अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर
मुआवजा फाइलों पर अब प्रशासन की पैनी नजर, लू से मौत के 6 मामलों में 64 लाख की जांच
सर्पदंश मुआवजा प्रकरण के बाद खुली नई फाइल, मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर बैंक खातों तक होगी पड़ताल; 7 तहसीलदार और 5 लिपिकों को नोटिस
बिलासपुर। सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच बिलासपुर जिला प्रशासन ने अब लू से मौत के नाम पर वितरित किए गए 64 लाख रुपये के मुआवजे की भी पड़ताल शुरू कर दी है। प्रशासन ने कुल 6 प्रकरणों की फाइल दोबारा खंगालने का फैसला लिया है। प्रत्येक प्रकरण में चार लाख रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई थी।
इस जांच के बाद मुआवजा वितरण की पूरी प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रशासन अब केवल कागजों में दर्ज मृत्यु के कारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मृत्यु प्रमाण पत्र, पात्रता दस्तावेज, मुआवजा स्वीकृति की प्रक्रिया और संबंधित बैंक खातों में राशि के लेन-देन तक की जांच करेगा।
आंकड़ों के अंतर ने बढ़ाई प्रशासन की चिंता
लू से मौत के मामलों की संख्या में सामने आया अंतर इस पड़ताल की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार एक वर्ष में लू से मौत का आंकड़ा बेहद कम था, जबकि अगले वर्ष ऐसे मामलों की संख्या बढ़ गई और कुल छह प्रकरणों में मुआवजा वितरित किया गया।
प्रशासन अब यह सत्यापित करेगा कि इन सभी मामलों में मृत्यु का वास्तविक कारण क्या था और क्या प्रत्येक मामले में लू से मौत की पुष्टि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई थी।
हालांकि आंकड़ों में अंतर अपने आप में किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है, लेकिन मुआवजा राशि के बड़े भुगतान और सर्पदंश मुआवजा प्रकरण के बाद प्रशासन ने इन फाइलों की जांच को गंभीरता से लिया है।
64 लाख रुपये आखिर किस आधार पर दिए गए?
प्रशासन की जांच का सबसे अहम सवाल यही होगा कि जिन छह मामलों में चार-चार लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई, उनमें मुआवजे की पात्रता किस आधार पर तय हुई।
अब प्रत्येक फाइल में यह देखा जाएगा कि—
- मृत्यु प्रमाण पत्र में कारण क्या दर्ज है?
- लू से मौत की पुष्टि किस स्तर पर हुई?
- मुआवजा स्वीकृत करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज देखे गए?
- संबंधित परिवार निर्धारित पात्रता के दायरे में था या नहीं?
- भुगतान किस बैंक खाते में किया गया?
- खाते में राशि पहुंचने के बाद उसका लेन-देन किस प्रकार हुआ?
यानी जांच फाइल से निकलकर सीधे बैंक खाते तक पहुंचेगी।
सर्पदंश प्रकरण के बाद हर मुआवजा फाइल पर नजर
सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में कथित करोड़ों रुपये की अनियमितताओं की जांच के बाद प्रशासनिक स्तर पर सरकारी राहत और मुआवजा वितरण की पूरी व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
सर्पदंश मुआवजा मामले में सामान्य मौत, दुर्घटना, शराब सेवन और आत्महत्या जैसे मामलों को कथित तौर पर सर्पदंश से जोड़कर मुआवजा हासिल किए जाने के आरोपों की जांच चल रही है। इस मामले में कथित तौर पर बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने और गिरफ्तारियों के बाद अब दूसरे मुआवजा प्रकरण भी प्रशासन की निगरानी में आ गए हैं।
यही वजह है कि लू से मौत के नाम पर वितरित किए गए 64 लाख रुपये की राशि की जांच को भी प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
7 तहसीलदार और 5 लिपिकों को नोटिस
सर्पदंश मुआवजा मामले की जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसी बीच 7 तहसीलदार और 5 लिपिकों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
जांच में तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और एडीएम समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि मुआवजा स्वीकृत करने की प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई और यदि हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन था।
अब कागज और हकीकत का होगा मिलान
लू मुआवजा प्रकरण में प्रशासन की सबसे अहम पड़ताल दस्तावेज और वास्तविक परिस्थितियों के बीच सामंजस्य को लेकर होगी।
मृत्यु प्रमाण पत्र में दर्ज कारण को संबंधित परिस्थितियों से मिलाया जाएगा। साथ ही यह भी जांच होगी कि जिस परिवार को मुआवजा दिया गया, वह वास्तव में निर्धारित मापदंडों को पूरा करता था या नहीं।
इसके बाद बैंक खातों की जांच महत्वपूर्ण होगी। क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में मुआवजा स्वीकृत होना एक बात है, लेकिन वास्तविक पात्र व्यक्ति के खाते में राशि पहुंचना और उसका सही तरीके से उपयोग होना दूसरी बात।
कलेक्टर का सख्त संदेश- गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई तय
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि किसी प्रकरण में गलत तरीके से या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा हासिल करने की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ वास्तविक पात्र परिवारों के अधिकार और सरकारी राहत राशि की व्यवस्था को सुरक्षित रखना, वहीं दूसरी तरफ यदि कहीं नियमों का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी तय करना।
अब रिपोर्ट खोलेगी राज
सर्पदंश मुआवजा प्रकरण के बाद खुली लू मुआवजे की फाइल ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। 64 लाख रुपये की राशि, छह प्रकरण और दस्तावेज से लेकर बैंक खातों तक जांच—इन आंकड़ों ने इस पड़ताल को गंभीर बना दिया है।
अब असली तस्वीर जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल प्रशासन की नजर उन सभी दस्तावेजों और लेन-देन पर है, जिनके आधार पर लाखों रुपये का सरकारी मुआवजा वितरित किया गया। अगर जांच में प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो यह मामला केवल मुआवजा राशि की वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों पर भी कार्रवाई की राह खुल सकती है।
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