Tuesday, September 29 2026
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ड्राइविंग लाइसेंस का नया फरमान: अब RTO के दलालों की दुकान बंद या नई लूट की शुरुआत? जानिए टेस्ट के बदले नियमों का पूरा सच!

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ड्राइविंग लाइसेंस का नया फरमान: अब RTO के दलालों की दुकान बंद या नई लूट की शुरुआत? जानिए टेस्ट के बदले नियमों का पूरा सच!

ड्राइविंग लाइसेंस का नया फरमान: अब RTO के दलालों की दुकान बंद या नई लूट की शुरुआत? जानिए टेस्ट के बदले नियमों का पूरा सच!

रायपुर / नई दिल्ली:

सड़क पर गाड़ी लेकर निकलने वालों और ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने के लिए आरटीओ (RTO) के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिसने वालों के लिए परिवहन विभाग ने नियमों की पूरी बिसात ही पलट दी है। दावा किया जा रहा है कि अब सरकारी दफ्तरों की कतारों और बाबू-दलाल सिंडिकेट से मुक्ति मिलेगी, लेकिन अंदर की हकीकत यह है कि नए नियमों की आड़ में आम आदमी के लिए लाइसेंस हासिल करना और भी महंगा व पसीने छुड़ाने वाला साबित हो सकता है।

आरटीओ में टेस्ट खत्म... पर क्या प्राइवेट सेंटरों पर शुरू होगी 'खुली उगाही'?

सरकार के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, अब आवेदक को ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए सरकारी RTO ऑफिस जाने की अनिवार्य बाध्यता खत्म की जा रही है। इसकी जगह सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्राइवेट ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (Accredited Driving Training Centres) टेस्ट लेंगे और सर्टिफिकेट जारी करेंगे।

कागजी दावा:

 * आरटीओ में लगने वाली लंबी लाइनें खत्म होंगी।

 * बिचौलियों और दलालों का नेटवर्क टूटेगा।

 * पारदर्शी तरीके से सिम्युलेटर और ट्रैक पर ट्रेनिंग के बाद ही लाइसेंस मिलेगा।

ज्वलंत सवाल:

 * क्या प्राइवेट ट्रेनिंग सेंटरों को लाइसेंस बांटने की चाबी सौंपकर सरकार ने भ्रष्टाचार का विकेंद्रीकरण (Decentralization) नहीं कर दिया?

 * जिस आरटीओ में चंद रुपयों की सरकारी फीस लगती थी, क्या अब इन प्राइवेट ड्राइविंग स्कूलों में हजारों रुपये की मोटी फीस चुकाए बिना एक आम नागरिक लाइसेंस ले पाएगा?

कड़े नियम: 1 से 2 एकड़ जमीन और बायोमेट्रिक हाजिरी का पेंच

नए नियमों के मुताबिक मान्यता प्राप्त सेंटरों के लिए शर्तें बेहद सख्त रखी गई हैं:

 * दोपहिया/तीन पहिया ट्रेनिंग के लिए कम से कम 1 एकड़ और भारी वाहनों के लिए 2 एकड़ जमीन व टेस्ट ट्रैक होना अनिवार्य है।

 * ट्रेनिंग में बायोमेट्रिक अटेंडेंस और आईटी सिस्टम से निगरानी होगी।

 * तय घंटों (थ्योरी + प्रैक्टिकल) की ट्रेनिंग पूरी करने और कड़े टेस्ट पास करने के बाद ही सर्टिफिकेट मिलेगा।

लेकिन सवाल उठता है कि शहरों के भीतर इतनी महंगी जमीन पर चलने वाले ट्रेनिंग सेंटर अपनी लागत किससे वसूलेंगे? सीधा जवाब है—आम जनता की जेब से!

लापरवाही पर सीधा चाबुक: '5 चालान' और लाइसेंस रद्द!

सिर्फ लाइसेंस बनवाना ही नहीं, गाड़ी चलाना भी अब आसान नहीं रहेगा। नियमों के तहत ट्रैफिक वॉयलेशन को लेकर शिकंजा कस दिया गया है। अगर किसी चालक के सालभर में 5 या उससे ज्यादा चालान कटते हैं या 45 दिनों के भीतर पेनाल्टी नहीं भरी जाती, तो लाइसेंस सीधा सस्पेंड या निरस्त होने की कगार पर पहुंच जाएगा।

व्यवस्था सुधरेगी या जनता पर नया बोझ?

परिवहन मंत्रालय का तर्क है कि देश में हर साल होने वाले लाखों सड़क हादसों को रोकने के लिए 'सख्त और ट्रेंड' ड्राइवरों का होना जरूरी है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक निगरानी तंत्र सख्त नहीं होगा, तब तक नियम चाहे आरटीओ के हों या प्राइवेट सेंटरों के, पिसना हमेशा आम नागरिक को ही पड़ता है। अब देखना यह होगा कि यह 'नया टेस्ट और नया नियम' सड़कों को सुरक्षित बनाता है या फिर प्राइवेट सेंटरों की चांदी काटता है!

 

 

अभिषेक कुमार पाण्डेय स्टेट हेड रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़

हमर प्रदेश सी जी

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in Business.

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