेश्वर राम मिश्रा (पूर्व IAS): प्रशासनिक अनुभव के चलते मजबूत पकड़।
* परेश सक्सेना (पूर्व DGP, बिहार): शीर्ष स्तर के सुरक्षा और पुलिस प्रबंधन के अनुभव के साथ दौड़ में शामिल।
नोट: आधिकारिक नाम का खुलासा 2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक के बाद ही होगा।
क्यों पड़ी पूर्णकालिक CEO की जरूरत?
मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी आमद के बीच बीते दिनों चढ़ावे और दान राशि से जुड़ी अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। इसके बाद प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और व्यवस्थाओं को पेशेवर बनाने के लिए पूर्णकालिक CEO की तलाश तेज हुई।
नए CEO के कंधों पर होंगी ये प्रमुख जिम्मेदारियां:
* वित्तीय पारदर्शिता: करोड़ों के दैनिक चढ़ावे और दान का पूर्ण डिजिटाइजेशन व पारदर्शी ऑडिट।
* भीड़ व सुरक्षा प्रबंधन: लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन और परिसर की सुरक्षा का त्रिस्तरीय समन्वय।
* रोजमर्रा का संचालन: विशाल मंदिर परिसर का दैनिक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक प्रबंधन।
प्रशासनिक बदलाव: जगदीश आफले बन सकते हैं पहले सचिव
CEO के अलावा राम मंदिर ट्रस्ट अपने पूरे प्रशासनिक ढांचे को नया रूप दे रहा है। 2 सितंबर की बैठक में जगदीश आफले को ट्रस्ट का पहला 'सचिव' नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लग सकती है। यदि ये दोनों नियुक्तियां तय समय पर होती हैं, तो अयोध्या राम मंदिर का संचालन अब पूरी तरह कॉर्पोरेट और पेशेवर प्रशासनिक मॉडल पर संचालित होगा।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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