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बिलासपुर में पुश्तैनी जमीन के रिकॉर्ड पर उठे गंभीर सवाल! एक पिता के तीन बेटे… राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सिर्फ दो, तीसरे वारिस का नाम आखिर गया कहां?

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बिलासपुर में पुश्तैनी जमीन के रिकॉर्ड पर उठे गंभीर सवाल!     एक पिता के तीन बेटे… राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सिर्फ दो, तीसरे वारिस का नाम आखिर गया कहां?

बिलासपुर में पुश्तैनी जमीन के रिकॉर्ड पर उठे गंभीर सवाल!

 

एक पिता के तीन बेटे… राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सिर्फ दो, तीसरे वारिस का नाम आखिर गया कहां?

 

बिलासपुर/रतनपुर | 01 सितंबर 2026

 

बिलासपुर जिले के रतनपुर राजस्व मंडल से पुश्तैनी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

मामला पटवारी हल्का नंबर-12, खसरा नंबर 770/2 से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जमीन के मूल वारिसों को लेकर रिकॉर्ड में ऐसी स्थिति सामने आई है, जिसमें एक ही पिता के तीन पुत्र होने के बावजूद राजस्व दस्तावेजों में सिर्फ दो पुत्रों के नाम दर्ज दिखाई दे रहे हैं। तीसरे पुत्र का नाम रिकॉर्ड से गायब है।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

आखिर तीसरे वारिस का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज क्यों नहीं हुआ?

न्यायालय की कार्रवाई से मामला गरमाया

 

मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित बताया जा रहा है। इसी मामले में न्यायालय की ओर से संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है।

नोटिस जिन लोगों को जारी किए जाने की जानकारी है, उनमें—

 

1. मोहम्मद खान के छोटे पुत्र अशरफ खां

2. अहमद खान के पुत्र शेर खान

3. अहमद खान के पुत्र पीर खान

4. अहमद खान की पत्नी सुभान बी

 

सभी के निवासी वार्ड क्रमांक 3, महामाया पारा बताए गए हैं।

 

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित पक्ष न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड में तीसरे वारिस का नाम नहीं होने को लेकर क्या जवाब देते हैं।

 

तीन वारिस, लेकिन कागजों में दो ही नाम!

 

मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि पुश्तैनी बताई जा रही है।

 

यदि वास्तव में एक पिता के तीन पुत्र थे, तो फिर राजस्व रिकॉर्ड में दो पुत्रों के नाम ही क्यों दर्ज हुए?

 

क्या नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में कोई चूक हुई?

क्या पूरी जानकारी राजस्व विभाग के समक्ष नहीं रखी गई?

या फिर रिकॉर्ड तैयार करते समय किसी वारिस का नाम छूट गया?

 

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

 

पटवारी रिपोर्ट में कब्जे को लेकर भी बड़ा सवाल

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात पटवारी की जांच रिपोर्ट से जुड़ी है।

 

जांच प्रतिवेदन में वर्तमान में उक्त भूमि पर फिरत राम पटेल, निवासी कोरबा भंवर, वार्ड नंबर 1 का कब्जा होने का उल्लेख बताया गया है।

 

यानी मामले में एक तरफ राजस्व रिकॉर्ड में दो वारिसों के नाम, दूसरी तरफ तीसरे वारिस का नाम गायब, और जांच रिपोर्ट में किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे का उल्लेख—इन तमाम परिस्थितियों ने पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है।

 

अब कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

 

मामले में जल्द ही बिलासपुर कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर खसरा नंबर 770/2 से जुड़े पुराने और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग किए जाने की बात सामने आ रही है।

 

शिकायत में यह भी मांग उठ सकती है कि भूमि के पुराने रिकॉर्ड, नामांतरण, वारिसान, पटवारी प्रतिवेदन और वर्तमान कब्जे से जुड़े दस्तावेजों की क्रमवार जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

 

सबसे बड़ा सवाल—रिकॉर्ड में गायब वारिस का सच क्या है?

 

यह पूरा मामला अब सिर्फ एक जमीन के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रह गया है।

 

तीन पुत्रों में से एक का नाम राजस्व रिकॉर्ड में क्यों नहीं है?

रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार हुआ?

जमीन पर वर्तमान कब्जा किस आधार पर है?

और क्या राजस्व रिकॉर्ड में हुई कथित विसंगति के पीछे कोई लापरवाही या अनियमितता हुई?

 

इन सवालों के जवाब न्यायालयीन प्रक्रिया और निष्पक्ष राजस्व जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

 

फिलहाल खसरा नंबर 770/2 का यह मामला रतनपुर के राजस्व रिकॉर्ड की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ 

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in अपराध.

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