✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ स्टेट हेड रिपोर्टर किशोर कुमार
कबीर नगर में सर्व समाज भवन के लिए मुख्यमंत्री ने की 50 लाख रुपए देने की घोषणा
रायपुर। राजधानी रायपुर के कबीर नगर स्थित दशहरा मैदान में मोर माटी सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित तीजा-पोरा तिहार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और कृषि परंपराओं से जुड़े महत्वपूर्ण लोकपर्व हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा माताओं-बहनों, परिवार और रिश्तों से जुड़ा पर्व है, जबकि पोरा हमारे अन्नदाता किसानों, खेती और पशुधन के सम्मान का पर्व है। ऐसे लोकपर्व हमारी संस्कृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवंत रखने के साथ समाज में आत्मीयता और सामाजिक समरसता को भी मजबूत करते हैं।
सर्व समाज भवन के लिए 50 लाख की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने मोर माटी सांस्कृतिक संगठन की मांग पर कबीर नगर में सर्व समाज भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपए देने की घोषणा की। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया तथा तीजा पर्व के अवसर पर माताओं-बहनों को साड़ी भेंट की।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को तीजा-पोरा तिहार की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मोर माटी सांस्कृतिक संगठन द्वारा हर वर्ष इस पर्व को भव्यता और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आयोजन की विशेषता इसमें सभी समाजों की सहभागिता और समरसता की भावना है।
नारी सम्मान और तीजा की परंपरा का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। उन्होंने कहा कि तीजा तिहार माताओं-बहनों के त्याग, तप और परिवार के प्रति समर्पण का पर्व है। इस अवसर पर महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना के साथ व्रत रखती हैं तथा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत तीज-त्योहारों का देश है और छत्तीसगढ़ की संस्कृति में लोकपर्वों का विशेष महत्व है। एकादशी, करमा तिहार सहित अनेक पर्वों के पीछे सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश छिपे हैं। इन परंपराओं को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।
किसानों और महिलाओं के लिए सरकार की योजनाओं का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांव, गरीब, किसान और माताओं-बहनों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई। उनके अनुसार बीते दो वर्षों में 11 लाख से अधिक आवास बन चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता दी जा रही है और अब तक 31 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि महिलाएं इस राशि का उपयोग छोटे व्यवसाय, सिलाई मशीन खरीदने तथा बेटियों के भविष्य के लिए बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं।
नक्सलवाद और सुशासन पर भी बोले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में बाधा रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व तथा सुरक्षाबलों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य अब नक्सलवाद से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत आवासों की जानकारी भी दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के लिए ई-फाइल प्रणाली लागू की गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं का भी उल्लेख किया।
रामलला दर्शन और तीर्थ दर्शन योजना की जानकारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन कराए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इसका लाभ ले चुके हैं। इसी तरह मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को देश के चयनित 31 तीर्थ स्थलों की यात्रा कराई जा रही है।
कार्यक्रम में विधायक मोतीलाल साहू सहित रमेश सिंह ठाकुर, भगतराम हरबंस, चंद्रशेखर शुक्ला, टेकेश्वर चंद्रा, धीरेन्द्र परगनिहा, देवा साहू, ओमप्रकाश मरावी, मनोज जोशी, मैक मिलन साहू, मोर माटी सांस्कृतिक संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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