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बिलासपुर एयरपोर्ट पर टला भीषण विमान हादसा: लैंडिंग के दौरान फटा एलायंस एयर के विमान का पहिया, 41 जिंदगियां बाल-बाल बचीं!
रनवे पर फंसा विमान, उड़ानें रद्द; सुविधाओं के नाम पर बदहाल बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट पर सुरक्षा मानकों की खुली पोल
बिलासपुर।

बिलासपुर के बिलासा देवी केंवट एयरपोर्ट (चकरभाठा) पर आज एक बार फिर मौत रनवे को छूकर निकल गई। दिल्ली से सीधे बिलासपुर पहुंची एलायंस एयर की फ्लाइट 9i613 (VT-UDA) लैंडिंग के दौरान भयंकर हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई। जैसे ही विमान के पहियों ने रनवे को छुआ, अचानक प्लेन का बायां (Left Side) टायर तेज झटके के साथ पंचर हो गया। विमान में 37 यात्री और 4 क्रू मेंबर समेत कुल 41 लोग सवार थे।
पायलट की सूझबूझ से विमान रनवे से फिसला नहीं और एक बड़ा अग्निकांड टल गया। घटना के तुरंत बाद रनवे पर ही यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर टर्मिनल बिल्डिंग पहुंचाया गया। इस तकनीकी खराबी के बाद एयरलाइन ने बिलासपुर से आगे की सभी उड़ानें आनन-फानन में रद्द कर दीं।

रनवे पर बार-बार मौत से आंखमिचौली: हादसों का पुराना इतिहास
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बिलासपुर एयरपोर्ट पर यात्रियों की जान सांसत में आई हो। इससे पहले भी इस एयरपोर्ट पर सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठ चुके हैं:
* पशुओं और पक्षियों का खौफ: चारदीवारी और झाड़ियों की उचित देखरेख न होने के कारण पहले भी रनवे पर मवेशियों और कुत्तों के आ जाने से विमानों की इमरजेंसी लैंडिंग या 'गो-अराउंड' जैसी स्थितियां बन चुकी हैं।

* खराब मौसम और विजिबिलिटी का संकट: नाइट लैंडिंग और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) की कमी के चलते पूर्व में कई बार उड़ानों को ऐन वक्त पर रायपुर डायवर्ट करना पड़ा है या घंटों हवा में चक्कर काटना पड़ा है।
* रखरखाव में लापरवाही: छोटे 70-72 सीटर ATR विमानों के संचालन में मेंटेनेंस और तकनीकी जांच की ढिलाई लगातार यात्रियों की सुरक्षा को दांव पर लगा रही है।
बदहाल इंफ्रास्ट्रक्चर: '3C' के दावों के बीच 'थर्ड क्लास' सुविधाएं
बिलासपुर एयरपोर्ट को लेकर बड़े-बड़े वादे और राजनीतिक घोषणाएं तो खूब हुईं, लेकिन धरातल पर एयरपोर्ट की स्थिति आज भी बेहद चिंताजनक है:
* सीमित रनवे और सुरक्षा बफर की कमी: रनवे की चौड़ाई और सुरक्षा रनवे एंड सेफ्टी एरिया (RESA) के मानकों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में अगर लैंडिंग के वक्त विमान का टायर फटने से प्लेन असंतुलित होता, तो पास में बड़ा हादसा हो सकता था।
* आपातकालीन रेस्क्यू की धीमी रफ्तार: एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक फायर टेंडर्स और इमरजेंसी इवैक्यूएशन सिस्टम अब भी बड़े स्तर के हादसों से निपटने के लिए नाकाफी नजर आते हैं।
* कनेक्टिविटी के नाम पर औपचारिकता: कभी फ्लाइट रद्द, कभी समय में बदलाव, और अब यह गंभीर तकनीकी खराबी। बिलासपुर के हवाई यात्रियों के लिए यह सफर सुविधा कम और जोखिम भरा खेल ज्यादा बन गया है।
जनता के सीधे सवाल: कब जागेगा डीजीसीए और विमानन मंत्रालय?
41 जिंदगियों के सुरक्षित बचने के बाद राहत की सांस तो ली गई है, लेकिन यह घटना एक सीधा चेतावनी संदेश है। टायर फटने के वास्तविक कारणों की जांच डीजीसीए (DGCA) को तत्काल उच्च स्तर पर करनी होगी। सवाल यह उठता है कि क्या विमान के उड़ान भरने से पहले प्री-फ्लाइट इंस्पेक्शन सही तरीके से हुआ था? और क्या बिलासपुर एयरपोर्ट का रनवे सुरक्षित उड़ानों के संचालन के लिए शत-प्रतिशत मानकों पर खरा उतर रहा है?
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी
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