✍️हेतराम साहू स्टेट- रिपोर्टर
हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
बचत से शुरू हुआ सफर, अब सालाना ₹2.38 लाख तक पहुंची आय: 14 महिलाओं ने मिलकर बदली जिंदगी
मशरूम की खेती और दुग्ध व्यवसाय ने सावित्री पटेल के परिवार को दिखाई आत्मनिर्भरता की राह, भवानी महिला स्व सहायता समूह बना बदलाव की मिसाल
महासमुन्द, 16 सितम्बर 2026। कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बीच परिवार चलाने वाली 14 ग्रामीण महिलाओं ने एकजुट होकर अपनी जिंदगी की दिशा बदलने की शुरुआत की। आज यही महिलाएं स्व सहायता समूह से जुड़कर बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। बसना विकासखंड के ग्राम पंचायत खोगसा के आश्रित ग्राम पलसाभाड़ी का भवानी महिला स्व सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक बदलाव की कहानी सामने रखता है।
17 अप्रैल 2018 को गांव की 14 महिलाओं ने मिलकर भवानी महिला स्व सहायता समूह का गठन किया था। समूह की सभी महिलाएं गरीबी रेखा से जुड़े परिवारों से थीं और गृहस्थी की जिम्मेदारियां संभालती थीं। बिहान योजना के तहत गांव पहुंचीं सीआरपी दीदियों ने महिलाओं को समूह गठन, नियमित बचत, ऋण सुविधा और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। महिलाओं ने इस पहल को अवसर के रूप में लिया और एक साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।
पूंजी की कमी बनी थी रुकावट, समूह ने दिया सहारा
समूह से जुड़ने के बाद श्रीमती सावित्री पटेल ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए मशरूम उत्पादन शुरू करने का निर्णय लिया। उनके घर में काम शुरू करने के लिए पर्याप्त जगह थी, लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बिहान योजना के माध्यम से समूह को प्राप्त आरएफ और सीआईएफ राशि तथा बैंक लिंकेज से मिली वित्तीय सहायता ने इस चुनौती को दूर करने में मदद की।
इसके बाद सावित्री ने मशरूम उत्पादन के साथ गाय पालन और दुग्ध व्यवसाय को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया। धीरे-धीरे इन गतिविधियों से परिवार की आमदनी में बढ़ोतरी होने लगी।
₹85 हजार से बढ़कर ₹2.38 लाख हुई सालाना आय
सावित्री पटेल के अनुसार, समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की वार्षिक आय करीब 85 हजार रुपये थी। विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाने के बाद अब यह आय बढ़कर लगभग 2 लाख 38 हजार रुपये सालाना हो गई है।
सावित्री बताती हैं कि आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार की जरूरतें पूरी करना भी आसान हुआ है। बच्चों की उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवार के पालन-पोषण और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में अब पहले की तुलना में अधिक सुविधा हो रही है।
समूह और ग्राम संगठन से प्राप्त वित्तीय सहायता का समयपूर्व ब्याज सहित भुगतान भी किया जा रहा है। सावित्री का कहना है कि स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद केवल आमदनी ही नहीं बढ़ी, बल्कि खुद के पैरों पर खड़े होने का विश्वास भी मजबूत हुआ है।
एकता बनी ताकत, आजीविका बनी पहचान
भवानी महिला स्व सहायता समूह की कहानी बताती है कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सामूहिक प्रयास, बचत, वित्तीय सहयोग और आजीविका गतिविधियां आर्थिक बदलाव का मजबूत आधार बन सकती हैं। 14 महिलाओं ने मिलकर जिस सफर की शुरुआत वर्ष 2018 में की थी, वह आज आत्मनिर्भरता और नए अवसरों की मिसाल बनकर सामने आ रहा है।
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