मनोज कुमार भट्ट स्टेट रिपोर्टर बस्तर छत्तीसगढ़
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बस्तर में बारिश-बाढ़ से तबाही, प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज दे सरकार : राजू सोढ़ी
गांव-गांव जमीनी सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन हो, मुख्यमंत्री राहत कोष व स्वेच्छानुदान से मिले तत्काल सहायता
दरभा। बस्तर में लगातार हो रही बारिश और बाढ़ से कई गांवों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। नदी-नालों के उफान और जलभराव के कारण मकानों, फसलों, पशुधन, घरेलू सामान तथा आजीविका को नुकसान पहुंचने की स्थिति सामने आई है। इसे देखते हुए जनपद पंचायत दरभा क्षेत्र के जनपद सदस्य राजू सोढ़ी ने छत्तीसगढ़ सरकार से बस्तर के बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित करने तथा प्रभावितों को समयबद्ध राहत, उचित मुआवजा और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
*राजू सोढ़ी* ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को लंबी कागजी प्रक्रिया में उलझाने के बजाय शासन की पात्रता के अनुसार तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनकी फसल बर्बाद हुई है, पशुधन प्रभावित हुआ है अथवा आजीविका को नुकसान पहुंचा है, उनका प्राथमिकता से आकलन कर राहत दी जाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राहत कोष, मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान तथा अन्य उपलब्ध राहत प्रावधानों के माध्यम से गंभीर रूप से प्रभावित पात्र परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए। राहत की घोषणा तभी सार्थक होगी, जब उसका लाभ समय पर वास्तविक पीड़ित परिवारों तक पहुंचे।
हवाई सर्वे से तस्वीर, जमीन पर पहुंचेगा वास्तविक नुकसान
*सोढ़ी* ने कहा कि हवाई सर्वे से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की व्यापक स्थिति का आकलन किया जा सकता है, लेकिन किस परिवार का मकान कितना क्षतिग्रस्त हुआ, किस किसान की कितनी फसल प्रभावित हुई तथा किस परिवार को पशुधन और घरेलू सामान का कितना नुकसान हुआ—इसका वास्तविक आकलन जमीनी सर्वे से ही संभव है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित गांवों में विशेष टीमें भेजकर घर-घर और खेत-खेत सर्वे कराया जाए तथा मकान, फसल, पशुधन, घरेलू सामान और आजीविका से जुड़े नुकसान का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार किया जाए। कोई भी वास्तविक पीड़ित परिवार राहत एवं मुआवजा प्रक्रिया से छूटना नहीं चाहिए।
जिनका आशियाना उजड़ा, उनके पुनर्वास की हो ठोस व्यवस्था
*सोढ़ी* ने कहा कि जिन परिवारों के घर रहने योग्य नहीं बचे हैं, उनके लिए तत्काल अस्थायी आवास, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और आवश्यक राहत सामग्री की व्यवस्था की जाए। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण तथा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिए नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने फसल, पशुधन एवं अन्य पात्र नुकसान का शीघ्र आकलन कर नियमानुसार सहायता देने तथा बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की प्राथमिकता से बहाली की मांग की।
“सेवा संकल्प का सबसे बड़ा अर्थ संकट में लोगों के बीच पहुंचना”
*सोढ़ी* ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जन सेवा से राष्ट्र सेवा’ के 25 वर्ष से जुड़े सेवा संकल्प अभियान के तहत बस्तर से रायपुर तक बाइक यात्रा कर रहे लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ संकट की घड़ी में जरूरतमंद लोगों के बीच पहुंचकर उनकी मदद करना भी है।
उन्होंने कहा, “जब बस्तर के कई गांव बारिश और बाढ़ से प्रभावित हैं, परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, तब सेवा संकल्प के साथ कुछ समय इन बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद, राहत और बचाव कार्यों में लगाया जाता तो प्रभावित लोगों को प्रत्यक्ष सहयोग मिलता।”
*सोढ़ी* ने कहा कि बाइक यात्रा या कोई भी सेवा अभियान केवल यात्रा और कार्यक्रम तक सीमित न रहकर जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का माध्यम बने, तो उसका सामाजिक उद्देश्य और मजबूत होता है। उन्होंने यात्रा से जुड़े लोगों, जनप्रतिनिधियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और सेवा संस्थाओं से अपील की कि वे बाढ़ प्रभावित गांवों तक पहुंचकर पीड़ित परिवारों की समस्याएं सुनें, आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने में सहयोग करें तथा प्रशासन के राहत-बचाव कार्यों में सहभागी बनें।
उन्होंने कहा कि संकट के समय पीड़ित परिवार के बीच खड़ा होना ही सेवा की सबसे बड़ी सार्थकता है।
“बस्तर को घोषणा नहीं, जमीन पर तत्काल राहत और पुनर्वास चाहिए”
*सोढ़ी* ने कहा, “बस्तर की बाढ़ प्रभावित जनता को इस समय केवल दौरे और घोषणाओं से अधिक जमीन पर तत्काल मदद की जरूरत है। सरकार गांव-गांव जाकर वास्तविक नुकसान का सर्वे कराए और जिन परिवारों का आशियाना उजड़ गया है, उन्हें तत्काल राहत, उचित मुआवजा और पुनर्निर्माण के लिए सहायता उपलब्ध कराए।”
उन्होंने कहा कि विशेष राहत पैकेज में मकान पुनर्निर्माण, फसल एवं पशुधन नुकसान, घरेलू सामान की क्षति, प्रभावित परिवारों की आजीविका बहाली तथा सार्वजनिक अधोसंरचना की मरम्मत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
*सरकार से प्रमुख मांगें*
*सोढ़ी ने छत्तीसगढ़ सरकार एवं जिला प्रशासन से मांग की कि—*
1. बस्तर के बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज घोषित किया जाए।
2. प्रभावित गांवों में घर-घर और खेत-खेत जमीनी सर्वे कराया जाए।
3. क्षतिग्रस्त मकानों के लिए पुनर्निर्माण एवं मरम्मत सहायता दी जाए।
4. फसल नुकसान का शीघ्र सर्वे कर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए।
5. पशुधन के नुकसान का आकलन कर पात्र परिवारों को सहायता दी जाए।
6. मुख्यमंत्री राहत कोष एवं मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान सहित उपलब्ध प्रावधानों से तत्काल सहायता दी जाए।
7. बेघर या असुरक्षित परिवारों के लिए अस्थायी आवास, भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
8. कोई भी वास्तविक पीड़ित परिवार राहत सूची से न छूटे, इसके लिए पारदर्शी सर्वे व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
9. सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, पेयजल, स्कूल सहित सार्वजनिक सुविधाओं की शीघ्र बहाली की जाए।
10. प्रभावित परिवारों की आजीविका पुनर्स्थापन के लिए विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाए।
11. प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें भेजी जाएं।
12. राहत एवं मुआवजा प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाए।
13. जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं सेवा संस्थाओं के साथ समन्वय कर राहत कार्य तेज किए जाएं।
14. बस्तर की परिस्थितियों को देखते हुए दीर्घकालीन बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की जाए।
15. राहत एवं मुआवजे के क्रियान्वयन की जिला स्तर पर नियमित निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
*सोढ़ी* ने कहा कि “सिर्फ सर्वे नहीं, सर्वे के बाद समयबद्ध मुआवजा भी सुनिश्चित होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि बाढ़ में अपना आशियाना और आजीविका गंवा चुके परिवारों को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार को राहत, मुआवजा और पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
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