Thursday, October 1 2026
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बिलासपुर में जन्माष्टमी की खुशियां मातम में बदलीं: मटकी बांधने चढ़ा 20 वर्षीय राज 11 KV हाईटेंशन लाइन से झुलसा, सिम्स में सांसों की जंग जारी

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बिलासपुर में जन्माष्टमी की खुशियां मातम में बदलीं: मटकी बांधने चढ़ा 20 वर्षीय राज 11 KV हाईटेंशन लाइन से झुलसा, सिम्स में सांसों की जंग जारी

ब्रेकिंग न्यूज़ 

 

बिलासपुर में जन्माष्टमी की खुशियां मातम में बदलीं: मटकी बांधने चढ़ा 20 वर्षीय राज 11 KV हाईटेंशन लाइन से झुलसा, सिम्स में सांसों की जंग जारी

 

बिलासपुर।

उत्सव के उत्साह और लापरवाही के अंधे मोड़ पर एक बार फिर जिंदगी दांव पर लग गई। शहर में जब हर कोई कान्हा के जन्मोत्सव के स्वागत की तैयारियों में डूबा था, तभी राजीव गांधी चौक पर लगे एक स्वागत गेट पर वह खौफनाक मंजर दिखा जिसने देखने वालों की रूह कंपा दी। मटकी फोड़ प्रतियोगिता के लिए ऊंचाई पर रस्सी बांधने चढ़ा 20 साल का राज खान (निवासी ओमनगर, जरहाभाठा) चंद पलों में मौत के मुहाने पर पहुंच गया।

आसमानी मौत से हुआ सामना

गेट की ऊंचाई पर चढ़कर व्यवस्था बना रहे राज को शायद इस बात का इल्म नहीं था कि उसके सिर के ठीक ऊपर 11,000 वोल्ट का काल बह रहा है। जैसे ही वह संतुलन बनाकर मटकी बांधने लगा, पास से गुजर रही 11 KV हाईटेंशन लाइन ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। जोरदार चिंगारी, धमाके जैसी आवाज और हवा में फैला धुआं—पलक झपकते ही उत्सव का उल्लास चीख-पुकार में तब्दील हो गया।

चीखों के बीच थमी बिजली, सिम्स में चल रहा जीवन-संघर्ष

घटना घटते ही नीचे खड़े लोगों के हाथ-पांव फूल गए। कुछ जागरूक नागरिकों ने फौरन बिजली विभाग के अफसरों को फोन कर ग्रिड से सप्लाई बंद करवाई। करंट का प्रवाह रुकते ही झुलसे युवक को आनन-फानन में नीचे उतारकर सिम्स (CIMS) अस्पताल पहुंचाया गया। बर्न यूनिट के बाहर परिजनों की आंखें पथरा गई हैं, और भीतर 20 साल का राज जिंदगी और मौत के बीच एक बेहद मुश्किल जंग लड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

सवाल जो उत्सव की चमक को धुंधला करते हैं

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि आयोजनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खौफनाक आईना है:

 * निरीक्षण का अभाव: सड़कों पर लोहे और बांस के ऊंचे-ऊंचे स्वागत गेट तानते समय किसी ने यह देखने की जहमत क्यों नहीं उठाई कि ऊपर से मौत के तार गुजर रहे हैं?

 * प्रशासनिक सतर्कता कहां थी: क्या आयोजन समिति ने ऐसे संवेदनशील स्थान पर गेट लगाने से पहले विद्युत विभाग से तकनीकी अनुमति या ‘शटडाउन’ की व्यवस्था की थी?

 * सस्ती जान की कीमत: किसी परिवार के चिराग को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (हेलमेट, ग्लव्स या हार्नेस) के हाईटेंशन लाइन के मुहाने पर क्यों धकेल दिया गया?

> एक कड़वी चेतावनी:

> पर्व और उल्लास समाज की आत्मा हैं, लेकिन जब अंधा उत्साह बुनियादी सुरक्षा को निगलने लगे तो घरों के आंगन सूने हो जाते हैं। कोई भी परंपरा या मटकी किसी इंसान की सांसों से ज्यादा कीमती नहीं हो सकती। आयोजकों और आमजन को समझना होगा कि आस्था सावधानी की मांग करती है, अंधेरगर्दी की नहीं।

 

 

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़ 

 

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in हादसा.

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