✍️हेतराम साहू स्टेट- रिपोर्टर हमर प्रदेश छत्तीसगढ़
80 मिनट की बहस में पूर्व सीएम भूपेश बघेल और डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने रखे अपने-अपने दावे, स्वीकृति से लेकर निर्माण तक के आंकड़ों पर हुआ तीखा वार-पलटवार
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर लंबे समय से चल रही बयानबाजी मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में आमने-सामने की बहस में बदल गई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने करीब 80 मिनट तक पीएम आवास योजना को लेकर अपने-अपने पक्ष में आंकड़े और तर्क रखे। बहस में स्वीकृत आवास, वित्तीय स्वीकृति, निर्माणाधीन मकानों और पूर्ण हो चुके आवासों के आंकड़े प्रमुख मुद्दा रहे।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर पीएम आवास योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही का आरोप लगाया। शर्मा का कहना था कि केंद्र से मिले अवसरों का अपेक्षित उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में आवास निर्माण और खर्च की गति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पीएम आवास योजना के शुरुआती आधार, वर्ष 2011 की जनगणना, आवास प्लस तथा अलग-अलग वर्षों में मिली स्वीकृतियों का हवाला देते हुए सरकार के दावों पर सवाल उठाए। बघेल ने कहा कि केंद्र की प्रक्रिया, पोर्टल बंद होने और राशि जारी होने में आई अड़चनों को केवल राज्य सरकार की विफलता के तौर पर देखना उचित नहीं है।
18 लाख से 46 लाख तक पहुंचा स्वीकृतियों का आंकड़ा
बहस के दौरान आवासों की स्वीकृति के आंकड़ों को लेकर भी दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए। बघेल ने अपने कार्यकाल में करीब 18 लाख आवासों की स्वीकृति का उल्लेख किया, जबकि बाद में केंद्र से मिली स्वीकृतियों को जोड़ते हुए कुल संख्या का बड़ा आंकड़ा सामने रखा गया। दूसरी ओर विजय शर्मा ने निर्माण और वास्तविक प्रगति को बहस का आधार बनाया।
यही अंतर इस बहस का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया—क्या किसी योजना की सफलता का पैमाना केवल स्वीकृत मकानों की संख्या होना चाहिए या फिर वास्तव में बने और हितग्राहियों को मिले मकानों की संख्या?
आंकड़ों की जंग के बीच असली सवाल गरीब परिवारों का
बहस में दोनों नेताओं ने अपने-अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को आंकड़ों के जरिए मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन आम जनता से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि जिस गरीब परिवार के नाम पर पीएम आवास स्वीकृत हुआ है, उसके सिर पर पक्की छत कब आई।
पीएम आवास योजना से जुड़े आंकड़ों में स्वीकृति, राशि जारी होना, निर्माण शुरू होना और मकान पूर्ण होना अलग-अलग चरण हैं। ऐसे में इन सभी आंकड़ों को एक समान आधार और समान अवधि में रखकर देखा जाए, तभी योजना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
रायपुर प्रेस क्लब की यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि पीएम आवास जैसे सीधे गरीब परिवारों से जुड़े मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के दो प्रमुख नेताओं ने सार्वजनिक मंच पर एक-दूसरे के दावों को चुनौती दी।
अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सवाल सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के मिलान का है। कितने मकान स्वीकृत हुए, कितनों की राशि जारी हुई, कितने मकान शुरू हुए, कितने पूरे हुए और कितने परिवारों को वास्तव में पक्का घर मिला—इन सवालों का साफ हिसाब ही पीएम आवास की असली तस्वीर सामने रखेगा।
Comments (0)
Leave a Comment
No comments yet. Be the first to share your thoughts!