Tuesday, September 29 2026
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तारीखों के जाल से मुक्ति, टूटे रिश्तों को मिली नई ज़िंदगी: रायगढ़ नेशनल लोक अदालत में 12 लाख मुकदमों का एक दिन में 'द एंड', 5 उजड़ते आशियाने फिर बसे!

State Head - State_head_abhishek
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तारीखों के जाल से मुक्ति, टूटे रिश्तों को मिली नई ज़िंदगी: रायगढ़ नेशनल लोक अदालत में 12 लाख मुकदमों का एक दिन में 'द एंड', 5 उजड़ते आशियाने फिर बसे!

तारीखों के जाल से मुक्ति, टूटे रिश्तों को मिली नई ज़िंदगी: रायगढ़ नेशनल लोक अदालत में 12 लाख मुकदमों का एक दिन में 'द एंड', 5 उजड़ते आशियाने फिर बसे!

अदालत की दहलीज पर जब जीत-हार का अहंकार टूटा, तो आंसुओं की जगह मुस्कान ने ले ली; डिजिटल और भौतिक मंचों से हुआ ऐतिहासिक न्याय, 12.07 लाख से अधिक प्रकरणों का एक झटके में खात्मा।

रायगढ़।

अदालतों की चौखट अमूमन मुकदमों के बोझ, वकीलों की दलीलों और बरसों लंबी खिंचती ‘तारीख पर तारीख’ के लिए जानी जाती है। लेकिन शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय रायगढ़ का माहौल बदला हुआ था। यहाँ न कोई जीता, न कोई हारा—जीता तो सिर्फ आपसी विश्वास और इंसानियत। वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत ने जिले में न्याय की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने एक ही दिन में 12 लाख से ज्यादा विवादों की फाइलों को हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया।

सबसे भावुक और दिल को छू लेने वाला मंजर कुटुम्ब न्यायालय में दिखा, जहाँ टूटने की कगार पर खड़े 5 परिवारों के बीच की कड़वाहट को आपसी समझाइश से खत्म कराया गया। अदालत के गलियारे से जब ये जोड़े एक-दूसरे का हाथ थामकर बाहर निकले, तो कानून की सख्त धाराओं पर रिश्तों की मिठास भारी पड़ चुकी थी।

जब टूटे धागे फिर जुड़े: 5 उजड़ते घरों में लौटी खुशहाली

कानूनी जंग में सबसे ज्यादा आहत भावनाएं और परिवार होते हैं। कुटुम्ब न्यायालय में चल रहे कई विवाद तलाक और अलगाव के मुहाने पर थे। लोक अदालत की पीठ ने जब दोनों पक्षों के बीच संवाद का सेतु बनाया, तो गलतफहमियों की दीवारें ढह गईं। पांच दंपतियों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूजे के साथ दोबारा जीवन शुरू करने का संकल्प लिया। न्यायिक अधिकारियों ने जब इन परिवारों को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं, तो अदालत कक्ष में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

12 लाख 7 हजार मुकदमों का ऐतिहासिक निपटारा

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जितेंद्र जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत ने मुकदमों के निस्तारण में नया कीर्तिमान रचा:

 * विशाल आंकड़ा: न्यायालय में लंबित और प्री-लिटिगेशन (अदालत आने से पहले के विवाद) को मिलाकर कुल 12,07,255 मामलों का दोनों पक्षों की सहमति से निपटारा किया गया।

 * लंबी मुकदमों की चक्की से राहत: बैंक कर्ज, बिजली बिल, फाइनेंस रिकवरी, बीमा दावों और छोटे दीवानी-फौजदारी मामलों में उलझे लाखों नागरिकों को कोर्ट-कचहरी के अंतहीन चक्करों और आर्थिक बर्बादी से एक ही दिन में स्थायी मुक्ति मिल गई।

'न्याय आपके द्वार': जब स्क्रीन पर हुआ फैसला

लोक अदालत की सार्थकता उस वक्त और बढ़ गई जब तकनीक का सहारा लेकर दूरदराज बैठे पक्षकारों को वर्चुअल माध्यम से जोड़ा गया। जो लोग बीमारी, दूरी या किसी मजबूरी के चलते अदालत नहीं पहुंच सकते थे, उनके विवादों को स्क्रीन पर आमने-सामने बैठाकर सुलझाया गया। यह पहल साबित करती है कि अगर नीयत साफ हो, तो न्याय आम आदमी के दरवाजे तक चलकर पहुंचता है।

कानून की चौखट से निकला कड़ा संदेश

> सुलह से बड़ा कोई फैसला नहीं:

> लोक अदालत का यह आयोजन सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि उस सोच पर करारा प्रहार है जो मानती है कि विवादों का हल सिर्फ सालों साल की मुकदमेबाजी है। जब पक्षकार मेज के आमने-सामने बैठकर अपनी जिद छोड़ते हैं, तो वर्षों का मानसिक तनाव मिनटों में काफूर हो जाता है। रायगढ़ लोक अदालत ने यह साबित कर दिखाया कि न्याय का असली मकसद सजा देना नहीं, बल्कि व्यवस्था और रिश्तों को संभालना है।

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अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर छत्तीसगढ़ 

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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