*छत्तीसगढ़ी उपन्यास, ‘भकली-जकली’ का विमोचन एवं समीक्षा कार्यक्रम सम्पन्न*
खरसिया। शासकीय महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खरसिया में शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘भकली-जकली’ के विमोचन एवं समीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उपन्यास के रचनाकार डॉ. रमेश टंडन हैं। आयोजन में साहित्य, शिक्षा, सामाजिक एवं पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े अतिथियों के साथ महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।
*दीप प्रज्वलन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत*
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद महान संत कबीर जी, गुरु घासीदास जी, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं भगवान बुद्ध के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया गया। राजकीय गीत के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया तथा आयोजन में पहुंचे अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
*साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े लोग हुए शामिल*
कार्यक्रम में डी.आर. माहेश्वरी (भूतपूर्व प्राचार्य), एच.पी. ढेढ़े (व्याख्याता, हिन्दी), आर.एन. भारद्वाज (अध्यक्ष), एम.आर. सोनी (महासचिव), छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज खरसिया, सपना पाटले (सह-संपादक, ‘पाश्चात्य काव्यशास्त्र’), वेदप्रकाश महंत (राज्य प्रभारी, संगठन एवं प्रशासन, छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन), रीना साहू एवं पिंकी साहू (पत्रकार कल्याण महासंघ छत्तीसगढ़ से सम्मान प्राप्त कवयित्रियां), घनश्याम टंडन (NET/JRF, हिन्दी), दामोदर पटेल (NET, हिन्दी), डमरूधर राठिया (राज्य स्तरीय खिलाड़ी), आरथो राठिया (M.A. Pol. Sc., Sociology, B.Ed., छात्र एम.ए. हिन्दी) तथा बुबुन घृतलहरे (भूतपूर्व छात्रा, हिन्दी) की उपस्थिति रही।वहीं महाविद्यालय के हिन्दी विभाग की शिक्षिकाओं कुसुम चौहान, अंजना शास्त्री एवं डॉ. शबीना खान सहित प्रीति अनंत एवं मुकेश राठिया और हिन्दी विभाग के अन्य स्टाफ, छात्र-छात्राएं तथा साहित्यप्रेमी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
*डॉ. रमेश टंडन के उपन्यास ‘भकली-जकली’ का हुआ विमोचन*
आयोजन के दौरान लेखक डॉ. रमेश टंडन के छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘भकली-जकली’ का अतिथियों की मौजूदगी में विमोचन किया गया। उपन्यास की कथा भकली और जकली नामक मां-बेटी के इर्द-गिर्द बुनी गई है। रचना में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और सामाजिक जीवन को वर्तमान संदर्भों के साथ देखने का प्रयास किया गया है।उपन्यास में प्रेम और मानवीय संबंधों के साथ सामाजिक शोषण, अधिकार, कानून एवं संविधान जैसे विषयों को भी स्थान दिया गया है। इसके अलावा ईश्वर के सगुण-निर्गुण स्वरूप, अंधविश्वास और ढोंग जैसे विषयों पर भी रचना के माध्यम से विमर्श किया गया है।
*विमोचन के बाद हुई उपन्यास की समीक्षा*
विमोचन के पश्चात उपन्यास पर विशेष समीक्षा सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन आरथो राठिया ने किया। इस दौरान उपस्थित साहित्यिक व्यक्तित्वों एवं अतिथियों ने उपन्यास के कथानक, भाषा, विषयवस्तु और सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार साझा किए। समीक्षा में उपन्यास को छत्तीसगढ़ी समाज, संस्कृति, मानवीय रिश्तों और सामाजिक परिस्थितियों को साहित्य के माध्यम से सामने रखने वाली रचना के रूप में देखा गया। वक्ताओं ने स्थानीय भाषा में साहित्य सृजन को नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
*छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के संरक्षण पर जोर*
कार्यक्रम में वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा में रची गई साहित्यिक कृतियां समाज के जीवन, संघर्ष, संस्कृति और संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करने का माध्यम बनती हैं।कार्यक्रम का आयोजन स्नातकोत्तर छत्तीसगढ़ी साहित्य परिषद तथा सह-आयोजन स्नातकोत्तर हिन्दी साहित्य परिषद द्वारा किया गया।
‘भकली-जकली’ के विमोचन एवं समीक्षा के इस आयोजन ने शासकीय महात्मा गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खरसिया के साहित्यिक वातावरण में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा और छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के प्रति विद्यार्थियों एवं साहित्यप्रेमियों की रुचि को मंच प्रदान किया।
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