✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
उफनते नाले और घुटने भर कीचड़ के बीच शवयात्रा ले जाने को मजबूर ग्रामीण, सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी
दुर्ग। जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरिया से प्रशासनिक उदासीनता और विकास के दावों पर सवाल खड़े करती तस्वीर सामने आई है। गांव के मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को उफनते नाले और घुटने तक कीचड़ के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे हालात में अंतिम संस्कार के लिए शव को मुक्तिधाम तक ले जाना भी ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
उफनते नाले को पार कर ले गए शव
हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनते नाले को पार करते हुए शवयात्रा ले जाते दिखाई दे रहे हैं। कीचड़ से भरे रास्ते और तेज बहाव के बीच शव को ले जाने का यह दृश्य गांव में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यहां से गुजरना बेहद मुश्किल है।
अधिकारियों से शिकायत के बावजूद नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों के मुताबिक, मुक्तिधाम तक सड़क निर्माण की समस्या को लेकर कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या सामने होने के बावजूद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
20 लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने धरसा रोड से मुक्तिधाम तक WBM (वाटर बाउंड मैकाडम) सड़क बनाए जाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि मुक्तिधाम तक पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए करीब 20 लाख रुपये की आवश्यकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसे बुनियादी और मानवीय कार्य के लिए भी यदि लोगों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द सड़क निर्माण की स्वीकृति दी जाए और मुक्तिधाम तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द इस समस्या का समाधान नहीं किया और सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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