दवा खिड़की से लेकर डॉक्टरों के केबिन तक दहशत: सिम्स में युवक ने खुलेआम दी घसीटने की धमकी, सुरक्षा गार्ड नदारद, पुलिस की चुप्पी पर बवाल!
दवा वितरण केंद्र पर विवाद के बाद केबिन में घुसा युवक; खुद को गोड़पारा का प्रियांशु मिश्रा बताकर काटा बवाल, पुलिसिया रसूख की धौंस के आगे बेबस दिखा अस्पताल अमला।
बिलासपुर।
न्यायधानी के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल 'सिम्स' (CIMS) से मानवता, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। दवा वितरण खिड़की की अव्यवस्था से शुरू हुआ विवाद डॉक्टरों और कर्मचारियों के केबिन तक पहुंच गया, जहां एक युवक ने घुसकर खुलेआम गुंडई और 'खाकी की धौंस' दिखाई।
युवक ने डॉक्टरों और कर्मचारियों के सामने सीना तानकर स्थानीय पुलिस का खौफ दिखाया और चिल्लाते हुए कहा— “सिविल लाइन टीआई मेरा मौसा है... गोड़पारा का प्रियांशु मिश्रा नाम है मेरा, बहुत मारूंगा नहीं तो!” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अस्पताल में कार्यरत अमले की सुरक्षा और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली को लेकर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं।
केबिन में तांडव: "बाहर घसीट कर मारूंगा, कौन बोलेगा?"
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवक डॉक्टरों और स्वास्थ्य अमले के दफ्तर में बेधड़क दाखिल होता है और तेज आवाज में धमकियां देने लगता है। उसने आरोप लगाया कि दवा वितरण केंद्र पर बुजुर्ग मरीजों के साथ बदसलूकी की जा रही है।
विवाद सुलझाने के बजाय युवक ने स्थानीयता और पुलिसिया रिश्तेदारी का रौब झाड़ते हुए कहा—
> “तू कौन होता है बे दवाई नहीं देने वाला? सरकार दवा दे रही है कि तू दे रहा है? मैं शहर का लड़का हूं, ये बाहर से आए लोग इतना अकड़ कर बात करेंगे? अभी घसीटते हुए बाहर ले जाकर मारूंगा... कौन बोलेगा बताओ? सबको बाहर बुजुर्गों के पैर पड़कर माफी मांगनी होगी।”
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कमरे में मौजूद सीनियर स्टाफ और डॉक्टर लगातार हाथ जोड़कर उसे शांत कराने की मिन्नतें करते रहे, लेकिन वह लगातार कर्मचारियों पर चिल्लाता और धमकाता रहा।
सुरक्षा व्यवस्था के दावे ध्वस्त, दहशत में स्टाफ
इस घटना ने सिम्स प्रशासन के सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है:
* सुरक्षा गार्ड पूरी तरह नदारद: अस्पताल परिसर में सुरक्षा एजेंसियों पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद घटना के वक्त कोई भी सुरक्षाकर्मी केबिन में युवक को रोकने नहीं पहुंचा।
* कर्मचारियों में भारी आक्रोश: डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ का कहना है कि वे रोजाना हजारों मरीजों के दबाव के बीच काम करते हैं। अगर अस्पताल के भीतर घुसकर टीआई के नाम पर जान से मारने और घसीटने की धमकियां मिलेंगी, तो कोई भी कर्मचारी सुरक्षित माहौल में काम कैसे करेगा?
स्थानीय पुलिस का क्या है एक्शन? 3 बड़े सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद अब नजरें सीधे बिलासपुर पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं:
* क्या दर्ज होगा केस? शासकीय कार्य में बाधा डालने, अस्पताल के कर्मचारियों को धमकाने और मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट (चिकित्सक एवं चिकित्सा सेवा संस्था संरक्षण अधिनियम) के तहत युवक पर एफआईआर दर्ज होगी या नहीं?
* टीआई के नाम का दुरुपयोग या संरक्षण? यदि युवक किसी पुलिस अधिकारी का रिश्तेदार है, तो क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करेगी? और यदि वह सिर्फ धौंस जमाने के लिए झूठा नाम ले रहा था, तो पुलिस की छवि खराब करने पर उस पर कार्रवाई कब होगी?
* सिम्स में सुरक्षा का क्या? क्या सिम्स प्रशासन इस मामले में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराकर संवेदनशील काउंटरों पर सुरक्षा बल तैनात करेगा?
> सीधा सवाल: अस्पताल जीवन बचाने की जगह है या रसूखदारों के लिए गुंडागर्दी का अखाड़ा? जब तक स्वास्थ्यकर्मियों को धमकाने वाले ऐसे तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक अस्पताल के कर्मचारियों का खौफ दूर होना नामुमकिन है।
अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़
हमर प्रदेश सी जी
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