✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज दुर्ग ब्यूरो चीफ रिपोर्टर कलावती
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में ईसाई प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोगों द्वारा प्रशासन को आवेदन दिए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर हिंदू संगठनों और आदिवासी समाज की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि आवेदन प्राप्त हुए हैं और उन्हें नियमानुसार संबंधित एसडीएम के पास भेजा जाएगा।
बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोगों ने प्रार्थना सभा में शामिल होने की अनुमति को लेकर कलेक्टर कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से आवेदनों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। सामने आई जानकारी के अनुसार, नगरी क्षेत्र से करीब 600 लोगों के आवेदन दिए जाने की बात कही जा रही है।
हिंदू संगठनों ने लगाए गंभीर आरोप
मामले को लेकर हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया है कि प्रार्थना सभा में लोगों को शामिल करने के पीछे मतांतरण की गतिविधियां हो सकती हैं। संगठनों का दावा है कि कुछ लोगों को कथित तौर पर लालच या अन्य माध्यमों से प्रभावित किया जा रहा है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन और संबंधित पक्षों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
साहू और आदिवासी समाज के लोगों को टारगेट करने का आरोप
हिंदू संगठनों की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि साहू समाज और आदिवासी समाज के गरीब परिवारों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। संगठनों ने मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष ने भी मामले पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि गरीब आदिवासी लोगों को कथित रूप से प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। समाज की ओर से इस मुद्दे पर बैठक बुलाने और प्रशासन से जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन के अनुसार आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन फिलहाल इन आवेदनों के आधार पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। आवेदनों को संबंधित एसडीएम कार्यालय भेजे जाने की बात कही गई है।
अब इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए दिए गए आवेदन वास्तव में लोगों की स्वेच्छा से हैं या किसी प्रकार के दबाव, प्रलोभन अथवा अवैध मतांतरण की गतिविधि से जुड़े हैं। इसका निर्धारण प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगा।
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