✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
आरंग। शासन-प्रशासन की ओर से हर जरूरतमंद परिवार को पक्की छत उपलब्ध कराने के दावों के बीच राजधानी रायपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर नगर पालिका आरंग के वार्ड क्रमांक-07 में प्रधानमंत्री आवास योजना की जमीनी हकीकत सामने आई है। यहां कई गरीब परिवार आज भी मिट्टी के जर्जर और ढहते मकानों में रहने को मजबूर हैं। बारिश और मौसम की मार से कच्ची दीवारें लगातार कमजोर हो रही हैं, जिससे परिवारों के सामने हादसे का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति किसी दूरदराज इलाके की नहीं, बल्कि आरंग के मुख्य क्षेत्र की है। पीड़ित परिवारों के मुताबिक वे लंबे समय से पक्के मकान के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
पुरातात्विक नियमों का हवाला देकर आवास से वंचित करने का आरोप
स्थानीय निवासी लाता निर्मलकर, नंदनी जलक्षत्री, डिगम पटेल सहित अन्य लोगों का कहना है कि उनके मकान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक जैन तीर्थंकर मंदिर यानी भांडदेवल मंदिर से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। उनका आरोप है कि नगर पालिका और प्रशासन की ओर से पुरातात्विक संरक्षण नियमों का हवाला देकर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
पीड़ितों का सवाल है कि यदि यह क्षेत्र नियमों के दायरे में आता है तो मंदिर की बाउंड्रीवॉल से सटे इलाकों में कुछ लोगों के पक्के मकानों का निर्माण कैसे हो गया। उनका दावा है कि मंदिर के आसपास करीब 25 से 30 गरीब परिवार इसी समस्या से जूझ रहे हैं।
8 साल से लगा रहे अधिकारियों के चक्कर
पीड़ित परिवारों का कहना है कि पक्के आवास की मांग को लेकर पिछले करीब 8 वर्षों से वे कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं। जनदर्शन कार्यक्रमों में भी अपनी समस्या रखकर लिखित आवेदन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।
परिवारों का कहना है कि जर्जर मिट्टी की दीवारों के बीच रहना लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। बारिश के मौसम में दीवारों के गिरने का डर बना रहता है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी बड़ा सवाल है।
चुनावी वादों के बाद भी नहीं मिली राहत
पीड़ित परिवारों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी उपेक्षा का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान उन्हें पक्के मकान दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन चुनाव के बाद उनकी समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। परिवारों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मामले में जल्द हस्तक्षेप कर पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
पीड़ितों ने उठाए सवाल
यदि मंदिर के समीप पक्के मकानों का निर्माण हो सकता है तो गरीब परिवारों के आवास पर रोक क्यों?
- क्या पुरातात्विक संरक्षण के नियम सभी लोगों पर समान रूप से लागू हो रहे हैं?
- यदि जर्जर मकान गिरने से कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
- पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ आखिर कब मिलेगा?
CMO ने कहा—पात्र परिवारों को नहीं किया जाएगा वंचित
मामले में आरंग नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम संजीवन सोनवानी ने कहा कि पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि हितग्राहियों के दस्तावेज वैध हैं और इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, तो मामले की जांच की जाएगी।
सीएमओ ने यह भी कहा कि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, ताकि पात्र हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच कर नियमों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करता है या फिर वर्षों से पक्के मकान की आस लगाए बैठे इन परिवारों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
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