माटी का खेल, गजब का संतुलन: बिलासपुर में दौड़ी 'गेड़ी', 5 साल के नौनिहाल से लेकर 50 साल के बुजुर्गों ने दिखाया दम

बिलासपुर:
आधुनिकता और मोबाइल की दुनिया के बीच जब छत्तीसगढ़िया संस्कृति की सोंधी महक मैदान पर उतरी, तो हर कोई देखता रह गया। छत्तीसगढ़ की समृद्ध माटी, परंपरा और विलुप्त होते पारंपरिक खेलों को नई पीढ़ी की रगों में उतारने के लिए लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में 'छत्तीसगढ़िया क्रांति सेवा' द्वारा भव्य गेड़ी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
बांस की गेड़ी पर अद्भुत संतुलन साधते हुए जब 5 साल के बच्चे से लेकर 50 साल के बुजुर्ग दौड़े, तो पूरा मैदान दर्शकों की तालियों और 'जय जोहार' के नारों से गूंज उठा।
100 प्रतिभागियों का जलवा, महिलाओं का नारियल फेंक मुकाबला
प्रतियोगिता केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि माटी के उत्सव में तब्दील हो गई:
* संतुलन और रफ्तार की जंग: बिलासपुर शहर और सुदूर ग्रामीण अंचलों से आए करीब 100 प्रतिभागियों ने गेड़ी पर अपनी गजब की गति और संतुलन का लोहा मनवाया।
* महिला शक्ति का प्रदर्शन: आयोजन में महिलाओं के लिए विशेष रूप से 'नारियल फेंक' प्रतियोगिता रखी गई थी। पारंपरिक परिधान और पूरे उत्साह के साथ महिलाओं ने निशाना साधते हुए शानदार प्रदर्शन किया और पुरस्कार अपने नाम किए।
* पीढ़ी का संगम: एक ही ट्रैक पर 5 साल के बच्चे, युवा और आधी सदी की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों का एक साथ गेड़ी चढ़ना आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा।
आयोजकों का विजन: "जैसे दुनिया में क्रिकेट-हॉकी, वैसे ही चमकेगी हमारी गेड़ी"
आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने इस अनूठी पहल के पीछे का मकसद साझा करते हुए कहा कि राज्य की समृद्ध लोक-संस्कृति को सहेजना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

> "क्रिकेट और हॉकी को जिस तरह दुनिया के नक्शे पर पहचान मिली है, हमारा लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेल 'गेड़ी दौड़' को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वही मुकाम मिले। यह आयोजन आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों, माटी और लोक-परंपरा से जोड़े रखने का एक सशक्त माध्यम है।"
> — छत्तीसगढ़िया क्रांति सेवा

विलुप्त होते पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने की इस पहल को बिलासपुर की जनता और खेल प्रेमियों ने खूब सराहा।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
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