अभिषेक कुमार पाण्डेय की खास रिपोर्ट बिलासपुर छत्तीसगढ़
धान का कटोरा ही नहीं, औषधियों का खजाना भी: जानिए छत्तीसगढ़ की वो 46+ भाजियां, जो पूरी दुनिया में नहीं मिलेंगी!
छत्तीसगढ़ को सिर्फ ‘धान का कटोरा’ समझना इस समृद्ध माटी की अधूरी पहचान है। इस धरा की असली ताकत और मिठास उसकी थाली में सजने वाली पारंपरिक ‘भाजियों’ में बसती है। लाल भाजी, मुनगा भाजी से लेकर बोहार और सुनसुनिया तक—छत्तीसगढ़ में प्रकृति ने हरी पत्तियों के रूप में स्वाद, सेहत और आयुर्वेद का ऐसा संगम रचा है जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता।
स्वाद भी, संस्कृति भी और अचूक औषधि भी
छत्तीसगढ़ी खानपान में भाजी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि जीवनशैली और परंपरा का अटूट हिस्सा है। खेत की मेड़ों, जंगलों और बाड़ियों में उगने वाली ये भाजियां बिना किसी केमिकल या खाद के कुदरती रूप से तैयार होती हैं:
* बोहार और कोयलार भाजी: जंगल के पेड़ों की कोमल पत्तियों से बनने वाली ये भाजियां स्वाद में जितनी लाजवाब हैं, इनकी कीमत और मांग उतनी ही ज्यादा रहती है।
* कर्मता, कांदा और चेंच भाजी: तालाबों, दलदली इलाकों और खेतों में मिलने वाली ये भाजियां पेट से जुड़ी बीमारियों और पाचन के लिए रामबाण मानी जाती हैं।
* चरोटा, खोटनी और कुकरी पोटा भाजी: ये मौसमी भाजियां मौसमी बीमारियों से लड़ने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाती हैं।

छत्तीसगढ़ की प्रमुख 46 पारंपरिक भाजियों की अनूठी सूची
| क्र. सं. | प्रमुख भाजियां (1–16) | प्रमुख भाजियां (17–31) | प्रमुख भाजियां (32–46+) |
|---|---|---|---|
| 1–5 | 1. मुनगा भाजी
2. लाल भाजी
3. मुरई भाजी
4. गोभी भाजी
5. सरसों भाजी | 17. चेंच भाजी
18. कोचई भाजी
19. खोटनी भाजी
20. गोदली भाजी
21. खेड़ा भाजी | 32. नोनिया भाजी
33. हमारी भाजी
34. चनौरी भाजी
35. चांटी भाजी
36. कोसम भाजी |
| 6–10 | 6. बोहार भाजी
7. करेला भाजी
8. पालक भाजी
9. तीवरा भाजी
10. कोयलार भाजी | 22. गुमी भाजी
23. मुडही भाजी
24. चरोटा भाजी
25. बंधे भाजी
26. केना भाजी | 37. सिलयारी भाजी
38. कुकरी पोटा भाजी
39. बरबटी भाजी
40. चौलाई भाजी
41. कुदरू भाजी |
| 11–16 | 11. करमता भाजी
12. सुनसुनिया भाजी
13. भथुआ भाजी
14. मेथी भाजी
15. कांदा भाजी
16. पोई भाजी | 27. चना भाजी
28. मस्टर भाजी
29. गजकुरना भाजी
30. पीपर भाजी
31. मखना भाजी | 42. मिर्ची भाजी
43. मुस्केनी भाजी
44. कोजयारी भाजी
45. दांत खिसोरी भाजी
46. उरला भाजी
(अन्य: कुकुर, झिलो, गुर्सू भाजी) |
‘छत्तीसगढ़ की शान, भाजी हमारी पहचान’
लहसुन, सूखी लाल मिर्च और सरसों तेल के साधारण तड़के से तैयार होने वाली इन भाजियों का स्वाद किसी भी फाइव-स्टार व्यंजन को मात देने का माद्दा रखता है। जब थाली में गर्म भात, बासी या पेज के साथ इनमें से कोई भी भाजी परोसी जाती है, तो वह केवल भोजन नहीं बल्कि मिट्टी से जुड़ाव का उत्सव बन जाती है। आज जब पूरी दुनिया 'ऑर्गेनिक' और 'सुपरफूड' की ओर भाग रही है, छत्तीसगढ़ सदियों से इन प्राकृतिक सुपरफूड्स को अपनी थाली का राजा बनाए हुए है।

हमर प्रदेश सी जी
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