Wednesday, September 30 2026
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*जगदलपुर: डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल अस्पताल में लापरवाही का आरोप, डिस्चार्ज के लिए 12 घंटे तक भटकाया, कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को भी रोका*

State Head - Kishor
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*जगदलपुर: डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल अस्पताल में लापरवाही का आरोप, डिस्चार्ज के लिए 12 घंटे तक भटकाया, कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को भी रोका*

✍️स्टेट रिपोर्टर मनोज भट्ट हमर प्रदेश छत्तीसगढ़ बस्तर*

जगदलपुर - डिमरापाल स्थित छत्तीसगढ़ कॉन्टिनेंटल अस्पताल में एक बार फिर प्रबंधन पर लापरवाही और बदइंतजामी के गंभीर आरोप लगे हैं। अपने पिता के दिल की बीमारी का इलाज कराने पहुंचे एक युवक और उसके पूरे परिवार को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

 

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में दो दिनों तक जांच और इलाज के नाम पर उन्हें सिर्फ यहां-वहां भटकाया गया। हद तो तब हो गई जब मरीज को डिस्चार्ज कराने के लिए भी परिवार को 12 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। वहीं, जब पीड़ित परिवार ने अपनी परेशानी मीडिया को बताई, तो अस्पताल प्रबंधन ने कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को भी रोक दिया।

 

*क्या है पूरा मामला?*

 

पीड़ित परिजन रुद्रप्रताप सेठिया ने बताया कि वे अपने पिता को दिल की बीमारी के इलाज के लिए छत्तीसगढ़ कॉन्टिनेंटल अस्पताल लेकर आए थे। अस्पताल पहुंचने के बाद पहला पूरा दिन सिर्फ डॉक्टरों के इंतजार और शुरुआती जांच में ही बीत गया। अगले दिन सुबह मरीज की एंजियोग्राफी की गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें स्टेंट लगाने की सलाह दी।

 

डॉक्टरों की सलाह के बाद परिवार ने अपने पिता का इलाज किसी दूसरे बड़े अस्पताल में कराने की इच्छा जताई और अस्पताल प्रबंधन से डिस्चार्ज मांगा। परिजनों का आरोप है कि डिस्चार्ज मांगते ही प्रबंधन ने कभी मरीज को 'ऑब्जर्वेशन' में रखने तो कभी 'बिलिंग' की कागजी कार्रवाई का बहाना बनाकर उन्हें घंटों रोके रखा। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई डिस्चार्ज की यह प्रक्रिया रात 10 बजे तक खिंच गई।

 

*स्वास्थ्य मंत्री का बयान आया सामने*

 

इधर इस मामले पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मरीज और डॉक्टर के बीच कुछ कहा नहीं जा सकता। जब तक मरीज ठीक नहीं होगा उसे डॉक्टर भर्ती करेगा। यह सुपरस्पेशलिटी अस्पताल है। व्यवस्थाओं को ठीक करने में समय लगेगा। बस्तर के लोगों का विश्वास कमजोर नहीं हो रहा है बल्कि अस्पताल को लेकर विश्वास कमजोर कराने में कुछ अदृश्य ताकतें लगी हुई हैं।

 

*परिजन ने उठाए सवाल*

 

वहीं रुद्रप्रताप सेठिया ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल केवल नाम का है। उनका आरोप है कि डॉक्टर समय पर उपलब्ध नहीं रहते और मरीजों की बेहतर देखभाल भी नहीं हो रही है। मरीज को वार्ड में शिफ्ट करने के बाद काफी हद तक नर्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। स्वास्थ्य मंत्री को भी अस्पताल में आकर कुछ समय बिताना चाहिए और मरीजों एवं उनके परिजनों से सीधे अस्पताल की व्यवस्था को लेकर बात करनी चाहिए।

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Contributing writer at THE NEWS HUB. Covering the latest developments in खबरे काम की.

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