नकल के मामले में छात्रा की शिकायत पर SC आयोग की कार्रवाई को झटका, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किए अधिकार
Wednesday, September 30 2026
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नकल के मामले में छात्रा की शिकायत पर SC आयोग की कार्रवाई को झटका, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किए अधिकार

DHANIRAM- संपादक hamarpradeshcg.com
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नकल के मामले में छात्रा की शिकायत पर SC आयोग की कार्रवाई को झटका, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किए अधिकार

नकल के मामले में छात्रा की शिकायत पर SC आयोग की कार्रवाई को झटका, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किए अधिकार

 

आयोग अपराध सिद्ध करने का फैसला नहीं सुना सकता, एफआईआर की अनुशंसा भी अधिकार क्षेत्र से बाहर

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार और उसकी कार्रवाई को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आयोग किसी शिकायत की जांच कर तथ्यों के आधार पर सरकार अथवा संबंधित सक्षम प्राधिकरण को कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने का निष्कर्ष देना आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। अपराध के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार आपराधिक न्यायालय को है।

 

यह फैसला 10 सितंबर 2026, गुरुवार को जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कोरबा के शासकीय महाविद्यालय बरपाली में पदस्थ सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव की याचिका पर सुनाया। याचिका में राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की गई अनुशंसा को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद आयोग की 16 मार्च 2021 की अनुशंसा को निरस्त कर दिया।

 

परीक्षा के दौरान छात्रा को नकल करते पकड़ा गया था

 

मामला कोरबा जिले के शासकीय महाविद्यालय बरपाली से जुड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार परीक्षा के दौरान सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव और एक अन्य शिक्षिका ने छात्रा दीपमाला गुलरी को कथित तौर पर नकल करते हुए पकड़ा था।

 

इसके बाद छात्रा की ओर से यादव के खिलाफ राज्य अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत प्रस्तुत की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नकल के प्रकरण को लेकर उस पर दबाव बनाया गया और उसे परेशान किया गया।

 

आयोग ने जारी किया था नोटिस

 

शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति आयोग ने 21 जनवरी 2020 को सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानने के लिए जवाब मांगा था।

 

यादव ने 3 फरवरी 2020 को संबंधित दस्तावेजों के साथ अपना जवाब आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया। उनके पक्ष की ओर से बताया गया कि इसी प्रकार के आरोपों की पूर्व में भी जांच की जा चुकी है और जांच में आरोपों को सही नहीं पाया गया था।

 

2021 में एफआईआर की अनुशंसा

 

मामले की कार्रवाई आगे बढ़ने के बाद राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने 16 मार्च 2021 को मृगेश कुमार यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा कर दी। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1) के तहत प्रमाणित मानते हुए पुलिस कार्रवाई की अनुशंसा की थी।

 

इस कार्रवाई के खिलाफ सहायक प्रोफेसर ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

हाई कोर्ट ने आयोग की सीमा बताई

 

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आयोग शिकायत की जांच कर सकता है और जांच के आधार पर सक्षम सरकार अथवा संबंधित प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुशंसा भेज सकता है।

 

हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अपराध सिद्ध हो गया है, ऐसा निष्कर्ष निकालना आयोग का कार्य नहीं है। अपराध का निर्धारण और दोष सिद्ध करने का अधिकार सक्षम आपराधिक न्यायालय के पास है।

 

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा 16 मार्च 2021 को की गई एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा को निरस्त कर दिया।

 

क्या है कोर्ट की व्यवस्था का महत्व?

 

हाई कोर्ट की इस व्यवस्था से यह स्पष्ट होता है कि संवैधानिक या वैधानिक आयोग शिकायतों की जांच और अनुशंसा की भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन आपराधिक मामले में दोष अथवा अपराध सिद्ध होने का अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से ही तय किया जाएगा।

 

यह फैसला आयोगों के अधिकार क्षेत्र और आपराधिक न्यायालय के अधिकारों के बीच अंतर को स्पष्ट करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

रिपोर्ट: संजय कुमार शुक्ला

हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ | बिलासपुर

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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