Tuesday, September 29 2026
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बीएसपी में CBI जांच: रूस के सहयोग से बना छत्तीसगढ़ का गौरव, संगठित स्क्रैप चोरी ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

State Head - Kishor
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Chhattishgarh local news
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✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार

 

भिलाई। भारत और पूर्व सोवियत संघ की मैत्री के प्रतीक भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में सामने आए संगठित स्क्रैप चोरी के मामले ने देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में करीब 250 टन संदिग्ध चोरी का स्क्रैप बरामद किया गया था, जिसकी कार्रवाई के दौरान लगभग ₹3.22 करोड़ मूल्य के स्क्रैप, वाहन और मशीनरी जब्त की गई थी। अब राज्य सरकार ने मामले की CBI जांच को मंजूरी दे दी है।

पुलिस की जांच के अनुसार, फ्लू डस्ट/राख के परिवहन की आड़ में बीएसपी से लोहे का स्क्रैप बाहर निकालकर निजी इकाइयों तक पहुंचाने का आरोप सामने आया। मई 2026 में अकलोरडीह और हथखोज क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में लोहे की प्लेट, बीम कटिंग और अन्य सामग्री बरामद की गई थी।

 

मामले में पुलिस ने अब तक 19 आरोपियों की गिरफ्तारी की है। इनमें बीएसपी के अधिकारी-कर्मचारी तथा निजी क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। सितंबर में रसमड़ा स्थित एक निजी स्टील कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और डायरेक्टर की गिरफ्तारी की भी जानकारी सामने आई थी।

कैसे सामने आया मामला?

26 मई 2026 को पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के आधार पर अकलोरडीह और हथखोज क्षेत्र में कार्रवाई की। जांच के दौरान ऐसे वाहनों और गोदामों का पता चला, जिनमें लोहे के स्क्रैप को फ्लू डस्ट के नीचे छिपाकर ले जाने की बात सामने आई। पुलिस ने लगभग 250 टन स्क्रैप के साथ कई भारी वाहन और मशीनरी जब्त की।

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने कथित नेटवर्क से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया। पूरे मामले में अंदरूनी मिलीभगत और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों की भी जांच की गई।

CBI जांच से क्या सामने आ सकता है?

अब CBI जांच के जरिए कथित चोरी के पूरे नेटवर्क, संयंत्र से सामग्री बाहर निकालने की प्रक्रिया, परिवहन व्यवस्था, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और संभावित वित्तीय लेन-देन की विस्तृत पड़ताल हो सकती है। राज्य सरकार की CBI जांच की मंजूरी के बाद मामले की जांच का दायरा और विस्तृत होने की संभावना है।

राष्ट्र निर्माण में भिलाई स्टील प्लांट की ऐतिहासिक भूमिका

भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना भारत और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद हुई थी। 2 फरवरी 1955 को दोनों देशों के बीच 10 लाख टन प्रारंभिक क्षमता वाले एकीकृत लौह एवं इस्पात कारखाने की स्थापना के लिए समझौता हुआ था। 4 फरवरी 1959 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रथम धमन भट्टी प्रज्वलित कर संयंत्र का उद्घाटन किया था।

समय के साथ भिलाई स्टील प्लांट का विस्तार और आधुनिकीकरण हुआ और यह देश के महत्वपूर्ण इस्पात उत्पादक संयंत्रों में शामिल हो गया। रेलवे की पटरियों से लेकर विभिन्न औद्योगिक और रणनीतिक उपयोग के लिए इस्पात उत्पादन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अब सुरक्षा व्यवस्था पर निगाह

भिलाई स्टील प्लांट जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठान में बड़ी मात्रा में स्क्रैप के कथित रूप से बाहर निकलने के मामले ने सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसियों की पड़ताल से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि चोरी का नेटवर्क किस स्तर तक फैला था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

CBI जांच के बाद इस पूरे मामले में सामने आने वाले तथ्यों पर अब भिलाई ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की नजर बनी हुई है।नोट: SAIL के आधिकारिक विवरण में 1955 का भारत-सोवियत समझौता और 1959 में प्रथम धमन भट्टी के उद्घाटन की पुष्टि होती है। 

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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