✍️हमर प्रदेश सीजी न्यूज़ मनोज कुमार भट्ट स्टेट रिपोर्टर बस्तर छत्तीसगढ़
21 साल बाद केरलापेंदा में खुले श्रीराम मंदिर के द्वार, फिर गूंजी पूजा की घंटियां
*जगदलपुर।* बस्तर अब बदल रहा है। कभी जिन रास्तों को 'खूनी सड़क' कहा जाता था, वहां अब
विकास और शांति की कहानी लिखी जा रही है। दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स के दल ने सुकमा से जगरगुंडा, केरलापेंदा से पूवर्ती तक 13 घंटे का सफर कर इस बदलते बस्तर को करीब से देखा।
सुबह सुकमा पुनर्वास केंद्र में आत्मसमर्पित नक्सलियों से संवाद किया, फिर SP सुकमा से सुरक्षा और विकास की जानकारी ली।
इसके बाद दल उसी 'खूनी सड़क' से जगरगुंडा पहुंचा, जहां 2010 में 76 जवानों की शहादत हुई थी।
यात्रा का सबसे भावुक पल केरलापेंदा में रहा। यहां 21 साल तक बंद रहा श्रीराम मंदिर अप्रैल 2024 में फिर खुला है। 2003 में माओवादियों के फरमान के बाद बंद हुए इस मंदिर में अब फिर से पूजा हो रही है। ग्रामीणों ने बताया 2025 में यहां 16 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद गांव को माओवादी मुक्त घोषित किया गया था।
रात में दल पूवर्ती पहुंचा, जो नक्सली कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है। यहां उन्होंने हिड़मा के भाई-भाभी से मुलाकात कर गांव की स्थिति जानी।
यह यात्रा बस्तर के दो चेहरे दिखाती है - एक अतीत के संघर्ष का, दूसरा वर्तमान में लौट रही शांति और आस्था का।
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