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बारिश के भरोसे रहने की मजबूरी खत्म, मनरेगा के कुएँ से लहलहाई फसल

MANOJ@HAMARPRADESHCG
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बारिश के भरोसे रहने की मजबूरी खत्म, मनरेगा के कुएँ से लहलहाई फसल

मनोज कुमार भट्ट स्टेट रिपोर्टर बस्तर छत्तीसगढ़ 

हमर प्रदेश सीजी न्यूज़ 

बारिश के भरोसे रहने की मजबूरी खत्म, मनरेगा के कुएँ से लहलहाई फसल

जगदलपुर, 22 सितम्बर 2026  बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड की ग्राम पंचायत बुरूंगपाल के किसान पाकलू पोयाम पिता पंडरू पोयाम के लिए अब खेती बारिश के भरोसे नहीं रही।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत उनके निजी खेत में कुआँ बनने से उन्हें साल भर सिंचाई की सुविधा मिल गई है।

पहले सिंचाई का कोई स्थायी साधन न होने से उनकी खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर थी। कम बारिश में फसल सूख जाती थी और परिवार को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती थी।

इस समस्या के समाधान के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्राम पंचायत बुरूंगपाल द्वारा 2 लाख 93 हजार रुपये की लागत से निजी कूप निर्माण स्वीकृत किया गया। तकनीकी सहायक एवं सामाजिक अंकेक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में 19 फरवरी 2026 को काम शुरू हुआ और 10 सितम्बर 2026 को लगभग 2 लाख 60 हजार रुपये की लागत से कुआँ बनकर तैयार हो गया।

निर्माण के दौरान 600 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे परिवार को 267 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी भी मिली।

कुआँ पानी से भरते ही खेतों की तस्वीर बदल गई। पाकलू ने अब धान के साथ-साथ हरी सब्जी और मक्के की खेती शुरू कर दी है। अतिरिक्त उपज बेचकर अच्छी आमदनी हो रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च आसानी से पूरे हो रहे हैं।

पाकलू पोयाम ने कहा - "कुआँ बनने से खेती और रोजी-रोटी दोनों सुरक्षित हो गई है। अब बारिश का इंतजार नहीं करना पड़ता।"

ये सफलता पूरे गाँव के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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