*मिट्टी की गणेश प्रतिमा, घर में विसर्जन और उसी मिट्टी में पौधे*
*डीएवी पब्लिक स्कूल के श्लोक और दृशानी ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश*

*बिलासपुर।* गणेश उत्सव में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार के दो विद्यार्थियों ने अनूठी पहल की। कक्षा छठवीं के *श्लोक द्विवेदी* और कक्षा तीसरी की *दृशानी द्विवेदी* ने मिट्टी से गणेश जी की प्रतिमा तैयार की। दोनों बच्चों ने इस प्रतिमा को प्राकृतिक रंगों से स्वयं रंगकर 10 दिनों तक पूजा-अर्चना की।
गणेश पूजा के बाद प्रतिमा के विसर्जन के लिए बच्चों ने नदी, तालाब या किसी अन्य जलस्रोत का सहारा लेने के बजाय घर में ही विसर्जन किया। प्रतिमा के मिट्टी में पूरी तरह मिल जाने के बाद उसी मिट्टी का उपयोग पौधे लगाने के लिए किया गया। इस तरह पूजा में इस्तेमाल हुई मिट्टी को दोबारा पौधों के रूप में प्रकृति से जोड़ने की पहल की गई।
श्लोक और दृशानी ने लोगों से अपील की कि गणेश उत्सव को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाया जाए। उनका कहना है कि भगवान गणेश जी की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जा सकती है और साथ ही प्रकृति की रक्षा का भी ध्यान रखा जा सकता है। मिट्टी की प्रतिमा बनाकर, प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर और घर में ही विसर्जन करने से जलस्रोतों पर पड़ने वाले संभावित प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
बच्चों की इस पहल में उनके परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिवार ने बच्चों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझने और उसे व्यवहार में उतारने के लिए प्रोत्साहित किया। दोनों विद्यार्थियों ने अपनी पहल के माध्यम से यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी अभियान का हिस्सा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन और हमारी परंपराओं का भी हिस्सा बन सकता है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रतिमा विसर्जन संबंधी पर्यावरणीय दिशा-निर्देशों में प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाओं तथा पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक रंगों के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। ऐसे में श्लोक और दृशानी की पहल बच्चों में पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता का एक प्रेरक उदाहरण है।
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