✍️ हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ न्यूज दुर्ग ब्यूरो चीफ रिपोर्टर कलावती
जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में बुधवार, 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले की सुनवाई करीब 13 वर्षों तक चली और अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला बस्तर की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस के कई नेताओं और अन्य लोगों की मौत हुई थी। विभिन्न रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 29 बताई गई है।
भूपेश बघेल ने उठाया साजिश की जांच का सवाल
फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अदालत का फैसला आने के बावजूद उनके अनुसार झीरम मामले में न्याय पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जिन लोगों पर हमले की बड़ी साजिश का आरोप है, वे अभी भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।
बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि NIA की जांच में कथित साजिश के सभी पहलुओं की पूरी तरह जांच नहीं हुई। उनके अनुसार मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका सामने आना अभी बाकी है। ये बघेल द्वारा व्यक्त किए गए राजनीतिक आरोप हैं।
दीपक बैज ने पूछा- बड़े नक्सली नेताओं को कब मिलेगी सजा?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी अदालत के फैसले के बाद सवाल उठाया कि जिन 10 लोगों को सजा मिली है, उनकी भूमिका हमले की पूरी साजिश में क्या थी और बड़े नक्सली नेताओं पर कार्रवाई कब होगी।
बैज ने आरोप लगाया कि दोषी ठहराए गए लोग नक्सली संगठन के निचले स्तर के कैडर थे और हमले की योजना बनाने वाले बड़े नेताओं पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि झीरम मामले में अंतिम न्याय तभी माना जाएगा, जब कथित मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका भी कानूनी प्रक्रिया में सामने आए।
सरकार की ओर से NIA जांच का बचाव
वहीं, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने NIA की जांच का बचाव करते हुए कहा कि जांच के आधार पर ही अदालत में आरोप साबित हुए और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया। उन्होंने बघेल की आपत्तियों को लेकर भी सवाल उठाए।
फांसी की सजा के बाद आगे क्या?
अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की सजा का तत्काल निष्पादन नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मृत्युदंड की हाईकोर्ट से पुष्टि आवश्यक है और दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। इसलिए यह मामला आगे उच्च न्यायालय की कानूनी प्रक्रिया से गुजरेगा।
झीरम घाटी हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद अब एक ओर 10 दोषियों को मिली मृत्युदंड की सजा चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच इस सवाल पर बहस जारी है कि क्या हमले की पूरी साजिश और उसमें कथित रूप से शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है।नोट: खबर में भूपेश बघेल और दीपक बैज के आरोपों को उनके बयानों के रूप में रखा गया है, ताकि समाचार में आरोप और स्थापित न्यायिक तथ्य अलग-अलग स्पष्ट रहें।
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