बिलासपुर में जमीन का बड़ा खेल: 80 फीट की सरकारी सड़क कागजों में सिकुड़ी, पूर्व पार्षद पर 'धरसा' डकारने का संगीन आरोप!
धरसा मार्ग और PWD की अधिग्रहित जमीन पर फर्जीवाड़े का दावा, सालभर बाद भी फाइल दबाए बैठा प्रशासन; जनता ने खोला मोर्चा
बिलासपुर।
शहर में सरकारी जमीन और आम रास्तों को हड़पने का खेल किस कदर हावी है, इसका ज्वलंत उदाहरण सरकंडा राजस्व मंडल के चांटीडीह (हल्का नंबर 33) में सामने आया है। आरोप है कि दशकों पुराने सरकारी 'धरसा मार्ग' और लोक निर्माण विभाग (PWD) की अधिग्रहित जमीन को रसूख के दम पर 'निजी' बताकर बेच दिया गया। इस पूरे खेल के केंद्र में पूर्व पार्षद विष्णु यादव का नाम आ रहा है, जिन पर नियमों को ताक पर रखकर फर्जी सीमांकन कराने और 20 फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा जमाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

कलेक्टर जनदर्शन के चक्कर काट-काटकर थक चुके स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आक्रोश अब फूट पड़ा है।
फर्जीवाड़े की पूरी क्रोनोलॉजी: नक्शे गायब, दस्तखत नदारद
* कागजों में हेरफेर: खसरा नंबर 551 (22 डिसमिल सरकारी धरसा) और खसरा नंबर 397 (44 डिसमिल PWD अधिग्रहित भूमि) को निशाना बनाया गया। यह वही रास्ता है जो रपटा चौक, शनिश्चरी बाजार, साइंस कॉलेज और पचरी घाट को जोड़ता है।
* सड़क की चौड़ाई पर डाका: आरटीआई, नगर निगम रिकॉर्ड और TNCP के मास्टर प्लान के अनुसार यह मुख्य मार्ग 80 फीट चौड़ा है। 1990 से 1994 के बीच हुई पुरानी रजिस्ट्रियों में भी 80 फीट सड़क दर्ज है, लेकिन अब 20 फीट जमीन को कथित तौर पर बेचकर आम जनता का रास्ता संकरा कर दिया गया।
* रहस्यमयी सीमांकन रिपोर्ट: सीमांकन के दौरान न तो पड़ोसी भू-स्वामियों को कोई नोटिस दिया गया, न कोई सार्वजनिक इश्तहार जारी हुआ और न ही मौके पर किसी के दस्तखत लिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री हुई, उस पर कथित तौर पर तहसीलदार की मुहर तो है लेकिन मौके की जांच करने वाले पटवारी और RI के हस्ताक्षर-सील तक गायब हैं!
जनता के तीखे सवाल: सालभर से क्यों सो रहा है सिस्टम?
स्थानीय निवासी युगल शर्मा, कुलदीप सिंह सलूजा और अनिल अग्रवाल समेत दर्जनों पीड़ितों का कहना है कि सालभर पहले कलेक्टर जनदर्शन में पुख्ता साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन रसूखदारों के आगे पूरी जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
प्रभावितों की दो-टूक मांगें:
* पीडब्ल्यूडी साइट प्लान और टीएनसीपी मास्टर प्लान के आधार पर राजस्व की संयुक्त टीम से तत्काल दोबारा सीमांकन हो।
* फर्जी तरीके से तैयार की गई एकतरफा सीमांकन रिपोर्ट को अविलंब निरस्त किया जाए।
* जांच पूरी होने तक विवादित जमीन पर हर प्रकार के निर्माण, घेराबंदी और कब्जे पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
> कलेक्टर का रुख:
> मामले में बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि प्राप्त शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और नियमानुसार सख्त कार्रवाई होगी।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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