Monday, September 28 2026
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तहसील दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति: छत्तीसगढ़ में ज़मीन सीमांकन अब एक क्लिक की दूरी पर, घर बैठे नपेगा खेत-खलिहान!

State Head - State_head_abhishek
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तहसील दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति: छत्तीसगढ़ में ज़मीन सीमांकन अब एक क्लिक की दूरी पर, घर बैठे नपेगा खेत-खलिहान!

तहसील दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति: छत्तीसगढ़ में ज़मीन सीमांकन अब एक क्लिक की दूरी पर, घर बैठे नपेगा खेत-खलिहान!

 

 

रायपुर: जमीन के एक टुकड़े का सीमांकन कराने के लिए महीनों तहसील और पटवारी के दफ्तरों की धूल फांकने का दौर अब बीते दिनों की बात होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्व तंत्र में ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए जमीन सीमांकन (Land Demarcation) की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और ऑनलाइन कर दिया है। अब किसान और जमीन मालिक बिना किसी बिचौलिये या दफ्तर की गणेश-परिक्रमा के सीधे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से सीमांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

दलालों की दुकान बंद, व्यवस्था पारदर्शी

दशकों से राजस्व विभाग में सीमांकन का काम आम जनता के लिए सबसे पेचीदा और सिरदर्द भरा माना जाता रहा है। तारीख पर तारीख मिलना, पटवारी की मिन्नतें करना और दलालों की मनमानी जेब ढीली कराना हर ज़मीन मालिक की मजबूरी बन चुका था। नई ऑनलाइन व्यवस्था ने इस पूरी जटिल प्रक्रिया पर कड़ा प्रहार किया है। अब तय समयसीमा के भीतर पूरी जवाबदेही के साथ ज़मीन की नपाई होगी, जिससे सीमा विवादों और अनावश्यक कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी भारी कमी आएगी।

क्या बदला है इस नई व्यवस्था में?

 * दफ्तरों से निजात: अब आवेदन जमा करने या स्थिति जानने के लिए तहसील कचहरी जाने की कोई बाध्यता नहीं है।

 * पारदर्शी निगरानी: आवेदन किस स्तर पर लंबित है, उसकी लाइव स्थिति पोर्टल पर ट्रैक की जा सकेगी।

 * समयबद्ध सीमांकन: तय समय-सीमा के भीतर संबंधित राजस्व अमले (आरआई/पटवारी) को मौके पर पहुंचकर नपाई करनी होगी।

 * डिजिटल सूचना: सीमांकन की तिथि और समय की सूचना आवेदक और संबंधित पक्षों को सीधे मोबाइल मैसेज/डिजिटल माध्यम से मिलेगी।

कैसे होगा ऑनलाइन आवेदन?

प्रक्रिया को आम नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखकर बेहद सरल बनाया गया है:

 * पोर्टल पर लॉगिन: राजस्व विभाग के आधिकारिक पोर्टल (जैसे भुइयां पोर्टल / ई-डिस्ट्रिक्ट) पर जाएं।

 * विवरण दर्ज करें: अपनी ज़मीन का खसरा नंबर, रकबा, हल्का और संबंधित जिले/तहसील की जानकारी भरें।

 * दस्तावेज़ अपलोड: आवश्यक दस्तावेज़ और पहचान प्रमाण ऑनलाइन सबमिट करें।

 * पावती और ट्रैकिंग: आवेदन सबमिट होते ही एक यूनीक रिफरेंस नंबर मिलेगा, जिससे प्रगति की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी।

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में यह सुधार छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों और भू-स्वामियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। प्रशासनिक फाइलों में दबे रहने वाले मामलों को अब आधुनिक तकनीक के ज़रिए तेज़ी और पारदर्शिता से निपटाया जाएगा।

 

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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